Jharkhand: उद्यमियों के मददगार रिसोर्स पर्सन के बीच बंटेंगे 10 करोड़ रुपये

आत्मनिर्भर झारखंड योजना के तहत उद्योग लगाने में मार्गदर्शन करने वाले रिसोर्स पर्सन का भी ख्याल रखेगी सरकार। एक प्रस्ताव तैयार होने से लेकर ऋण स्वीकृति तक की प्रक्रिया पूरी होते ही 20 हजार रुपये मिलेंगे। राज्य में पांच हजार उद्योगों के हिसाब से दस करोड़ का प्रविधान है।

Vikram GiriWed, 15 Sep 2021 06:33 AM (IST)
Jharkhand: उद्यमियों के मददगार रिसोर्स पर्सन के बीच बंटेंगे 10 करोड़ रुपये। जागरण

रांची [आशीष झा]। आत्मनिर्भर भारत की कड़ी में अब आत्मनिर्भर झारखंड की तैयारियां जुट गई हैं। इसके तहत की गई तैयारियों को राज्य कैबिनेट से हरी झंडी भी मिल गई है। कैबिनेट से मिली स्वीकृति के अनुसार झारखंड में स्वयं सहायता समूहों को उद्योग से जोड़ने में मददगार रिसोर्स पर्सन को भी प्रति इकाई के हिसाब से राशि दी जाएगी। सरकार ने तय किया है कि केंद्र से तय मानक के अनुसार स्वयं सहायता समूहों के लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार करने से लेकर बैंक लिंकेज तक की प्रक्रिया पूरी होने पर 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। झारखंड में ऐसे पांच हजार इकाइयों के लिए दस करोड़ रुपये का प्रबंध भी किया गया है। पांच वर्षों में इन योजनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा।

सामूहिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहयोग प्रदान किया जाएगा। ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए अधिकतम सहयोग कुल व्यय के 50 प्रतिशत के बराबर होगा। राज्य में अगले पांच वर्षों में इस मद में 5.5 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है। सरकार ने तय किया है कि इन योजनाओं के लिए स्टेट लेवल टेक्निकल इंस्टीच्यूशन के तौर पर बिरसा कृषि विश्वविद्यालय का चयन किया जाएगा। एकल सूक्ष्म एवं सामूहिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को प्रशिक्षण सहयोग एवं पूंजीगत सहयोग के लिए स्किल डेवलपमेंट एवं एंटरप्रेनरशिप मंत्रालय के द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्य पूर्ण कराने पर रिसोर्स पर्सन को सहयोग राशि प्रदान की जाएगी।

हैंड होल्डिंग सपोर्ट के तौर पर ऐसे लोगों को 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके एवज में वे डीपीआर तैयार करना, बैंक ऋण स्वीकृति आदि काम पूरा कराएंगे। यह राशि दो किस्तों में मिलेगी। पहली किस्त 50 प्रतिशत राशि होगी जो ऋण स्वीकृत होने के उपरांत मिलेगी। शेष राशि का भुगतान इकाई द्वारा जीएसटी, उद्योग आधार एवं एफएसएसएआइ प्रमाणपत्र दिए जाने के बाद किया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कमेटी का गठन होगा जिसमें कुल 13 नामित सदस्य होंगे।

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