सड़कों का जाल जर्जर और बदहाल

सड़कों का जाल जर्जर और बदहाल

सुरक्षित यात्रा के लिए सड़कों को बेहतर होना जरुरी है जिससे लोग आसानी के साथ यात्रा कर सकें। वहीं पश्चिम सिंहभूम जिला के लिए सबसे महत्वपूर्ण नेशनल हाइवे 75 सड़क की हालत ऐसी है कि उससे लोग गुजरने से भी कतराने लगे हैं।

Publish Date:Thu, 26 Nov 2020 08:07 PM (IST) Author: Jagran

संवाद सहयोगी, चाईबासा : सुरक्षित यात्रा के लिए सड़कों को बेहतर होना जरुरी है जिससे लोग आसानी के साथ यात्रा कर सकें। वहीं पश्चिम सिंहभूम जिला के लिए सबसे महत्वपूर्ण नेशनल हाइवे 75 सड़क की हालत ऐसी है कि उससे लोग गुजरने से भी कतराने लगे हैं। रांची से जैंतगढ़ तक यह सड़क बंदगांव से लेकर जैंतगढ़ पश्चिम सिंहभूम जिला के अंतर्गत आती है। इसकी लंबाई लगभग 150 किलोमीटर है। यह सड़क अधिकतर जगहों में जर्जर हो चुकी है। बंदगांव घाटी पूरी तरह जर्जर है। वहीं चाईबासा से लेकर हाटगम्हरिया तक सड़क चलने लायक नहीं है। चाईबासा के बड़ी बाजार के पास सड़क की हालत ऐसी है कि वाहन चालक सोचने लगते हैं कि गाड़ी कहां से पार किया जाए। आये दिन बड़ी बाजार के पास जर्जर सड़क में दुर्घटना होते रहती है। इस ओर विभाग का ध्यान बिलकुल भी नहीं है। वहीं चाईबासा से भरभरिया सड़क काफी जर्जर हो चुकी है। विभाग की ओर से ठेकेदार को टेंडर दिया गया है लेकिन काम शुरू ही नहीं किया गया। दूसरी ओर दुर्घटना के लिए मशहूर ब्लैक स्पाट एस मोड़ को विभाग ने कुछ ठीक किया है इसके बावजूद आये दिन वहां दुर्घटना होते रहती है। चक्रधरपुर से आने के क्रम में कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। जिससे वाहनों को खुद ही संभलकर गुजरना पड़ता है। चाईबासा से जगन्नाथपुर सड़क में सेरेंगसिया घाटी में आए दिन दुर्घटना होना आम है इसके बावजूद विभाग की ओर से सभी जरुरी दिशा-निर्देश सूचना पट नहीं लगाया गया है। इस सड़क में प्रत्येक माह 8-10 दुर्घटना होती है जिसमें लोग अपनी जान को गंवाते हैं। इसी प्रकार भागाबिला घाटी और जांगीबुरु घाटी में दुर्घटना होना आम बात है। यहां किसी प्रकार का भी सूचना पट और चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया है। जगन्नाथपुर के कॉलेज मोड़ भी दुर्घटना के लिए ब्लैक स्पाट के रूप में चिन्हित है। वहां तीखा मोड़ होने की वजह से प्रत्येक माह 5-6 सड़क दुर्घटना देखने को मिलती है। खराब सड़कों की वजह से भारी मालवाहक वाहन खराब होकर सड़क किनारे खड़े रहते हैं। इसमें भी आए दिन दुर्घटना देखने को मिलती है। शहर में नो इंट्री लगा होने की वजह से ट्रकों को बाइपास व टाटा रोड में सड़क किनारे दिनभर चालक खड़ाकर छोड़ देते हैं, इनकीवजह से भी दुर्घटना होती है। इस प्रकार कभी प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं की गई है। - पश्चिम सिंहभूम जिला में दो साल पहले 12 ब्लैक स्पाट चिन्हित किए गए थे। उससे सुधारकर बेहतर कर दिया गया है। पिछले एक वर्ष में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां लगातार एक ही जगह सड़क दुर्घटना हुई है इसलिए जिले में अभी एक भी ब्लैक स्पाट चिन्हित नहीं किया गया है। जहां तीखा मोड़ है, उस जगह विभाग की ओर से सूचना पट लगाने का काम किया जा रहा है लेकिन अधिकतर सड़क दुर्घटना तेज रफ्तार व नशापान के कारण ग्रामीण क्षेत्र में हो रही है। विभाग की ओर से उसे भी रोकने के लिए विशेष प्लान तैयार कर रही है जिससे ग्रामीण क्षेत्र में सड़क दुर्घटना को रोका जा सके।

- शिव कुमार राय, जिला मैनेजर सड़क सुरक्षा समिति।

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