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ऐसे होती है गार्डिग, सस्पेंड कर दें क्या

जागरण संवाददाता, रांची : दोपहर के लगभग बारह बजे थे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक जटाशकर चौधरी परीक्षा व्यवस्था देखने संत मार्केट स्कूल पहुंचे। स्कूल कैंपस में उनकी गाड़ी पहुंचते ही ऑफिस से निकल कर प्राचार्या और कुछ स्टाफ कक्षा की ओर भागे जहा परीक्षा चल रही थी। निदेशक आते के साथ ही एक कक्षा में प्रवेश किए। तब तक सभी अलर्ट हो गए थे। यहा तक तो सब ठीक-ठाक था। कक्षा का निरीक्षण करने के बाद निदेशक प्राचार्य कक्ष में पहुंचे। वहा सीसीटीवी के स्क्रीन के पास खड़े होकर देखने लगे। करीब 2 मिनट तक देखने के बाद निदेशक ने कहा, कक्षा नंबर 3 में देखिए दो बच्चे बात कर रहे हैं शिक्षक का वहा ध्यान नहीं है। फिर दोनों स्टूडेंट और वीक्षक को बुलाने के लिए कहा।

छात्र और वीक्षक पहुंचे। डायरेक्टर ने छात्र को डाटते हुए कहा ऐसे में सस्पेंड हो जाओगे बात क्यों कर रहे थे। उसे चेतावनी देकर भेज दिया। अब बारी थी वीक्षक सुषमा की। निदेशक ने कहा ऐसे ही गार्डिंग होती है। बच्चे आपस में बात कैसे करते हैं। सस्पेंड कर दें। वीक्षक सॉरी सर बोलने लगी अब ऐसी गलती नहीं होगी। निदेशक ने डीईओ मिथिलेश कुमार सिन्हा से पूछा क्या यह सरकारी स्कूल है तो डीईओ ने कहा सर यह माइनॉरिटी स्कूल है। फिर पूछा पैसा विभाग देता है तो जवाब मिला हा। डायरेक्टर ने कहा इन्हें शोकॉज कीजिए और शाम तक रिपोर्ट भेजिए। मारवाड़ी स्कूल के एक कक्षा में परीक्षा चल रही थी और दोनों वीक्षक बैठी हुई थीं। निदेशक को देखते ही दोनों खड़ी हो गई।

मारवाड़ी से शुरू मार्गेट पर खत्म

निदेशक निरीक्षण के क्रम में सबसे पहले मारवाड़ी स्कूल गए इसके बाद जिला स्कूल बाल कृष्णा, संत जॉन, संत पॉल व संत मार्गरेट आदि स्कूल गए। कुछ जगह तो इनके आने की भनक लग चुकी थी। लेकिन अधिकतर जगह अचानक निदेशक को देखते ही व्यवस्था टाइट हो जाती थी। निदेशक ने देखा संतपाल में एक छात्रा डेस्क पर सिर रखी थी। उन्होंने प्यार से छात्रा से पूछा कोई तकलीफ है, तो छात्रा ने कहा नहीं सब ठीक है सभी आसर लिख लिया है। निदेशक ने कई छात्रों के कॉपियों उठाकर भी देखा सब ठीक-ठाक पाया।

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