करोड़ों का नुकसान : झारखंड में संकट में हैवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन, पांच दिनों से काम ठप

Ranchi HEC 7 माह से लंबित वेतन की मांग को लेकर एचईसी(HEC) में पांचवे दिन भी कर्मचारियों ने अपने हड़ताल(Strike) को जारी रखा। सुबह 8 बजे से ही कर्मचारियों ने विभिन्न प्लांटों में प्रदर्शन कर रहे हैं और अपने कार्य बहिष्कार के कार्यक्रम को जारी रखा है।

Sanjay KumarMon, 06 Dec 2021 11:21 AM (IST)
Ranchi HEC: एचईसी में प्रदर्शन करते कर्मचारी गेट में मारा ताला

रांची, (जागरण संवाददाता) : 'मदर आफ आल इंडस्ट्री' के तौर पर पहचान रखने वाला हैवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन (एचइसी) अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। 1963 में स्थापना के बाद कई इतिहास रचने वाले एचइसी में पिछले पांच दिनों से काम बंद है। सात माह से वेतन नहीं मिलने के कारण एचइसीकर्मी हड़ताल पर हैं। सोमवार की सुबह आठ बजे से ही एचईसी के तीनों प्लांटों में कर्मियों ने प्रदर्शन किया। प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।हालांकि, एचईसी कर्मी एकजुट न हों, इसके लिए प्रबंधन ने पहले से ही उपाय कर रखा था। सीआइएसएफ को निर्देश दे रखा था कि सुनिश्चित करें कि कर्मचारी गेट से बाहर न निकलें, ताकि मुख्यालय के समक्ष कर्मचारी एकत्रित होकर प्रदर्शन न कर सकें। 10 बजते ही तीनों प्लांटों में कर्मियों को बाहर निकलने से रोक दिया गया। कर्मियों का कहना था कि कैंटीन बंद है, तो ऐसे में बाहर खाने के लिए जाने दिया जाए, मगर उन्हें निकलने नहीं दिया गया। गेट तब खोला गया जब बाहर माहौल शांत हो गया।

दूसरी तरफ मुख्यालय का भी कामकाज प्रभावित रहा। डिप्टी मैनेजर, जूनियर मैनेजर व कर्मचारियों ने योगदान नहीं दिया। मुख्यालय का भी कामकाज ठप रहा। वेतन के प्रति प्रबंधन की उदासीनता को देखते हुए पदाधिकारी भी इस आंदोलन में साथ हो गए हैं।

वर्कआर्डर पर संकट

पांच दिनों से हड़ताल रहने के कारण एचईसी की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा है। उत्पादन में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। यही हाल कुछ दिन और रहा तो एचईसी को 1800 करोड़ रुपये का वर्कआर्डर पूरा करना मुश्किल होगा। इस हालात में कई कंपनियां अपना वर्क आर्डर को वापस ले लेंगी। वहीं, श्रमिक संघ ने प्रबंधन से वार्ता करने का प्रयास किया, मगर वार्ता से कुछ निष्कर्ष नहीं निकल सका। जानकारी के अनुसार कंपनी वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे में वर्कआर्डर के लिए पूंजी की दिक्कत के साथ-साथ कर्मचारियों के वेतन में परेशानी आ रही है। प्रबंधन की ओर से केंद्र को पत्र लिखकर 870 करोड़ रुपये की मदद की गुहार लगाई गई है। गौरतलब है कि स्थापना काल के बाद एचइसी ने कई कंपनियों को खड़ा करने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें बनाई हैं। इसी वजह से इसे मदर आफ आल इंडस्ट्री कहा जाता है। सैटेलाइट हो या लांच पैड का निर्माण, सबमें एचइसी ने अपनी भूमिका निभाई है।

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