कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद्र की मनी जयंती

नोवामुंडी इंटर कालेज में शनिवार को कहानीकार सह कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 141वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कालेज प्राचार्य डा. मनोजीत विश्वास ने उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित किया।

JagranSat, 31 Jul 2021 06:50 PM (IST)
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद्र की मनी जयंती

संसू, नोवामुंडी : नोवामुंडी इंटर कालेज में शनिवार को कहानीकार सह कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 141वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कालेज प्राचार्य डा. मनोजीत विश्वास ने उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित किया। उपस्थित अन्य शिक्षकों ने भी पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। प्राचार्य ने उनकी जीवनी के विषय में बताया कि हिदी साहित्य में उनका नाम अमर है। कथा सम्राट प्रेमचंद ने हिदी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्यकारों और देशवासियों का मार्गदर्शन किया। इस दौरान हिदी शिक्षक चैतन्य बेहरा के अलावा पीएन महतो, शिक्षक कुलजिदर सिंह, मुकेश सिंह, संतोष कुमार पाठक, नरेश कुमार पान, दिवाकर गोप, संध्या कुमारी, तन्मय मंडल, भवानी कुमारी, रामेश्वर कुजूर, धनीराम महतो, दयानिधि प्रधान, जगन्नाथ प्रधान, गुरुचरण बालमुचू आदि उपस्थित थे।

प्राचार्य ने बताया कि मुंशी प्रेमचंद ने 12 उपन्यास व 500 से अधिक कहानियां लिखी। उनकी कहानियों की विशेषता आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक पुस्तकें बच्चों के भविष्य हैं। हिदी शिक्षक चैतन्य बेहरा ने प्रेमचंद के जीवन और साहित्य पर चर्चा करते बताया कि आज भी भारतीय किसान होरी की तरह मजदूर बनने को मजबूर है। किसानों, मजदूरों और स्त्रियों की दशा आज भी बेहतर नहीं हो पा रही है। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने भी प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ उपन्यास और कहानियों का व्याख्यान किया। प्रेमचंद का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास 'गोदान' अंतिम कहानी 'कफन', दो बैलों की कथा, 'पूस की रात' और उनकी कहानी 'बड़े घर की बेटी' विषय पर विश्लेषणात्मक विचार व्यक्त किया।

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महिला कालेज में मनी कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती

जासं, चाईबासा : महिला कालेज चाईबासा में प्रेमचंद्र जयंती समारोह गुगल मीट पर आयोजित की गई। इस दौरान महिला कॉलेज की प्राचार्या डा. सलोमी टोपनो ने कहा कि कथा सम्राट प्रेमचंद्र की सोच सबसे अलग थी। उन्होंने अपने कथा से समाज को एक नई दिशा देने का काम किया था। उनकी कालजयिता महान थी। किसी भी समाज को बदलाव लाने के लिए अच्छे लेखक का होना बहुत जरुरी है। उनके रचनाओं को छात्राओं को जरूरी पढ़ना चाहिए। जिससे उनके द्वारा कई अच्छी सोच पैदा किया जा सके। इस मौके पर हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. सुचिता बाड़ा, अरुणा कुमारी, अंजना कलौजिया, दिनेश साहू समेत अन्य मौजूद थे।

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