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अजब-गजब परंपरा : कुत्ते के साथ हुई बच्ची की शादी निकाई गई बारात

जागरण संवाददाता, सरायकेला: दूल्हा था, दुल्हन थी और गाजे-बाजे के साथ बारात भी निकली। रश्मों रिवाज के साथ शादी हुई। भोज भी हुआ।

लेकिन, आपको जानकर यह हैरत होगी कि यह शादी किसी बालिग लड़का-लड़की की नहीं बल्कि एक बच्ची व कुत्ते की थी। झारखंड में अलग-अलग संस्कृति एवं परंपराएं जिसे वर्षों से निभाई जा रही है। इसी परंपरा को निभाते हुए गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत बड़ा कांकड़ा पंचायत के संजय गांव में सभी रश्मों के साथ वैवाहिक अनुष्ठान के साथ अलग-अलग घर के दो बच्चियों की शादी कुत्ते के बच्चे से कराई गई।

जानकारी हो कि यदि किसी बच्चे या बच्ची के दसवें महीने में ऊपरी जबड़ा में दांत निकलते हैं तो उसे अपशकुन माना जाता है। अपशकुन काटने के लिए ऐसी परंपरा है। लोगों में आस्था है कि ऐसा कराने पर सभी प्रकार के अनिष्ट कट जाते हैं। यह परंपरा यहां के अधिकांश आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र में होता है। धाíमक अनुष्ठान के साथ शादी की सारी रश्में पूरी की जाती है। शादी के बाद भोज का भी आयोजन किया जाता है जिसमें आमंत्रित अतिथि भी पहुंचते हैं। संजय ग्राम में मंगलवार को माघे पर्व मनाया गया। बुधवार को दो बच्चियों का कुत्ते से विवाह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी परंपरा को लेकर संजय ग्राम के पिता किसनो बानरा व माता बाहा माई की डेढ़ वर्ष की बेटी आरती की शादी कुत्ते के पिल्ले के साथ कराई गई। गाजा-बाजा के साथ कुत्ते की बरात आई और विवाह के बाद वर-वधू को गाजा-बाजा के साथ जुलूस निकाला गया। शादी में लोगों ने जमकर नृत्य भी किया। बच्ची की मां ने कहा कि उसकी बेटी आरती के ऊपरी जबड़े पर दांत निकल गया है जिसे अपशकुन माना जाता है। अपशकुन काटने के लिए परंपरा का निर्वाहन किया गया। इसी प्रकार पिता हरि कुदादा माता प्रमिला कुदादा की दो वर्ष की बेटी सुनीता की शादी भी कुत्ते के साथ कर दी गई। संजय ग्राम में बुधवार को दिन भर शादी का माहौल रहा।

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कुत्ते का पिता बनकर निकालते हैं बारात : शादी के लिए कोई कुत्ते का पिता बनता है और बारात लेकर बच्ची के घर पहुंचता है। बच्चे की शादी में कुतिया के घर बारात जाती है, जहां कोई पिता बनकर कुतिया का कन्यादान करता है। शादी के बाद भोज होता है

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गर्म लोहे से नाभी में भी दाग देने की परंपरा

झारखंड के ग्रामीण क्षेत्र में मकर संक्रांति के दूसरे दिन आखान यात्रा में बच्चे के नाभी को गर्म लोहे से दागने की भी परंपरा है। मान्यता है कि अगर पेट दर्द या पेट में किसी प्रकार की शिकायत है तो चिडु दाग(नाभी में दागने) कराने से पेट दर्द सदा के लिए गायब हो जाता है इसी परंपरा के तहत ग्रामीण क्षेत्र में आज भी नाभी दागने की प्रथा का प्रचलन है।

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