Omicron : ओमिक्रोन को लेकर रांची एयरपोर्ट व रेलवे स्‍टेशन पर अलर्ट, जीनोम स‍िक्‍वेंस‍िंंग जांच की सुविधा जल्द

राज्य में जीनोम सिक्वेंसिंग जांच की सुविधा जितनी जल्दी शुरू हो जाए उतनी ही रफ्तार से हम इस पर नियंत्रण की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। झारखंड में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन की त्वरित जांच के लिए पुख्ता व्यवस्था हो विकसित। प्रतीकात्मक

Sanjay PokhriyalTue, 07 Dec 2021 11:54 AM (IST)
झारखंड में जीनोम सिक्वेंसिंग जांच के लिए मशीनें खरीदे जाने की घोषणा की जा चुकी है।

रांची, राज्य ब्यूरो। कोरोना वायरस का नया वैरिएंट ओमिक्रोन कितना घातक है यह अभी भले ही पूरी तरह से पता नहीं चल सका हो, लेकिन इसे लेकर हर ओर सतर्कता है। झारखंड में भी सरकार ने इस खतरे को गंभीर मानते हुए बचाव के इंतजाम किए हैं। इस वैश्विक महामारी के दंश और जख्म कितने गहरे हैं, यह किसी को भी बताने की जरूरत नहीं।

कोरोना की दो लहरों के दौरान हम सब ने बहुत कुछ खोया है। इस कारण हम सबों को ज्यादा से ज्यादा सतर्कता बरतनी चाहिए। बचाव की वैक्सीन ले लेने के बाद काफी हद तक लोगों में निश्चिंतता का भाव है, जो खतरनाक है। ओमिक्रोन पर ये वैक्सीन कितनी कारगर होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर अभी भी बड़ी संख्या में लोगों ने वैक्सीन नहीं ली है। बच्चों का तो टीकाकरण शुरू भी नहीं हो सका है। ऐसे में जरा सी भी असावधानी घातक सिद्ध हो सकती है।

ओमिक्रोन पर नियंत्रण में एक बड़ी बाधा जांच को लेकर भी है। बाहर से आनेवाले लोगों की एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर जांच को लेकर सख्ती तो बढ़ी है, लेकिन अभी भी शत-प्रतिशत यात्रियों की जांच नहीं हो पा रही है। इसके लिए यात्री खुद भी जिम्मेदार हैं। वह जांच में रुचि नहीं दिखा रहे, जो खतरनाक है। कोरोना में एक आदमी भी संक्रमित होता है तो वह दर्जनों लोगों को संक्रमण की चपेट में ले लेता है।

एक बड़ी समस्या ओमिक्रोन की पहचान को लेकर भी है। अभी तक बगैर जीनोम सिक्वेंसिंग के इसकी पहचान ही संभव नहीं है, जबकि झारखंड में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा ही नहीं है। अभी जांच के लिए यहां से भुवनेश्वर सैंपल भेजे जाते हैं, जिसकी रिपोर्ट आने में एक से डेढ़ महीने लग जाते हैं। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति का उपचार कैसे हो पाएगा, इसे समझना बहुत कठिन नहीं।

हालांकि झारखंड में जीनोम सिक्वेंसिंग जांच के लिए मशीनें खरीदे जाने की घोषणा की जा चुकी है, लेकिन मशीनें अभी खरीद की प्रतिक्रिया में उलझी है। अब तक टेंडर भी नहीं निकाला जा सका है। कोरोना जैसी महामारी पर नियंत्रण के लिए इस तरह की प्रतिक्रिया को सरल व तेज करने की जरूरत है, ताकि जल्दी से जल्दी इसका लाभ लिया जा सके।

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