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एकांत में मन की बजाए सुनें आत्मा की पुकार

एकांत में मन की बजाए सुनें आत्मा की पुकार
Publish Date:Mon, 03 Aug 2020 06:58 PM (IST) Author: Jagran

साहिबगंज : शहर के गांधी चौक स्थित कबीर आश्रम में सावन पूर्णिमा पर शारीरिक दूरी का पालन करते हुए सत्संग व भंडारा का आयोजन किया गया। इसमें शहर के अलावा आसपास के साधु-संतों ने भाग लिया।

मुख्य वक्ता महंत शंकर दास ने कहा कि एकांत में मन के बजाए आत्मा की पुकार को सुनना चाहिए। आत्मा और देह एकांत है लेकिन मन एकांत नहीं होता है बल्कि यह बाहरी मोह, माया, इच्छा, आशा, आशंका, धृणा, ईष्या, प्रेम, करुणा, ममता जैसे भाषों का केंद्र है। अत: एकांत का प्रभाव न तो देह पर पड़ता है और न आत्मा न पर। एकांत में हम उन चीजों को ध्यान देते हैं जिस पर अक्सर हमारा ध्यान नहीं जाता है। सफलता और भविष्य निर्माण की आधारशिला एकांत चितन है। जिसे भीड़ से हटकर ही भीड़ के लिए आदर्श एवं प्रेरणादायक बनाया जा सकता है। मौके पर संत विष्णु दास, संत जालीन दास, संत नकुल दास, संत कम्हाय दास, संत राम बरन दास, संत सुनील दास, संत गुलाल दास, संत नारायण दास, संत बनारसी दास, संत संजू दासिन, संत रिकू दासिन, संत जगदीश दास, संत विश्वजीत दास, पप्पू साहेब आदि उपस्थित थे।

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