मुर्गी कर टांगडी, चखना रे नाटक के जरिये आनलाइन पढ़ाई की समस्याओं को उकेरा

'मुर्गी कर टांगडी, चखना रे' नाटक के जरिये आनलाइन पढ़ाई की समस्याओं को उकेरा

चाईबासा के बाल कलाकारों ने रविवार को शहीद पार्क के समीप दो नाटकों मुर्गी कर टांगड़ी चखना रे और दादी की कहानी-दादी की जुबानी का मंचन किया।

Publish Date:Sun, 17 Jan 2021 08:16 PM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, चाईबासा : चाईबासा के बाल कलाकारों ने रविवार को शहीद पार्क के समीप दो नाटकों 'मुर्गी कर टांगड़ी, चखना रे' और 'दादी की कहानी-दादी की जुबानी' का मंचन किया। इसका आयोजन बिदराई इंस्टीच्यूट फार रिसर्च स्टडी एंड एक्शन (बिरसा), चाईबासा द्वारा किया गया था। इसके पहले टीआरटीसी, गुईरा में भी इन नाटकों का मंचन हुआ था। 'मुर्गी कर टांगडी, चखना रे' नाटक में आनलाइन स्टडी के दौरान छात्रों के बीच उभरती समस्या और बढ़ती आपराधिक गतिविधियों को केंद्र में रखा गया है। वहीं 'दादी की कहानी-दादी की जुबानी' नाटक में पश्चिमी सिंहभूम में बढ़ रही हाथी की समस्या और उसके कारणों को केंद्र में रखा गया है। ये दोनों नाटक हो भाषा में तैयार किये गये है। इस नाटक में बिरसा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नुक्कड़ नाटक प्रशिक्षण शिविर के कलाकारों ने भाग लिया था। इस प्रशिक्षण शिविर के प्रशिक्षक इप्टा, रांची के रंगकर्मी उमेश नजीर और इफ्तेखार अहमद थे। नाटक के संदर्भ में प्रशिक्षक उमेश नजीर ने कहा कि ये दोनों समस्याएं गंभीर है और इसे कलाकारों द्वारा ही चिह्नित किया गया था, जिस पर नाटक तैयार किया गया है। वहीं इफ्तेखार अहमद ने कहा कि इन कलाकारों के अंदर काफी सृजनात्मक ऊर्जा और काम करने की क्षमता है। इस पर और गंभीर प्रयास की जरूरत है। बिरसा, चाईबासा की समन्वयक कदमा बानरा ने कहा कि इन तैयार नाटकों का मंचन प. सिंहभूम के कई गांवों में करने की योजना है, जिससे ग्रामीणों में जागरूकता आयेगी। साथ ही कलाकारों के सृजनात्मक क्षमता का उपयोग जनआंदोलन में किया जा सकेगा। इस मौके पर टाटा कॉलेज की पूर्व प्राचार्या कस्तूरी बोइपाई, प्रो. प्रशांत कुमार, जोहार असंगठित मजदूर यूनियन के आशीष कुदादा, शिवशंकर पूर्ती, अर्जुन गोप, जयंती देवगम समेत सैकड़ों की संख्या में दर्शक मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन कस्तूरी बोईपाई के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

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