सरना धर्म का कोड न देकर अन्य में दर्ज करना दुर्भाग्यपूर्ण: बगराय

Jharkhand News सरना धर्म कोड(Sarna Dharam Code) को लेकर दिल्ली में आहूत आंदोलन(Aahoot Aandolan) में शामिल होकर खूंटी(Khunti) वापस लौटने पर तीस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया गया। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत राम मुंडा व सुखराम मुंडा की अगुवाई में किया गया।

Sanjay KumarThu, 09 Dec 2021 01:10 PM (IST)
सरना धर्म का कोड न देकर अन्य में दर्ज करना दुर्भाग्यपूर्ण: बगराय

खूंटी (जासं)। Jharkhand News: सरना धर्म कोड(Sarna Dharam Code) को लेकर दिल्ली में आहूत आंदोलन(Aahoot Aandolan) में शामिल होकर खूंटी(Khunti) वापस लौटने पर तीस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया गया। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत राम मुंडा व सुखराम मुंडा की अगुवाई में किया गया। दिल्ली के गांधी पीस फाउंडेशन(Gandhi Peace Foundation) सभागार में हुए विभिन्न राज्यों की प्रतिनिधि सभा और जंतर मंतर(Jantar Mantar) पर सत्याग्रह सह धरना प्रदर्शन में खूंटी से तीस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ था। आंदोलन के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, जनजातीय मामले के मंत्री, जनगणना महारजिस्ट्रार आदि को सरना धर्म कोड संबंधी ज्ञापन सौंपा गया है।

हम जाति प्रमाण पत्र की नहीं बल्कि सरना धर्म कोड की कर रहे हैं मांग:

इस अवसर पर धर्मगुरु बगराय मुंडा ने कहा कि प्रतिनिधि सभा व सत्याग्रह सभा में देशभर के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि हम जाति प्रमाण पत्र की नहीं बल्कि सरना धर्म कोड की मांग कर रहे हैं। आदिवासी शब्द से किसी जाति समुदाय या अनुसूचित जनजाति समुदाय का बोध होता है, जबकि सरना शब्द से प्रकृति पूजकों की आस्था-विश्वास इंगित होता है। सरना धर्म प्रकृति पर आधारित आस्था का स्वरूप है।

सरना भारत की छठी बड़ी धर्म है: रिपोर्ट

उन्होंनेे बताया कि 2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार सरना भारत की छठी बड़ी धर्म है। जिसकी जनसंख्या लगभग 50 लाख है। यह आंकडा कोड प्राप्त जैन धर्म (44 लाख) से छह लाख अधिक है। दूसरी बात, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और जनगणना अधिनियम, 1948 के अनुसार स्वतंत्र धर्म (सरना) मानने व दर्ज करने की आजादी है। ऐसे में सरना धर्म का कोड न देकर अन्य के अंतर्गत दर्ज करना दुर्भाग्य पूर्ण है।

धर्मावलंबियों को धार्मिक आजादी करें प्रदान:

धर्मगुरु बगरय मुंडा ने कहा कि भारत सरकार सरना धर्म को कोड के रुप में अगले जनगणना परिपत्र में अधिसूचित कर देश के सरना धर्मावलंबियों को धार्मिक आजादी प्रदान करें। खूंटी से दिल्ली जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में मथुरा कंडीर, दुर्गावती ओड़ेया, सुवासिनी पूर्ती, सुनिता ओड़ेया, मंगल सिंह मुंडा, महादेवी हेम्ब्रम, जनकी टूटी, बिरसा कंडीर, मोदेता तोपनो, कुंवारी होरो, करमी टूटी, सुषमा होरो, बुधराम मुंडा समेत अन्य शामिल थे।

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