Jharkhand Mid Day Meal: 33 लाख बच्चों के खाते में जाएगी राशि...सभी जिलों को भेजे गए 251 करोड़ रुपये

Jharkhand Mid Day Meal Authority राज्य के सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़नेवाले कक्षा एक से आठ के 33 लाख बच्चों के खाते में 666 से 998 रुपये हस्तांतरित किए जाएंगे। यह राशि प्रधानमंत्री पोषण योजना (मध्याह्न भोजन योजना) के तहत कुकिंग कास्ट के रूप में दी जाएगी।

Kanchan SinghThu, 02 Dec 2021 08:10 AM (IST)
कक्षा एक से आठ के 33 लाख बच्चों के खाते में रुपये हस्तांतरित किए जाएंगे।

रांची, राब्यू।  राज्य के सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़नेवाले कक्षा एक से आठ के 33 लाख बच्चों के खाते में 666 से 998 रुपये हस्तांतरित किए जाएंगे। यह राशि प्रधानमंत्री पोषण योजना (मध्याह्न भोजन योजना) के तहत कुकिंग कास्ट के रूप में दी जाएगी। झारखंड मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने 33 लाख बच्चों के खाते में डीबीटी से राशि हस्तांतरित करने के लिए बुधवार को 251 करोड़ रुपये सभी जिलों को आवंटित कर दिए। राशि के हस्तांततरण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी सभी जिलों को भेज दिए गए। राज्य सरकार ने पहले एक अक्टूबर 2020 से 31 मार्च 2021 तक की अवधि के मध्याह्न भोजन की प्रतिपूर्ति (स्कूलों के बंद रहने के कारण) के रूप में चावल के अतिरिक्त कुकिंग कास्ट के बदले सूखा राशन देने का निर्णय लिया था।

इसके तहत पैकेट बनाकर बच्चों को अरहर दाल, सरसों तेल, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर तथा नमक दिए जाने थे। इसके लिए टेंडर भी आमंत्रित कर लिया गया था, लेकिन अब सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को रद करते हुए राशि हस्तांतरण करने का निर्णय लिया। दरअसल, पूर्व में भी कुकिंग कास्ट की राशि बच्चों के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती थी, लेकिन एक अक्टूबर 2020 से 31 मार्च 2021 की राशि के बदले सूखा राशन देने की तैयारी थी। बता दें कि इस याेजना में प्राथमिक स्कूलों को प्रति बच्चे 4.97 रुपये तथा उच्च प्राथमिक स्कूलों को 7.45 रुपये कुकिंग कास्ट के रूप में स्कूलों को मिलते हैं। इस तरह 134 दिनों के लिए कुकिंग कास्ट के बदले प्राथमिक स्कूलों में प्रत्येक बच्चों को अधिकतम 665.98 रुपये तथा उच्च प्राथमिक स्कूलों पर प्रति बच्चे अधिकतम 998.30 रुपये देय होंगे।

दो ही संस्थाएं तकनीकी रूप से हुईं सफल

कुकिंग कास्ट के बदले सूखा राशन उपलब्ध कराने को लेकर किए गए टेंडर में दो संस्थाएं ही तकनीकी रूप से सफल हुई थीं। इनमें केंद्रीय भंडार तथा नेशनल को-आपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन शामिल हैं। सूखा राशन वितरण में हो रही देरी को देखते हुए नए सिरे से टेंडर करने की बजाय बच्चों को राशि देने का ही निर्णय लिया गया।

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