पारा शिक्षकों की गुहार: कोरोना में ड्यूटी को तैयार, लेकिन हमारी भी सुने सरकार

शिक्षकों की गुहार: कोरोना में ड्यूटी को तैयार, लेकिन हमारी भी सुने सरकार। जागरण

कोरोना की रफ्तार तेज होने के बाद एक बार फिर से जिला प्रशासन शिक्षकों की ड्युूटी लगाना शुरू कर दिया है। शिक्षकों को विभिन्न अस्पतालों कोरोना टेस्ट सेंटर से लेकर टीकाकरण स्थलों पर मजिस्टेट के रुप में तैनात किया जा रहा है।

Vikram GiriWed, 21 Apr 2021 12:03 PM (IST)

रांची, जासं । कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज होने के बाद एक बार फिर से जिला प्रशासन शिक्षकों की ड्यूटी लगाना शुरू कर दिया है। शिक्षकों को विभिन्न अस्पतालों, कोरोना टेस्ट सेंटर से लेकर टीकाकरण स्थलों पर मजिस्ट्रेट के रुप में तैनात किया जा रहा है। एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के रांची जिला अध्यक्ष मो. शकील ने कहा कि इस संकट की घड़ी में रांची जिले के पारा शिक्षक जिला प्रशासन के हर कदम के साथ खड़ा है। लेकिन ऐसे कई जगह हैं जहां संक्रमण फैलने की पूरी संभावना है।

ऐसे में ड्यूटी में लगे पारा शिक्षकों के जान माल को नुकसान होने की ज्यादा संभावना है। पारा शिक्षक अल्प मानदेय भोगी हैं। जिसे मजिस्ट्रेट के रूप में प्रतिनियुक्त किया जा रहा है, पर उसके बदले किसी भी तरह का अतिरिक्त मानदेय/भत्ता आदि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। सरकारी सेवकों के समान कोई सुविधा भी नहीं दी जा रही है। ना ही केंद्र द्वारा घोषित 50 लाख  का बीमा कवर किया जा रहा है। जबकि राजस्थान में कोविड 19 ड्यूटी में प्रतिनियुक्ति मानदेय भोगी कर्मियों को 50 लाख का बीमा कवर किया जा रहा है। ऐसे में हमारे रांची के पारा शिक्षक अपने भविष्य को लेकर काफी भयभीत हैं।

मो. शकील ने कहा कि यदि ड्यूटी में तैनात पारा शिक्षकों को  संक्रमण हो जाती है तो वे अपना इलाज तक करा पाने में असक्षम है। उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि पारा शिक्षकों का कोविड-19 ड्यूटी में लगाए जाने के पूर्व उनका 50 लाख का बीमा कवर करवाया जाए। ताकि ड्यूटी में तैनात पारा शिक्षकों के साथ किसी भी तरह की अनहोनी होती है तो संबंधित पारा शिक्षक एवं उसका परिवार सुरक्षित हो सके। ऐसा नहीं करने पर पारा शिक्षक बाध्य होकर कार्य का बहिष्कार करने के लिए विवश हो जाएंगे।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से जुड़ी प्रमुख जानकारियों और आंकड़ों के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.