एक बाल्टी पानी के लिए आज भी तय करना पड़ रहा मीलों का सफर

राजधानी रांची से करीब 32 किलोमीटर दूर नामकुम प्रखंड का सोदाग पंचायत के गांवों में समस्याओं का अंबार है।

JagranTue, 26 Oct 2021 05:53 AM (IST)
एक बाल्टी पानी के लिए आज भी तय करना पड़ रहा मीलों का सफर

अनुज तिवारी, रांची :

राजधानी रांची से करीब 32 किलोमीटर दूर नामकुम प्रखंड का सोदाग पंचायत जहां आज भी ग्रामीणों को पानी के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ता है। रांची से निकलने वाली चकाचक हाइवे जैसे ही सोदाग पंचायत के लिए मुड़ती है सड़क की जर्जर हालत देख गांव के विकास पर सवाल उठता है। वर्षों पहले बनी यह सड़क आज भी गांवों को जोड़ते-जोड़ते जर्जर हो चुकी है। इसी जर्जर मार्ग से महिलाएं पानी की खोज करने एक गांव से दूसरे गांव तक सफर तय करती है। सड़क से उड़ती धूल के बीच महिलाएं अपने घरों के लिए पानी लाती हैं जिससे उसका दिनभर का गुजारा होता है। इस पंचायत में आठ गांव आते हैं, जिसमें से सबसे अधिक पानी की किल्लत जमगाई गांव की है। यहां करीब पांच हजार की आबादी है जो हर दिन पानी के लिए जंग लड़ती है। अब तो यहां की जनता एक ऐसी गांव की सरकार की उम्मीद में है जो इनके मूलभूत जरूरतों को पूरा कर सके। पंचायत की मुखिया पार्वती तिग्गा बताती है कि जमगाई में पानी की किल्लत कभी भी दूर नहीं हो सकेगी। पूरे पंचायत में इसी गांव में सबसे अधिक पानी की समस्या है। उन्होंने बताया कि यहां पर कई कुंए सूख गए, बोरिग फेल है। यहां भूगर्भ जल स्तर ही काफी नीचे है जिस कारण पानी की समस्या है। इस कारण सिचाई में भी परेशानी आती है। अधिकतर खेती सिर्फ बारिश पर ही निर्भर करती है। लेकिन फिर भी प्रयास किया जा रहा है और कई जगहों पर सोलर जल मीनार की व्यवस्था की गई है। हालांकि इसमें से अधिकतर में पानी नहीं आ रहा है। मुखिया का यह भी मानना है कि उनका पंचायत खुले में शौच मुक्त हो चुका है लेकिन अभी भी लोग शौच के लिए बाहर ही जाते हैं जो एक बड़ी समस्या है।

यहां पर कई समस्या है जिसे दूर करना आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। पंचायत में युवाओं के लिए खेल का मैदान से लेकर उनकी शिक्षा के मंदिर का अभाव है। लोग बताते हैं कि हर बार उनसे कई वादे किए जाते हैं लेकिन मुखिया के चुनाव के बाद गांव का विकास तो नहीं होता लेकिन मुखिया का विकास जरूर होता है। पंचायत में ना ही अस्पताल है और ना ही हाई स्कूल :

आठ गांवों वाले इस पंचायत में अभी तक हाई स्कूल तक नहीं है और ना ही स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था है। पंचायत की मुखिया पार्वती तिग्गा बताती है कि एक नया अस्पताल बन रहा है जिससे लोगों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही हाई स्कूल नहीं होने पर उसने योजना का ही रोना रोया और बताया कि हाई स्कूल खुलवाने के लिए उन्होंने कई बार बीईओ को आवेदन दिया लेकिन अभी तक यह खुल नहीं पाया। अब तो पंचायत चुनाव का बिगुल भी बज गया है ऐसे में सरकार कोई नई योजना शुरू नहीं करने वाली है। जब तक व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो जाती है तब तक लोगों को दूसरे पंचायतों पर ही निर्भर रहना होगा। सरना स्थल की घेराबंदी होगी : मुखिया

मुखिया बताती हैं कि उन्होंने इस गांव में कई विकास कार्य को पूरा किया है। अब सरना स्थल जो खुला है उसकी घेराबंदी का काम होगा, कोरोना की वजह से काम बंद था, जिसे शुरू करना है। आज हर गांव में बिजली व शौचालय उपलब्ध है। लोगों के लिए उन्होंने पीने के पानी की व्यवस्था सोलर टंकी लगाकर की, जो भी सरकार की योजनाएं थी उसे धरातल पर उतारने का प्रयास किया। इस वजह से आज लोगों को पीने के पानी के लिए सिर्फ तालाब पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ता है। साथ ही गांवों में कुआं की पर्याप्त संख्या भी है। हालांकि उनका मानना है कि इन सभी गांवों में पानी की समस्या पूरी तरह से दूर नहीं हो सकी है। सोदाग पंचायत का रिपोर्ट कार्ड : घुटिया गांव : यहां पर दो पेवर्स ब्लॉक सड़क का निर्माण है। कई टोलो में आज भी सड़क नहीं बन पाई है। पांच वर्षों में सड़क निर्माण पूरा नहीं हो पाया। खुद मुखिया मानती हैं कि यहां पर कम से कम दो पेवर्स ब्लाक सड़क का निर्माण होना चाहिए। यहां पर पानी की समस्या है, बिजली की व्यवस्था है। जमगाई गांव :

