सर्दियों के मौसम में इन 4 वजहों से बढ़ जाता है हार्ट फेलियर का ख़तरा!

सर्दियों के मौसम में छाती में संक्रमण हृदय गति में वृद्धि और रक्तचाप जैसी स्थितियों में वृद्धि होती है जो हृदय गति को खराब कर सकती हैं। कम तापमान रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण कर सकता है और रक्त प्रवाह को प्रतिबंधित कर सकता है

Ruhee ParvezMon, 06 Dec 2021 01:13 PM (IST)
सर्दियों के मौसम में इन 4 वजहों से बढ़ जाता है हार्ट फेलियर का ख़तरा!

नई दिल्ली, रूही परवेज़। कई अध्ययनों से पता चलता है कि सर्दी के मौसम में अस्पताल में भर्ती होने और हृदय गति रुकने के रोगियों की मृत्यु दर अधिक होती है। सा प्रमुख रूप से इसलिए होता है क्योंकि तापमान में तेज़ी से गिरावट होने से कई तरह के शारीरिक परिवर्तन आते हैं, जिससे रोग और बिगड़ जाता है।

ट्रीटमेंट शेड्यूल, लाइफस्टाइल में बदलाव और हृदय रोग विशेषज्ञ के साथ नियमित जांच के साथ, शुरुआत में समय पर इलाज से हार्ट फेलियर को प्रबंधित किया जा सकता है।

डॉ. विशाल रस्‍तोगी, एडिशनल डायरेक्‍टर, कार्डियक साइंसेस, फोर्टिस एस्‍कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट, नई

दिल्‍ली, के अनुसार, " सर्दियों के मौसम में, छाती में संक्रमण, हृदय गति में वृद्धि और रक्तचाप जैसी स्थितियों में वृद्धि होती है, जो हृदय गति को खराब कर सकती हैं। कम तापमान रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण कर सकता है और रक्त प्रवाह को प्रतिबंधित कर सकता है जिससे हृदय पर अधिक दबाव पड़ सकता है। इसलिए दिल के रोगियों का अगर समय रहते इलाज हो जाए, तो काफी फायदा मिल सकता है, खासतौर पर सर्दियों में।"

आइए सर्दियों में हार्ट फेलियर से जुड़े कुछ जोखिम कारकों के बारे में जानते हैं:

1. हाई ब्लड प्रेशर: ठंड का मौसम रक्तचाप के स्तर में उतार-चढ़ाव और हृदय गति में वृद्धि का कारण बन सकता है। नतीजतन, यह दिल की विफलता के रोगियों में अस्पताल में भर्ती होने का कारण बन सकता है।

2. वायु प्रदूषण: सर्दियों के दौरान, स्मॉग और प्रदूषक ज़मीन के करीब जमा हो जाते हैं, जिससे छाती में संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ होने की संभावना बढ़ जाती है। हार्ट फेलियर के रोगियों को आमतौर पर सांस की तकलीफ का अनुभव होता है और प्रदूषक उनके लक्षणों को खराब कर सकते हैं, जिससे गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है।

3. पसीने की कमी: कम तापमान से पसीना कम होता है। नतीजतन, शरीर अतिरिक्त पानी से छुटकारा पाने में सक्षम नहीं हो सकता है और यह फेफड़ों में तरल पदार्थ का निर्माण कर सकता है, जिससे हार्ट फेलियर के रोगियों में हृदय क्रिया बिगड़ सकती है।

4. विटामिन-डी की कमी: विटामिन-डी दिल में स्कार टिशू के निर्माण को रोकता है जो दिल के दौरे के बाद हार्ट फेलियर से बचाता है। सर्दियों में, सूरज की रोशनी के उचित संपर्क की कमी के कारण, कम विटामिन-डी के स्तर से दिल की विफलता का ख़तरा बढ़ जाता है।

डॉ. संजय मित्‍तल, डायरेक्‍टर, क्लिनिकल एंड प्रीवेंटिव कार्डियोलॉजी, हार्ट इंस्टिट्यूट, मेदांता, नई दिल्‍ली, ने कहा, “हार्ट फेलियर एक स्‍थायी रोग है, जिससे लोगों का जीवन बाधित होता है और जिसे पूरी जिन्‍दगी मैनेज करने की ज़रूरत होती है। पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में हार्ट फेलियर कम आयु में हो जाता है। इसका प्रमुख कारण है ख़राब जीवनशैली, जैसे बहुत ज्‍यादा धूम्रपान करना, कम शारीरिक गतिविधि और खान-पान सम्‍बंधी खराब आदतें। सर्दियों में वायु प्रदूषण बढ़ने के अलावा फ्लूड रिटेंशन की संभावना, ब्‍लड प्रेशर और हृदय का तनाव बढ़ने से पहले से फेल हार्ट पर ज्‍यादा लोड आ जाता है। इसलिए सर्दियों में हार्ट फेलियर के लक्षणों पर बारीकी से ध्‍यान देकर इसके मरीजों की अतिरिक्‍त देखभाल करना जरूरी होता है।”

सर्दियों में ऐसे रखें दिल को सुरक्षित

'शीतकालीन प्रभाव' के बारे में जागरूकता से रोगियों और उनके परिवार को हार्ट फेलियर के लक्षणों पर अधिक ध्यान देने और उचित दवा और जीवन शैली में बदलाव के साथ स्थिति का प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। हार्ट फेलियर के रोगियों और पहले से मौजूद दिल की स्थिति वाले लोगों को सर्दियों के मौसम में विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए और निम्नलिखित व्यवस्था को शामिल करना चाहिए:

- अपने कार्डियोलॉजिस्ट को समय-समय पर दिखाएं और ब्लड प्रेशर का ध्यान रखें।

- पानी और नमक का सेवन कम रखें क्योंकि सर्दियों में हमें ज़्यादा पसीना नहीं आता।

- दिल के मरीज़ों को रोज़ाना एक्सरसाइज़ करना चाहिए, हालांकि, ज़्यादा ठंड या गर्मी में घर के अंदर की वर्कआउट करने की सलाह दी जाती है।

- अपनी दवाइयां लेना न भूलें या छोड़ें, फिर चाहे आप अच्छा ही क्यों न महसूस कर रहे हों।

- सर्दियों के मौसम में खुद को सर्दी, ज़ुकाम, फ्लू जैसी बीमारियों से सुरक्षित रखें।

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