Jharkhand: राज्य खाद्य प्रयोगशाला को अब तक नहीं मिली मान्यता, आसानी से बच जाते हैं मिलावट के धंधे में संलिप्त लोग

Jharkhand नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड ऑफ लेबोरेटेरी द्वारा अभी तक राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला को मान्यता नहीं दी गई है। 30 जुलाई को प्री असेसमेंट होने के बाद लैब को जल्द ही मान्यता देने को लेकर उम्मीद जगी थी। फाइनल असेसमेंट के लिए लैब द्वारा पहले भी रिक्वेस्ट भेजा गया था

Kanchan SinghThu, 21 Oct 2021 09:55 AM (IST)
राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला को अभी तक मान्यता नहीं दी गई है।

रांची, जासं। नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड ऑफ लेबोरेटेरी (एनएबीएल) द्वारा अभी तक राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला को मान्यता नहीं दिया गया है। 30 जुलाई को प्री असेसमेंट होने के बाद लैब को जल्द ही मान्यता देने को लेकर उम्मीद जगी थी। फाइनल असेसमेंट के लिए लैब द्वारा एनएबीएल को पहले भी रिक्वेस्ट भेजा गया था। लेकिन एक्रीडिटेशन नहीं मिलने पर दुर्गा पूजा के पहले दोबारा एनएबीएल को आवेदन किया गया। मामला अभी तक लंबित है। मैनेजमेंट प्रीव्यूह मीटिंग के बाद लैब को दोबारा मान्यता मिलने की बात कही जा रही है। लेकिन यह कार्यवाही कब तक होगी, कोई कुछ नहीं कह पा रहा है।

लैब में खाद्य पदार्थों की सर्वे टेस्टिंग तो जारी है। लेकिन जनवरी माह से लीगल टेस्टिंग के लिए राज्य अभी भी कोलकाता स्थित खाद्य प्रयोगशाला पर निर्भर है। इस वजह से दोषियों पर भी समुचित कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इधर, दीपावली को लेकर बाजार में अधिक मुनाफे की लालच में खाद्य-पदार्थों में मिलावट करने वालों का खेल भी शुरू हो गया है। राज्य खाद्य प्रयोगशाला को एक्रीडिटेशन नहीं मिलने के कारण सरकार इन पर पूरी तरह से शिकंजा नहीं कस पा रही है। बता दें कि एनएबीएल द्वारा विगत नौ माह से इस लैब द्वारा जांच पर रोक लगा दी गई है। इस वजह से झारखंड में विगत जनवरी से मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच नहीं हो रही है।

तीन स्तर पर जूझ रहा लैब

राज्य खाद्य प्रयोगशाला तीन स्तर पर जूझ रहा है। एनएबीएल से मान्यता मिलने के बाद लैब में सर्वे जांच के अलावा वैध तौर पर भी खाद्य पदार्थों की जांच शुरू हो जाएगी। वहीं लैब स्टाफ की कमी की समस्या से भी जूझ रहा है। नवंबर-19 में खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए मशीनों की खरीद के लिए आवेदन भेजा गया था। अप्रैल-2020 तक मशीनों के आने की बात कही गई थी। लेकिन उपकरणों की खरीदारी अब शुरू हुई है। अब तक लगभग सात करोड़ रुपये मूल्य तक की मशीनें लग चुकी हैं।

इनमें खाद्य पदार्थों में मेटल की मात्रा की जांच के लिए आइसीपीएमएस व एएएस मशीन, पेस्टीसाइट्स, एंटीबायोटिक एवं टॉक्सीन एवं हार्मोंस की मात्रा की जांच के लिए एलसीएमएसएसस मशीन, प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट व फाइबर की जांच के लिए ऑटोमेटेड प्रोटीन एनालिसिस मशीन, खाद्य-पदार्थों में शुगर एवं ऑयल की बीआर स्केल की जांच करने के लिए डिजिटल रिफ्रेक्टोमीटर, वसा की मात्रा की जांच के लिए ऑटोमेटेड फैट एनालिसिस मशीन के अलावा हाल में ही सैंपल को ठंडा रखने के लिए चार रेफ्रिजरेटर, धातु की मात्रा जांचने के लिए एटॉमिक ऑब्जर्पशन स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, सैंपल बनाने को ओवन कम शेकर व सैंट्रीफ्यूज की मंगाई गई है।

हमारी ओर से एनएबीएल को फाइनल असेसमेंट के लिए आवेदन भेजा गया है। अभी तक उनकी ओर से इसे लेकर पहल नहीं हुई है। फिलहाल लैब में सर्वे जांच चल रहा है। अगर कोई व्यक्तिगत तौर पर किसी खाद्य पदार्थ की जांच कराना चाहता है, तो वह भी यहां आकर जांच करवा सकता है।

- चतुर्भुज मीणा, राज्य खाद्य विश्लेषक सह को-ऑर्डिनेटर, राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला।

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