इस गांव में पानी के पानी का अकाल है। यहां पर पानी की टंकी, कुंआ, तालाब सिर्फ नाम का ही है। नाली की व्यवस्था नहीं है, जिस पर मुखिया का कहना है कि यहां पानी की समस्या दूर करने के लिए पदाधिकारियों से बात चल रही है। इसे दूर करने की व्यवस्था की जा रही है। सोदाग गांव :

यहां पांच सड़क, जलमीनार व कुएं की व्यवस्था दी गई है। साथ ही स्ट्रीट लाईट की अच्छी व्यवस्था है। लेकिन आज भी यहां पर बिजली की लचर व्यवस्था है। जिसे लेकर मुखिया का कहना है कि वे इसके लिए ब्लाक में अपनी बात रख चुकी हैं। यहां कुछ ग्रामीणों के पास रोजगार के लिए ट्रैक्टर की व्यवस्था है जिससे उनका जीवन स्तर बढ़ा है। उपरडाहू गांव :

इस गांव में सड़क नहीं है, धूल उड़ती सड़क पर चलने को लोग मजबूर है। कच्ची सड़क को बनवाने के लिए कई बार ग्रामीणों ने मुखिया को कहा भी है। हेठडाहू गांव : यहां पेवर्स ब्लाक सड़क है। मनरेगा के तहत कई कुंआ का निर्माण कराया गया है। गांव में स्ट्रीट लाइटिग की व्यवस्था है, लेकिन युवाओं के लिए खेल का मैदान नहीं है। बंडा गांव :

मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी गई है। लेकिन अभी भी शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर पूरी सुविधा नहीं मिल रही है। स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने से समस्या होती है। मालूम हो कि पंचायत में ही बेहतर चिकित्सीय सुविधा का अभाव है। गरसुल गांव :

इस गांव के ग्रामीण कहते हैं कि शौचालय का निर्माण ही घटिया तरीके से किया गया है। जिस कारण उन्हें मजबूरन बाहर शौच के लिए जाना पड़ता है। यहां सामुदायिक भवन जर्जर हाल में है। जिस पर मुखिया बताती है कि इसे ठीक कराया जा रहा है ताकि इसका लाभ ग्रामीणों को मिल सके। उड़िदा गांव :

यहां की व्यवस्था से लोग खुश नहीं है। आज भी यहां पर विकास के नाम पर कुछ खास नहीं हुआ है। सड़क निर्माण का काम भी पूरा नहीं हो सका है। हालांकि जलमीनार और लाइटिग की व्यवस्था ठीक है।

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बातचीत : मुखिया ने कोई विकास का काम नहीं किया है। गांव में आज भी सड़क व पानी का अभाव है।

- पतरस गांव में खेल मैदान नहीं है, आज भी सरना स्थल के लिए कोई रास्ता नहीं बनाया गया है।

-शिव कुमार सिंह महिलाओं की सुविधा के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि विधवा व वृद्धा पेंशन मिल रहा है।

- उमेश खोया काम हो रहा है लेकिन और तेजी लाने की जरूरत है। कोरोना भी मुख्य वजह हो सकती है।

- प्रेम खोया मुखिया सिर्फ अधिकारियों के निर्देश का पालन करती हैं, जिससे पूर्ण विकास नहीं हो पा रहा है।

रवि सड़क निर्माण में पैसों का बंदरबांट किया जा रहा है, जिसका नतीजा है कि कुछ ही माह में सड़क जर्जर हो जाती है।

-अकसर अंसारी गांव में पाने का पानी नहीं मिल रहा। महिलाओं को काफी दूर से पानी लाना पड़ता है। इस पर कुछ हो ही नहीं रहा है।

-इस्माइल अंसारी सरकारी योजनाओं को जिस तरह से लागू किया जा रहा है उससे घोटाले की बू आ रही है।

-रूस्तम अभी तक नए अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। जरूरत पड़ने पर लोगों को रिम्स में भर्ती होना पड़ता है।

-मुमताज अंसारी गांव में बिजली के तार जर्जर हो चुके हैं, कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मुखिया को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

-सरफूल अंसारी

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