पैशन के साथ पॉकेट मनी भी निकाल रहे टैक्सी बाइकर्स

जागरण संवाददाता, रांची : बाइक चलाना आज के युवाओं का जुनून है। और जब आपका जुनून ही आपके रोजगार का जरिया बन जाए तो इससे बेहतर बात क्या होगी। ओला, रैपिडो जैसी कंपनियों के आने के बाद ऐसे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खुल गए हैं। देश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच ये युवा बाइक टैक्सी को अपना पेशा बना रहे हैं। शहर में कई युवा फुलटाइमर बनकर तो कई युवा अपने पॉकेट खर्चे के लिए इस पेशे से जुड़े हैं। बाइक टैक्सी यानी बाइक को टैक्सी की तरह इस्तेमाल करना। मैट्रो सिटी के अलावा अब कई छोटे शहरों में भी बाइक टैक्सी उपलब्ध है। कंपनी इन बाइक टैक्सी ड्राइवरों को कैप्टन कहती हैं। फिलहाल रांची में दो कंपनियां यह सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। ओला तथा रैपिडो के अलावा उबेर भी यहां आने की योजना बना रही है। इससे शहर में लगभग लगभग 2500 राइडर्स को भी रोजगार मिला हुआ है।

यात्रियों को भी इन कंपनियों के आने से काफी फायदा हो रहा है। टैक्सी के मुकाबले बाइक टैक्सी का किराया बेहद कम है साथ ही ट्रैफिक वाले जगहों में भी यह अच्छा विकल्प है। ऑफिस जाने वाले लोग भी इसका खूब उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे यात्री जिनके पास सामान का बोझ कम है वे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

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घूमने का है शौक

बाइक टैक्सी ड्राइवर शक्ति कुमार बताते हैं कि उन्हें घूमने का बहुत शौक है। कैप्टन बनने के बाद वह अपने शौक के साथ पैसे भी कमा लेते हैं। काम का कोई बोझ नहीं है, जब मन करता है तभी बाइक चलाते हैं। रोजाना सात से आठ घंटे बाइक चलाने के बाद वह सारे खर्च जैसे कंपनी का कमीशन और पेट्रोल खर्च निकाल कर हर महीने 15 से 20 हजार रुपये कमा लेते हैं।

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बेहतर मौके उपलब्ध करा रहीं कंपनियां

एक अन्य कैप्टन अमित कुजूर बताते हैं कि आज रोजगार का बहुत संकट है। ऐसे में ये कंपनियां हमारे लिए बेहतर मौके उपलब्ध करा रही हैं। इससे पहले वह एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। सारा दिन ऑफिस में बैठ कर काम करने के बाद भी वह मात्र बारह हजार कमा पाते थे। उपर से काम का टारगेट पूरा करने के लिए बॉस का प्रेशर झेलना भी झेलते थे। लेकिन अब काम का कोई प्रेशर नहीं है जब समय मिलता है तभी बाइक चलाते हैं और आसानी से पंद्रह हजार कमा लेते हैं।

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बने फुलटाइमर

प्रवीण का कहना है कि बाइक उनका क्रेज है। पहले बाइक चलाने पर वे घरवालों की डांट भी सुनते थे। मगर अब तो यह उनके रोजगार से जुड़ गया है। वह सुबह 10 बजे से रात के 9 बजे तक बाइक चलाते हैं। वह लगभग पच्चीस हजार के आसपास कमा लेते हैं। अपने शहर में रहकर इससे बेहतर और क्या आय हो सकती है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ युवा ही इस पेशे से जुड़े हुए हैं। लोगों की भी ये आजीविका का साधन हैं। शशि कहते हैं कि वह पहले मुंबई में सिक्यूरिटी गार्ड का काम करते थे। डबल शिफ्ट करने के बाद भी वह घर के लिए बमुश्किल आठ से दस हजार रुपये बचा पाते थे। मगर आज वे शहर में रहकर बड़ी आसानी से बीस हजार घर में दे रहे हैं। वे कहते हैं कि मुंबई में कोई जानता नहीं था इसलिए गार्ड का काम करते हुए अजीब नहीं लगता था लेकिन यहां बाइक पर सवारी ढोते थोड़ा शर्म महसूस करता हूं। लेकिन यहां पैसे अच्छे मिल जाते हैं तो छुपछुप कर काम करता हूं।

रैपिडो देश के 80 शहरों में अपनी सेवाएं दे रही है। वहीं ओला ने 2020 तक भारत के 150 शहरों में यह बाइक टैक्सी सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है।

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