शाम को शिलान्यास, सुबह शिलापट गायब

सुनने में कुछ अजीब जरूर लगेगा लेकिन सत्य है। एक बार फिर लघु सिंचाई विभाग सड़क निर्माण कार्य को लेकर घेरे में है। मामला पश्चिम सिंहभूम जिला के मनोहरपुर प्रखंड के रायकेरा पंचायत के खुदपोस गाव के कुड़ना टोला का है।

JagranWed, 01 Dec 2021 06:44 AM (IST)
शाम को शिलान्यास, सुबह शिलापट गायब

संवाद सूत्र, मनोहरपुर : सुनने में कुछ अजीब जरूर लगेगा लेकिन सत्य है। एक बार फिर लघु सिंचाई विभाग सड़क निर्माण कार्य को लेकर घेरे में है। मामला पश्चिम सिंहभूम जिला के मनोहरपुर प्रखंड के रायकेरा पंचायत के खुदपोस गाव के कुड़ना टोला का है। कुड़ना से कोचा कुड़ना जाने वाली सड़क का सोमवार की शाम लगभग 4:40 बजे राज्य की महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की मंत्री जोबा माझी ने सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास शिलापट अनावरण कर किया गया। पर सुबह होते-होते शिलापट गायब हो गया। ग्रामीणों से पूछताछ के बाद पता चला कि कथित ठेकेदार के कहने पर गांव के ही एक व्यक्ति ने शिलापट उखाड़ कर सुरक्षित घर में रख लिया है। क्योंकि शिलान्यास स्थल व शिलापट में अंकित सड़क अलग-अलग है।

शिलापट पर रायकेरा से कुदपोस होते हुए मथुरापोस गाव तक पीसीसी सड़क निर्माण अंकित था। पर जहां शिलान्यास हुआ वह सड़क कुड़ना से कोचा कुड़ना है। यह सड़क मथुरापोस नहीं जाती है। मथुरापोस पीडब्लूडी सड़क की दूसरी ओर शिलान्यास स्थल से लगभग डेढ़ किमी दूर है। कुड़ना खुदपोस गाव का एक टोला है, जो मनोहरपुर प्रखंड के रायकेरा पंचायत क्षेत्र में पड़ता है। जबकि शिलापट पर अंकित था कि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट के तहत रायकेरा से खुदपोस होते हुए मथुरापोस गाव तक सड़क निर्माण कार्य। शिलापट में न तो लंबाई, प्राक्कलित राशि और न ही ठेकेदार का नाम भी अंकित नहीं था। योजना संबंधित बोर्ड भी नहीं था। जिससे ग्रामीण भी भ्रमित हैं। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार डीएमएफटी फंड से लगभग 50 लाख रुपये की लागत से लगभग एक किमी सड़क निर्माण का कार्य मेगा कंस्ट्रक्शन द्वारा किया जाना है।

कुदपोस गाव के कुड़ना टोला में शिलान्यास कार्यक्रम की सूचना व निमंत्रण स्थानीय रायकेरा पंचायत की मुखिया एनिमा एक्का को भी ठेकेदार या देकेदार के सहयोगी द्वारा नहीं दिया गया। जबकि मुखिया का आवास शिलान्यास स्थल से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है। शिलान्यास के बाद एक ग्रामीण उन्हें आ कर सूचना दी।

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विधायक, सासद या ग्रामीण जो योजना का नाम भेजते हैं। वही स्वीकृत हो गया। योजना का स्टीमेट से एग्रीमेंट होता है। लोगों ने सर्वे कर लोकेशन के अनुसार स्टीमेट बना कर भेजा है, पर जो योजना का नाम आया वह स्वीकृत हो गया और वह ईशु बन गया है।

-अनूप कुमार, सहायक अभियंता ,लघु सिंचाई विभाग।

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