पीएम जन औषधि योजना को औषधि केंद्र ही लगा रहे पलीता, सिस्टम बेखबर

पीएम जन औषधि योजना को औषधि केंद्र ही लगा रहे पलीता, सिस्टम बेखबर

मकसद तो काफी नेक था लेकिन जरूरतमंदों को समुचित लाभ नहीं मिल सका।

JagranFri, 16 Apr 2021 07:46 PM (IST)

मकसद तो काफी नेक था लेकिन जरूरतमंदों को समुचित लाभ नहीं मिल सका। आमलोगों को सस्ती व अच्छी दवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री जन औषधि योजना शुरू की ताकि ब्रांडेड महंगी दवाओं के विकल्प में समान गुणवत्ता वाली जेनरिक दवाएं कम कीमत पर आम लोगों को उपलब्ध कराई जा सकें। रांची में उचित निगरानी के अभाव में औषधि केंद्र संचालक ही योजना को पलीता लगा रहे हैं। गुरुवार को जागरण टीम ने राजधानी एवं आसपास के पांच औषधि केंद्रों का हाल जाना। हैरानी की बात है कि राज्य का सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के परिसर के जन औषधि केंद्र दोपहर एक बजे बिना किसी सूचना के बंद थे। कहीं फार्मासिस्ट नहीं तो कहीं ब्रांडेड दवाएं बेची जा रही थीं। इस स्थिति के लिए केंद्र संचालकों के पास कोई जवाब भी नहीं था।

रिम्स में एक बजे बाद बंद हो जाता है जन औषधि केंद्र

जागरण संवाददाता, रांची : रिम्स परिसर स्थित जन औषधि केंद्र दोपहर दो बजे बंद मिले। पूछने पर आसपास के दुकानदारों ने बताया कि जब से कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू हुई है दुकान संचालक एक बजे ही दुकान बंद करके चले जाते हैं। ओपीडी एवं इमरजेंसी में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज का इलाज होता है। जन औषधि केंद्र बंद होने के कारण मरीज को मजबूरन ब्रांडेड दवा खरीदनी पड़ती है। वहीं, जब केंद्र संचालक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो मोबाइल बंद मिला।

सदर अस्पताल औषधि केंद्र पर बेची जाती है ब्रांडेड दवा

केंद्र संचालक आमलोगों को कैसे चूना लगाते हैं इसका सदर अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र प्रत्यक्ष उदाहरण है। यहां फार्मासिस्ट तो मिले लेकिन दवा की कोई लिस्ट नहीं थी। केंद्र में रैक पर ब्रांडेड दवाएं भरी पड़ी थी। अपने आप को मैनेजर बताने वाले निशांत कुमार ने बताया कि लिस्ट जब सिविल सर्जन मांगते हैं तो तैयार करते हैं। वहीं, ब्रांडेड दवा बेचने की बात पर पहले तो उलझ पड़े फिर सिविल सर्जन के ही मत्थे आरोप मढ़ते हुए कहा कि उन्हीं के मौखिक आदेश पर दवा बेच रहे हैं। हालांकि, यह भी दावा किया कि यहां पर ब्रांडेड दवा मार्केट से सस्ती दर उपलब्ध कराई जाती है। फार्मासिस्ट आदित्य कुमार ने भी मैनेजर का बचाव करते हुए कहा कि ब्रांडेड दवा रखना मजबूरी है। कोरोना संक्रमण के बाद ओपीडी बंद है। इस कारण अभी कम लोग आते हैं। सामान्य दिनों में 250-300 प्रीस्क्रिप्शन आते हैं।

रातू जन औषधि केंद्र पर न दवा की सूची न ही फार्मासिस्ट

रातू स्थित सामुदायिक जन औषधि केंद्र का अपना नियम-कायदा है। कागज पर तो फार्मासिस्ट का नाम दर्ज है लेकिन औषधि केंद्र पर कम ही मिलते हैं। जिसे दवा के कंपोजीशन का कोई ज्ञान नहीं है ऐसे स्टाफ डाक्टर का पर्चा पढ़कर दवा देते हैं। यही नहीं, केंद्र पर दवा की सूची भी उपलब्ध नहीं थी। जन औषधि केंद्र के संचालक आनंद सिन्हा से फोन पर बात करने पर बताया कि दवाओं की सूची हमारे रजिस्टर में दर्ज है। सुची को बोर्ड में लिख कर टांगना संभव नहीं है। यहां पर फार्मासिस्ट के रूप में पूजा कुमारी का नाम है। फार्मासिस्ट के बारे में पूछने पर बताया गया कि वो किसी शादी समारोह में भाग लेने रांची से बाहर गई हैं। वहीं, केंद्र में बैठे युवक ने बताया कि उसने फार्मासिस्ट की परीक्षा दी है। शीघ्र ही रिजल्ट आ जाएगा। हालांकि, इस जन औषधि केंद्र में ब्रांडेड दवाएं नहीं मिलीं।

तुपुदाना : यहां एक माह से बंद है जन औषधि केंद्र

तुपुदाना रिगरोड के विरल आबादी वाले परमनिर्मल नगर में जन औषधि केंद्र सिर्फ नाम के हैं। औषधि केंद्र के बाहर ताला लटका मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि कभी यह केंद्र खुलता है जब-तब बंद रहता है। अभी एक माह से बंद है। कारण का पता नहीं। इस बाबत केंद्र संचालक देव कुमार के रजिस्टर्ड नंबर पर कई बार फोन किया गया। उन्होंने बताया कि उनकी माता का देहांत हो गया है। इसलिए फिलहाल केंद्र नहीं खोल रहे हैं।

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