RSS: आरएसएस ने रांची में कार्यकारी मंडल की बैठक में ईसाइयों और मुसलमानों की बढ़ती जनसंख्या पर जताई थी चिंता

RSS राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव पर कहा कि देश में जनसंख्या की नीति बननी चाहिए। यह समान रूप से सब पर लागू होना चाहिए। उन्होंने रांची में हुई संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक का उल्लेख है।

Kanchan SinghSat, 16 Oct 2021 10:51 AM (IST)
आरएसएस ने रांची में कार्यकारी मंडल की बैठक में बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जताई थी।

रांची {संजय कुमार} । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव के अवसर पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में जनसंख्या की नीति बननी चाहिए। यह समान रूप से सब पर लागू होना चाहिए। उन्होंने रांची में हुई संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें संघ ने जनसंख्या नीति से संबंधित प्रस्ताव पारित किया था। प्रस्ताव में कहा था कि देश में जनसंख्या नियंत्रण हेतु किए विविध उपायों से पिछले दशक में जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आई है।

लेकिन इस संबंध में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल का मानना है कि 2011 की जनगणना के पांथिक आधार (रिलीजियस ग्राउंड) पर किए गए विश्लेषण से विविध संप्रदायों की जनसंख्या के अनुपात में जो परिवर्तन सामने आया है उसे देखते हुए जनसंख्या नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता प्रतीत होती है। विविध संप्रदायों की जनसंख्या वृद्धि दर में भारी अंतर, अनवरत विदेशी घुसपैठ व मतांतरण के कारण देश की समग्र जनसंख्या विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात में बढ़ रहा असंतुलन देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक पहचान के लिए गंभीर संकट का कारण बन सकता है।

विश्व में भारत उन अग्रणी देशों में से था जिसने 1952 में ही जनसंख्या नियंत्रण के उपायों की घोषणा की थी। परंतु सन 2000 में जाकर ही वह एक समग्र जनसंख्या नीति का निर्माण और जनसंख्या आयोग का गठन कर सका। इस नीति का उद्देश्य 2.1 की सकल प्रजनन दर की आदर्श स्थिति को 2045 तक प्राप्त कर स्थिर व स्वस्थ जनसंख्या के लक्ष्य को प्राप्त करना था । ऐसी अपेक्षा थी कि अपने राष्ट्रीय संसाधनों और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रजनन दर का यह लक्ष्य समाज के सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होगा। परंतु 2005-6 का राष्ट्रीय प्रजनन एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण और सन 2011 की जनगणना के 0 से 6 आयु वर्ग के पांथिक आधार पर प्राप्त आंकड़ों से असमान सकल प्रजनन दर एवं बाल जनसंख्या अनुपात का संकेत मिलता है ।

यह इस तथ्य में से भी प्रकट होता है कि वर्ष 1951 से 2011 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर में भारी अंतर के कारण देश की जनसंख्या में जहां भारत में उत्पन्न मत पंथों के अनुयायियों का अनुपात 88% से घटकर 83.8% रह गया है वहीं मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात 9.8% से बढ़कर 14.23 प्रतिशत हो गया है। इसके अतिरिक्त देश के सीमावर्ती प्रदेश यथा असम, पश्चिम बंगाल व बिहार के सीमावर्ती जिलों में तो मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है जो अस्पष्ट रुप से बांग्लादेश से अनवरत घुसपैठ का संकेत देता है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त उपमन्यु हजारिका आयोग के प्रतिवेदन एवं न्यायिक निर्णयों में इन तथ्यों की पुष्टि की गई है।

यह भी एक सत्य है कि अवैध घुसपैठिए राज्य के नागरिकों के अधिकार हड़प रहे हैं तथा इन राज्यों के सीमित संसाधनों पर भारी बोझ बनकर सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तथा आर्थिक तनाव के कारण बन रहे हैं । पूर्वोत्तर के राज्यों में आर्थिक आधार पर हो रहा जनसांख्यिकीय असंतुलन और भी गंभीर रूप ले चुका है। अरुणाचल प्रदेश में भारत में उत्पन्न मत पंथों को मानने वाले जहां 1951 में 99.21% थे वे 2001 में 81.3 प्रतिशत व 2011 में 67% ही रह गया। केवल एक दशक में ही अरुणाचल प्रदेश में इसाई जनसंख्या में 13% की वृद्धि हुई है । इसी प्रकार मणिपुर की जनसंख्या में इनका अनुपात में 1952 में जहां 80% से अधिक था।

वह 2011 में जनसंख्या में 50% ही रह गया है । उपरोक्त उदाहरण तथा देश के अनेक जिलों में ईसाइयों की आज स्वभाविक विधि दर कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा एक संगठित एवं लक्षित मतांतरण की गतिविधि का ही संकेत देती है। अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल इन सभी जनसांख्यिकी असंतुलन पल गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से आग्रह करता है कि देश में उपलब्ध संसाधनों, भविष्य की आवश्यकताओं एवं जनसांख्यिकीय संतुलन की समस्या को ध्यान में रखते हुए देश की जनसंख्या नीति का पुनः निर्धारण कर उसे सब पर समान रूप से लागू किया जाए।

सीमा पार से हो रही अवैध घुसपैठ पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाया जाए।

राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन) का निर्माण कर घुसपैठियों को नागरिकता के अधिकारों से तथा भूमि खरीद के अधिकार से वंचित किया जाए । अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल सभी स्वयंसेवकों सहित सभी देशवासियों का आह्वान करता है कि वह अपना राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर जनसंख्या में असंतुलन उत्पन्न कर रहे सभी कारणों की पहचान करते हुए जन जागरण द्वारा देश को जनसांख्यिकी असंतुलन से बचाने के सभी विधि सम्मत प्रयास करें।

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