Utpanna Ekadashi 2021: उत्पन्ना एकादशी कल, जानें...इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से कितने जन्मों के पाप हो जाते हैं नष्ट

Utpanna Ekadashi 2021 उत्पन्ना एकादशी(Utpanna Ekadashi) का व्रत 30 नवंबर यानि मंगलवार के दिन सबके लिए होगा। इस एकादशी का व्रत रखने से व्रती के अभीष्ट कार्य सिद्ध होते हैं। उत्पन्ना एकादशी का व्रत काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

Sanjay KumarMon, 29 Nov 2021 02:46 PM (IST)
Utpanna Ekadashi 2021: उत्पन्ना एकादशी कल, इस दिन पूजा करने से कितने जन्मों के पाप हो जाते है नष्ट

रांची जासं। Utpanna Ekadashi 2021: उत्पन्ना एकादशी(Utpanna Ekadashi) का व्रत 30 नवंबर यानि मंगलवार के दिन सबके लिए होगा। इस एकादशी का व्रत रखने से व्रती के अभीष्ट कार्य सिद्ध होते हैं। उत्पन्ना एकादशी का व्रत काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। उत्पन्ना एकादशी के दिन माता एकादशी(Mata Ekadashi) का जन्म हुआ था। इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। देवी एकादशी को भगवान विष्णु(Lord Vishnu) की शक्ति का एक रूप माना गया है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत(Fast) करने से मनुष्य के पिछले और वर्तमान दोनों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

एकादशी व्रत की तरह उत्पन्ना एकादशी व्रत के हैं कुछ नियम:

हर महीने पड़ने वाली एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए व्रत और पूजा की जाती है। इन एकादशी को अलग-अलग नाम से जाना जाता है। मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। इस साल उत्पन्ना एकादशी मंगलवार के दिन है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माता एकादशी ने राक्षस मुर का वध किया था। अन्य एकादशी व्रत की तरह उत्पन्ना एकादशी व्रत के कुछ नियम हैं। जिनका पालन करना जरूरी बताया गया है।

उत्पन्ना एकादशी व्रत मुहूर्त

उत्पन्ना एकादशी तिथि: 29 नवंबर (सोमवार) रात 11 बजकर 22 मिनट से शुरू उत्पन्ना एकादशी समापन: 30 दिसंबर (मंगलवार) रात 9 बजकर 59 मिनट तक

उत्पन्ना एकादशी का महत्व

देवी एकादशी श्री हरि का ही शक्ति रूप हैं, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने उत्पन्न होकर राक्षस मुर का वध किया था। इसलिए इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से मनुष्यों के पिछले जन्म के पाप भी नष्ट हो जाते हैं। उत्पन्ना एकादशी आरोग्य, संतान प्राप्ति और मोक्ष के लिए किया जाने वाला व्रत है।

व्रत के क्या है नियम:

उत्पन्ना एकादशी के दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत रखकर उनकी पूजा की जाती है। यह व्रत दो प्रकार से रखा जाता है, निर्जला और फलाहारी या जलीय व्रत। दिन की शुरुआत भगवान विष्णु को अर्घ्य देकर करें। अर्घ्य केवल हल्दी मिले हुए जल से ही दें। रोली या दूध का प्रयोग न करें। इस व्रत में दशमी को रात्रि में भोजन नहीं करना चाहिए। एकादशी को प्रातः काल श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है।

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