विभाजन एवं सिख दंगे की त्रासदी इतिहास का कलंकित अध्याय : डा. करण सिंह

दैनिक जागरण प्रभा खेतान फाउंडेशन एवं श्री सीमेंट के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को हुआ।

JagranSat, 25 Sep 2021 06:09 AM (IST)
विभाजन एवं सिख दंगे की त्रासदी इतिहास का कलंकित अध्याय : डा. करण सिंह

जासं, रांची : दैनिक जागरण, प्रभा खेतान फाउंडेशन एवं श्री सीमेंट के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ''एक मुलाकात विशेष कार्यक्रम के तहत वरिष्ठ भारतीय राजनीतिज्ञ एवं जम्मू-कश्मीर के पूर्व महाराज डॉ. करण सिंह एवं प्रख्यात लेखिका एवं समाजसेवी लेडी मोहिनी केंट नून की विशेष वार्ता वर्चुअल हुई। कार्यक्रम की प्रस्तुति स्वाति अग्रवाल ने की। वार्ता के दौरान दोनों दिग्गजों के बीच धर्म-अध्यात्म, राजनीति, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, ह्यूमन ट्रैफिकिग आदि विषयों पर चर्चा हुई।

गुफ्तगू के दौरान डा. करण सिंह ने देश विभाजन एवं सिख दंगे की त्रासदी को इतिहास को कलंकित अध्याय बताते हुए कहा कि हम देश की आजादी का जश्न धूमधाम से मनाते हैं। लेकिन हमें इसका भयावह पक्ष भी नहीं भूलना चाहिए। विभाजन के दौरान हिदुओं एवं सिखों के साथ जो भी हुआ। वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है। कई निर्दोष मारे गए। सैकड़ों लोग अपने परिवार से बिछड़ गए। कई लापता हो गए, जिनका आज तक पता नहीं चल पाया है। हमें आजादी की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। उसी प्रकार, जब 1984 में जब सिखों के खिलाफ दंगा हुआ था, उस वक्त मैं दिल्ली में ही था। परिस्थितियां कुछ इस प्रकार बन गई थी कि लोग अपने मित्रों के ही खिलाफ हो गए। डॉ. करण सिंह ने कहा कि 1984 में जो हुआ, देश पर हमेशा के लिए धब्बा बना रहेगा।

कार्यक्रम के दौरान लिली अंगेस्ट ह्यूमन ट्रैफिकिग की फाउंडर चेयरपर्सन लेडी मोहिनी केंट नून को उनके द्वारा मानव तस्करी के खिलाफ किए जा रहे कार्य एवं ''डियर मामा'' पुस्तक के कंटेट पर बधाई देते हुए कहा डॉ. सिंह ने कहा कि जीवन में मां का बड़ा महत्व है। बिना मां के कोई नहीं होता है। उन्होंने कहा कि हजारों बच्चे प्रतिवर्ष मानव तस्करों के चंगुल में फंसकर अंधेरी दुनिया में खो जाते हैं। उनका बचपन कहीं खो जाता है। ऐसे बच्चों के लिए विशेष तौर पर काम करने की जरूरत है।

वहीं, एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत में जहां दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती आदि देवियों को नारी शक्ति के रूप में पूजा जाता है। वहीं महिलाओं पर अत्याचार भी हो रहा है। यह समाज का स्याह पक्ष है। हमारा समाज पुरुष प्रधान है। लेकिन हमें इस सोच को बदलने के लिए मिलकर काम करना होगा। समाज में नारी-पुरुष का समान दर्जा होना चाहिए। देश की शिक्षा पद्धति पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि हम पांच हजार वर्ष तक बिना कंप्यूटर के शिक्षा ग्रहण करते आए हैं। आज लाखों लोग अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मेरे ख्याल से प्राचीन एवं आधुनिक पाठ्यक्रमों का समावेश कर एजुकेशन पॉलिसी बनाने की जरूरत है। भारतीय संस्कृति एवं विरासत को बचाने के लिए पाठ्यक्रम में वेदों का समावेश जरूरी है। वहीं, कहा कि मैंने प. जवाहरलाल नेहरू को अपना आदर्श और मेंटर माना है। उनकी पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया से मैं काफी प्रभावित हूं। दूसरी ओर अध्यात्म के क्षेत्र में श्रीकृष्ण सर्वश्रेष्ठ हैं। उन्होंने विश्व को योग और महान ग्रंथ भगवत गीता दिया। बचपन की स्मृति पर जोर डालते हुए हुए डॉ. सिंह ने कहा कि बचपन में वे कश्मीर में निशात बाग में जाकर लेट जाते थे और ऊंची-ऊंची चिनारों को निहारते रहते थे। यह उन्हें अच्छा लगता था।

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