परस्पर संघर्ष व विवाद से नहीं ढूंढा जा सकता सकारात्मक परिणाम : कुलसचिव

परस्पर संघर्ष व विवाद से नहीं ढूंढा जा सकता सकारात्मक परिणाम : कुलसचिव
Publish Date:Wed, 05 Aug 2020 05:09 PM (IST) Author: Jagran

संवाद सहयोगी, मेदिनीनगर : व्यक्ति, समाज व सरकार को मिलकर अचानक आए प्राकृतिक विपदा में सही सूत्र खोज निकालने का चितन-मनन और विचार करना अपेक्षित है। सकारात्मक परिणाम परस्पर संघर्ष और विवाद से नहीं ढूंढा जा सकता है। बल्कि परस्पर सहयोग और विमर्श से बड़ी-बड़ी समस्याओं के सार्थक समाधान निकाले जा सकते हैं। उक्त बातें नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो जयंत शेखर ने कही। वे रक्षाबंधन व संस्कृत दिवस के अवसर पर विद्वत परिषद की पलामू विभाग इकाई की ओर से आयोजित ऑनलाइन गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। कोरोना काल के बाद भारत में शिक्षा की दशा और दिशा विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई थी। गोष्ठी की अध्यक्षता एनपीयू के कुलसचिव ने की। उन्होंने पूरी गोष्ठी का निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए भारतीय शिक्षा का उद्देश्य पर प्रकाश डाला। विषय प्रवेश विद्वत परिषद के प्रांत संयोजक अमरकांत झा ने कराया। उन्होंने भूमिका पेश करते हुए शिक्षण, अधिगम और विकास अर्थात टीचिग, लर्निंग व इवोल्यूशन की कसौटी पर चुनौतियों का विश्लेषण और निदान निष्पादन के लिए दशा और दिशा नियत करने की बात कही। राजू कमल बिट्टू ने भारत में शिक्षा के अलौकिक अर्थात आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक व पारलौकिक जैसे संदर्भों का सूत्रवत विवेचन किया। कहा कि परिवर्तन की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। कभी अनुकूल तो कभी प्रतिकूल परिवर्तन होते हैं। प्रतिकूल समस्याओं का सब मिलजुल कर समाधान निकाल रहे हैं। समय के साथ समाधान के रास्ते स्पष्ट होते जाएंगे। समाज का लचीला स्वभाव संवेदना के साथ जनहित और बालक के हित में बदलाव अवश्य लाएंगे। कहा कि विमर्श की प्रक्रिया निरंतर चलती रहनी चाहिए। गोष्ठी का संचालन विभाग निरीक्षक विवेक नयन पांडे ने किया। प्रदेश सचिव मुकेश नंदन सहाय, विद्वत परिषद के प्रांत प्रमुख डा डीएन सिंह भी ऑनलाइन गोष्ठी में शामिल थे।

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