बंद आंखों से देखा जिंदगी का उजाला

दिव्यांगता अभिशाप नहीं होती बल्कि हमारा समझने का नजरिया अलग होता है। कोई जन्मजात होता है तो कोई बड़ा होकर किसी वजह से दिव्यांग हो जाता है। कुछ लोग समझते हैं कि अब पूरी जिदगी कुछ नहीं कर पाएंगे तो कुछ उसी बीच से जीने की राह निकाल लेते हैं।

JagranThu, 02 Dec 2021 11:56 PM (IST)
बंद आंखों से देखा जिंदगी का उजाला

संवाद सहयोगी, साहिबगंज : दिव्यांगता अभिशाप नहीं होती, बल्कि हमारा समझने का नजरिया अलग होता है। कोई जन्मजात होता है तो कोई बड़ा होकर किसी वजह से दिव्यांग हो जाता है। कुछ लोग समझते हैं कि अब पूरी जिदगी कुछ नहीं कर पाएंगे तो कुछ उसी बीच से जीने की राह निकाल लेते हैं। साहिबगंज में भी सैकड़ों दिव्यांग हैं। इनमें तलबन्ना के निरंजन कुमार यादव, शोभनपुर भट्ठा के कारू सिन्हा, पुरानी साहिबगंज के कुम्हार टोली के भूषण चौधरी, सुनील पंडित जैसे लोग किसी के सामने हाथ नहीं फैलाते हैं। इनमें कई की आंख नहीं है, मगर वे अपने हौसलों से जिंदगी का उजाला देख रहे हैं।

तालबन्ना रहने वाले 38 वर्षीय निरंजन कुमार यादव ने बताया कि चार साल की उम्र में दोनों आंखों की रोशनी चली गई थी। तब से आज तक दुनिया को खुली आंखों से नहीं देख पाए लेकिन आज हम खुद अपने पैरों पर खड़े हैं। किसी सहयोगी के साथ काम करके दो पैसा कमा लेते हैं। किसी ठेला पर लदे हुआ माल को पीछे से ठेलते हैं और अपने माथे पर लगभग 50 किलो का बोरा रखकर गोदाम में रख देते हैं। सरकार की तरफ से दिव्यांग पेंशन भी मिल रही है। पुरानी साहिबगंज के कुम्हार टोली का रहने वाले 63 वर्षीय सूरदास भूषण चौधरी जन्मांध हैं। गीत संगीत से बचपन से लगाव था। रेडियो हमेशा सुनते थे। इससे प्रभावित होकर इलाहाबाद कालेज से संगीत से बीए किया। हारमोनियम व केसिओ बजा लेते हैं। कहा कि मांग होने पर भागलपुर, पटना, पूर्णिया सहित अन्य जगहों पर जाते हैं लेकिन अब डीजे से परेशानी बढ़ गई है। मांग कम आने लगी है। पेंशन के सहारे जिदगी कट रही है। मुंह से दिव्यांग सुनील पंडित ढोलक बजा कर अपना परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। कहा कि डीजे आने के वजह से हम लोग की मांग कम होने लगी है और परिवार चलाने में मुश्किल होने लगी है। दो लड़का और तीन लड़की है। बच्चे को पढ़ाने में परेशानी हो रही है जिला प्रशासन से अपील है कि हमलोगों पर विशेष ध्यान दें ताकि बाकी जीवन खुशी-खुशी काट सकें।

साहिबगंज स्टेशन के पास फुटपाथ पर काम करने वाले शोभनपुर भट्ठा के रहने वाले 35 वर्षीय कारू सिन्हा ने कहा कि दोनों पैर और एक हाथ से दिव्यांग हैं। सालों से नारियल बेच रहे हैं। होनेवाली कमाई से परिवार चला रहे हैं। कहा कि सहारा बैंक में एक लाख तीस हजार रुपया डूब गया है। हम दिव्यांगों पर जिला प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।

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ऐसे दिव्यांग जो बेरोजगार हैं और उनके पास पूंजी नहीं है वैसे लोग प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत एक लाख से लेकर 25 लाख तक सब्सिडी पर लोन ले सकते हैं। आनलाइन आवेदन कर इसका लाभ ले सकते हैं। घर बैठे बैठे स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

रमेश गुप्ता, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र

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