फर्टिलिटी का न्यूट्रिशन से है सीधा संबंध इसलिए जरूरी है सही डाइट और लाइफस्टाइल फॉलो करना

ज्यादा उम्र में प्रेग्नेंसी में होने वाली दिक्कतों से बचना चाहते हैं तो बहुत जरूरी है न्यूट्रिशन से भरपूर डाइट लेना और सही लाइफस्टाइल फॉलो करना। इसकी इग्नोरेंस से प्रेग्नेंसी के दौरान और डिलीवरी के समय भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Priyanka SinghSun, 19 Sep 2021 07:00 AM (IST)
महिला व पुरुष साथ में खाते हुए

सभी लोग यह बात जानते हैं कि सेहत से भरपूर जिंदगी जीने में पोषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन यह बहुत कम लोग जानते हैं कि पोषण प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। डायबिटीज जैसी किसी भी समस्या के लिए हम जो खाते हैं और उस पर हमारा शरीर कैसे प्रतिक्रिया देता है, इसका सीधा संबंध है। लगातार लॉकडाउन और कोरोना-19 से उपजी दूसरी परेशानियों से कपल्स को चाइल्ड प्लानिंग में देरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके नतीजे के तौर पर प्रेग्नेंसी को टाल दिया गया, जिससे ज्यादा उम्र में गर्भधारण और उससे जुड़ी परेशानियां सामने आईं। तो उचित पोषण की मदद से इस तरह की परेशानियों को पूरी तरह से खत्म तो नहीं किया जा सकता लेकिन कंट्रोल जरूर किया जा सकता है।

लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव कर

शरीर में प्रजनन तंत्र के ठीक ढंग से काम करने के लिए व्यक्ति का हेल्दी होना बहुत ही जरूरी है। यह देखा गया है कि विकासशील देशों में बांझपन की समस्या का मूल कारण कुपोषण होता है। जबकि विकसित देशों में जरूरत से ज्यादा खाना, ज्यादा कैलोरी के आहार खाना और मोटापा बांझपन के मुख्य कारण है। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए कोई व्यक्ति क्या खाता है, इसके साथ नियमित व्यायाम और शरीर का मूवमेंट भी काफी जरूरी है। तरह-तरह के अध्ययन से पता चला है कि साधारण वजन की महिला की तुलना में मोटापे का शिकार महिलाओं में बांझपन की दर ज्यादा होती है। इसके अलावा पुरुषों में स्पर्म और दूसरे हार्मोंस की संख्या और उनकी क्वॉलिटी से प्रजनन क्षमता में अनियिमितता आती है। लाइफस्टाइल में साधारण बदलाव कर, जैसे पोषण से भरपूर संतुलित भोजन और व्यायाम से काफी हद तक वजन को नियंत्रण में रखा जा सकता है और फर्टिलिटी में सुधार किया जा सकता है।

सही और संतुलित डाइट लेकर 

सामान्य रूप से फल, सब्जी, साबुज अनाज और अनसैचुरेटेड फैट्स पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता के सुधार से जुड़े हैं। कुदरती रूप से सैचुरेटेड फैट्स और रिफाइंड या एडेड शुगर प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। महिलाओं में फोलिक एसिड डीएनए को दुरुस्त कर और लाल रक्त कोशिकाएं का उत्पादन कर गर्भधारण करने की क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अध्ययन में यह दिखाया गया है कि प्रेग्नेंसी को प्लान करने से पहले सप्लिमेंट के रूप में नियमित रूप से फोलिक एसिड लेने से गर्भपात की आशंका काफी कम हो जाती है। सप्लिमेंट लेने के अलावा फोलिक एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां, संपूर्ण आहार और अंडों को अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है।

पुरुषों में कम फोलेट लेवल को कम स्पर्म काउंट और चुस्ती-फुर्ती और गतिशीलता से जोड़ा जा सकता है। विटामिन बी 12 को डिंबोत्सर्जन (ओव्‍युलेशन) के जोखिम को कम करने और पुरुषों में स्पर्म की बेहतर क्वॉलिटी से जोड़ा जाता है। ओमेगा-3 अंडों की क्वॉलिटी सुधारता है। ओवरीज (गर्भाशय में डिंबग्रंथियों) की उम्र बढ़ने की रफ्तार में कमी लाता है और स्पर्म की गतिशीलता बढ़ाता है। इससे गर्भावस्था से जुड़ी परेशानियां भी काफी कम हो जाती है। विटामिन बी-12 के खाद्य स्त्रोतों में अंडे और डेयरी प्रॉड्क्ट्स शामिल है, जबकि ओमेगा-3 को मछली, चिया सीड और अखरोट में पाया जाता है।

तनाव से दूरी

स्वस्थ जीवनशैली और आहार के अलावा, व्यक्ति को अपनी प्रजनन क्षमता में सुधार के लिए तनाव से दूर रहने और माइंड-बॉडी थेरेपी को अमल में लाने की जरूरत होती है। इससे तनाव नियंत्रण में रहता है और इसके साथ ही वह अपनी फर्टिलिटी की देखभाल भी कर सकते हैं।

(युतिका शर्मा वाजपेयी, एमडी-एफआरएम, डायरेक्टर एवं हेड, रीजेंसी आईवीएफ, रीजेंसी अस्पताल, कानपुर से बातचीत पर आधारित)

Pic credit- pexels

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