RSS: विजयादशमी उत्सव में जाति से लेकर मंदिर पर भी बोले सरसंघचालक मोहन भागवत, क्या- क्या कहा, जानें मुख्य बातें

RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर भक्तों को सौंपा जाना चाहिए। हिंदू मंदिरों की संपत्ति का उपयोग भगवान की पूजा और हिंदू समाज की सेवा और कल्याण के लिए होना चाहिए। धारा 370 हटने के बाद कश्मीर का माहौल बदला है।

Kanchan SinghFri, 15 Oct 2021 02:39 PM (IST)
विजयादशमी उत्सव पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने संबोधित किया।

विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक मोहन भागवत के संबोधन की मुख्य बातें

1. हमे स्वतंत्रता तो मिली, लेकिन कुछ लोगों की ढूलमूल नीति व अंग्रेजों की कूटनीति के कारण विभाजन का दंश भी हमे झेलना पङा। नई पीढी को जानना जरूरी है परंतु शत्रुता पालने के लिए यह नहीं करना है। खोई हुई एकात्मता व अखंडता पुनः प्राप्त कर सकें इसके लिए यह जानना जरूरी है।

2. समाज में व्याप्त जातिगत विषमता को दूर करने के लिए वर्षों से प्रयास चल रहे है, परंतु आज भी हमारा समाज जातिगत विषमता की भावना से जर्जर है। इस दूरी को मिटाने के प्रयास मिलकर करने होंगे।

3. भारत की प्रगति से कुछ तत्वों को जलन होता है। अपनी पराजय और संपूर्ण विनाश के भय से ये शक्तियां संगठित होकर प्रयास करते हैं। अब जिम्मेदारी बनती है कि उन सबके द्वारा निर्मित छल कपट तथा भ्रम जाल से सजगतापूर्वक स्वयं को तथा समाज को बचाना होगा।

4. .बिटक्वाइन जैसी करेंसी, बच्चों के लिए आनलाइन शिक्षा आदि पर सरकार का उचित नियंत्रण जरूरी है। नियंत्रण नहीं होने से यह समाज को कहां ले जाएगा यह कहना कठिन है।

5. कोरोना की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए संघ के स्वयंसेवकों द्वारा तैयारी कर ली गई है। सभी गांवों में कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है।

6. अपने पूरे संबोधन में कई बार स्व का उल्लेख किया। इसका अर्थ है कि उन्होंने अपनत्व का भाव, स्वयं पर आधारित चिंतन, मनन व स्वयं की परंपरा की बात कही।

7. कोरोना के कारण आर्थिक क्षेत्र में काफी हानि हुई है परंतु उसे आगे बढाने के प्रयास चल रहे हैं। परंतु यह हमारे लिए अपने स्व पर आधारित तंत्र का चिंतन, मनन तथा रचना करने का अवसर भी बन सकता है।

8., सबको सस्ती और सुलभ चिकित्सा सुविधा मिले। आयुर्वेद को बढावा देने पर विचार करना होगा।

9. पर्यावरण की चिंता सबको करनी होगी। सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग तो बंद ही कर देना चाहिए।

10. समाज म़े स्व का जागरण तथा आत्मविश्वास बढ रहा है। यह रामजन्मभूमि के लिए धन संग्रह के समय देखा गया।

11. गति से बढने वाली जनसंख्या निकट भविष्य में कई समस्याओं को जन्म दे सकती है। इसलिए उसपर ठीक से विचार होना चाहिए। संघ ने 2015 के कार्यकारी मंडल की बैठक में ही इससे संबंधित प्रस्ताव पारित किया था। असंतुलन जनसंख्या वृद्धि के कारण देश में स्थानीय हिंदू समाज पर पलायन का दबाव बनने की व अपराध बढने की घटनाएं सामने आई हैं। इसलिए आवश्यक है कि सबपर समान रूप से लागू होने वाली नीति बननी चाहिए।

11. तालिबान की चर्चा करते हुए कहा कि सुरक्षा के लिए अपनी सीमाओं को मजबूत करनी होगी। सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना होगा।

12. धारा 370 हटने के बाद कश्मीर का माहौल बदला है परंतु वहां के लोगों में भी हम सभी भारत माता के संतान हैं भाव जगाना होगा।

13. हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर भक्तों को सौंपा जाना चाहिए। हिंदू मंदिरों की संपत्ति का उपयोग भगवान की पूजा और हिंदू समाज की सेवा और कल्याण के लिए होना चाहिए।

14. सरकार अपना काम करेगी इसके बाद भी सभी राष्ट्रीय क्रियाकलापों में समाज की सहभागिता जरूरी है। कई समस्याओं का समाधान तो समाज की पहल से ही हो सकता है। इसलिए समाज के मन, वचन और आचरण में परिवर्तन जरूरी है।

15 बाहर से आए हुए सभी संप्रदायों के मानने वाले भारतीयों सहित सभी को यह समझना होगा कि हमारी आध्यात्मिक मान्यता व पूजा की पद्धति की विशिष्टता के अतिरिक्त अन्य सभी प्रकार से हम एक सनातन राष्ट्र, एक समाज एक संस्कृति में पले बढे समान पूर्वजों के वंशजों हैं। उस संस्कृति के कारण ही हम अपनी अपनी उपासना करने के लिए स्वतंत्र हैं।

16. हमारे लिए देश के लिए शहीद होने वाले मुसलमान जैसे हसन खां मेवाती, खुदाबख्श व अशफाक उल्लाह अनुकरणीय हैं।।

17 हमारे इतिहास में कलह, अन्याय व हिंसा की घटनाएं घटी हो, विद्वेश के कारण वर्तमान में हुई हो, आगे ऐसी घटनाएं नहीं हो इस पर विचार होनी चाहिए। हमारे भेदों और कलहों का उपयोग कर हमें विभाजित कर लाभ उठाने वाले सक्रिय हैं। इसलिए जो अपने को हिंदू मानते हैं उन्हें संगठित व सामर्थ्य होना होगा।

18. भ्रांति जनमत की मिटाते,क्रांति का संगीत गाते

एक के दशलक्ष होकर कोटियों को है बुलाते

तुष्ट मां होगी तभी तो विश्व म़ं सम्मान पाकर

बढ रहे चरण अनगिनत, बस इसी धून में निरंतर

चल रहे हैं चरण अगणित, ध्येय के पथ पर निरंतर

इसी के साथ संबोधन समाप्त किया।

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