झारखंड के इस गांव में कोरोना का टीका नहीं लगवाने पर नहीं हो रहा कोई सरकारी काम

पश्चिम सिंहभूम ज‍िले के लखिमपोसी गांव में ग्रामसभा के फरमान से बढ़ गई टीका लगवाने की रफ्तार। गांव में 45 वर्ष से अधिक उम्र के 80 प्रतिशत लोग ले चुके अब तक टीका। 18 से 44 वर्ष वाले लोग अब गांव में शिविर लगने की कर रहे प्रतीक्षा।

M EkhlaqueTue, 15 Jun 2021 11:40 PM (IST)
पश्चिम सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी प्रखंड का लखिमपोसी गांव। जागरण

कुमारडुंगी (मनीष दास) : कोरोना टीका के प्रति ग्रामीणों में फैली भ्रांतियों को दूर करने वास्ते तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। इन उपायों का असर भी गांवों में दिख रहा है। ऐसा ही एक गांव है- पश्चिम सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी प्रखंड का लखिमपोसी। जिला मुख्यालय चाईबासा से लगभग 45 किलोमीटर दूर इस गांव में ग्रामीण मुंडा व ग्रामसभा ने फरमान जारी कर दिया है कि कोरोना का टीका नहीं लगवाने पर ग्रामीणों का कोई भी सरकारी काम नहीं होगा। यह फरमान जारी होते ही ग्रामीणों के मन से टीका के प्रति न सिर्फ भ्रम दूर हो गया है, बल्कि टीकाकरण की यहां रफ्तार भी बढ़ गई है।

ग्रामीण मुंडा विश्वनाथ कुम्हार की मानें तो गांव की आबादी करीब 500 है। अब यहां 45 वर्ष से अधिक उम्र के 80 प्रतिशत लोग टीका लगवा चुके हैं। वहीं, 18 से 44 वर्ष वाले लोग गांव में शिविर लगने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। गांव में कुम्हार, गोप व भुईयां समुदाय के लोग रहते हैं। शुरू में कोई भी व्यक्ति टीका नहीं लगवाया था। सभी लोग क्षेत्र में फैले अफवाह के कारण डरे हुए थे। टीका का महत्व बताने पर भी टीकाकरण के लिए तैयार नहीं होते थे। ऐसे में उन्होंने ग्रामसभा आयोजित कर फरमान जारी कर दिया कि टीका नहीं लगवाने वाले परिवारों को कोई भी सरकारी लाभ नहीं दिलाएंगे। जन्म, मृत्यु, जाति, आय, आवासीय प्रमाण पत्र या कोई भी कागजात अभिप्रमाणित ही नहीं करेंगे। जो इस काम वास्ते आएंगे उन्हें पहले टीकाकरण का प्रमाण दिखाना होगा। जबतक पूरा परिवार टीका नहीं लगवा लेता उन्हें लाभ नहीं दिया जाएगा। फरमान जारी होने के बाद 45 वर्ष से अधिक उम्र के 80 प्रतिशत लोगों ने टीका लगवा लिया। 18 से 44 वर्ष वाले भी अब टीका के लिए तैयार दिख रहे हैं।

टीका के बाद ही कर सकेंगे मजदूरी और उठा सकेंगे सरकारी राशन

ग्रामीण मुंडा विश्वनाथ कुम्हार कहते हैं ग्रामसभा ने तय कर दिया है कि गांव में शत प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त करना है। गांव में चलने वाली योजनाओं में ठेकेदार को यह वादा करना होगा की काम करने वाले सभी मजदूर टीका लगवा चुके हैं। शर्त को मानने पर ही ग्रामसभा के रजिस्टर में योजना का उल्लेख किया जाएगा। साथ ही मुंडा का हस्ताक्षर होगा। इसी तरह ग्रामसभा ने तय कर दिया है कि सरकारी राशन उन्हीं को मिलेगा जो टीका लगवा चुके हैं। जो राशन लेने दुकान पर पहुंचेंगे उन्हें टीकाकरण का प्रमाण पत्र भी दिखाना होगा। मोबाइल या कागजात से इसे साबित करना होगा। जब तक टीका नहीं लगवाएंगे राशन दुकानदार के पास ही सुरक्षित रहेगा।

बिना टीकाकरण का प्रमाण दिखाए गांव में घुस सकते प्रवासी

ग्रामसभा ने यह भी तय किया है कि गांव में आने वाले प्रवासी मजदूरों और लोगों को तभी प्रवेश मिलेगा जब वह टीकाकरण का प्रमाणपत्र दिखाएंगे। यदि टीका नहीं लिए होंगे तो उन्हें विद्यालय भवन में क्वारंटाइन कर दिया जाएगा। टीका लगवाने तक ऐसे लोग क्वारंटाइन रहेंगे। परिवार के लोग उन्हें भोजन-पानी देंगे।

स्वयं सहायता समूह की महिलाएं घूम कर लोगों को कर रहीं जागरूक

इस गांव में छह स्वंय सहायता समूह है। इससे महिलाएं जुड़ी हैं। हर सप्ताह बैठक का आयोजन करती हैं। इन्हें गांव के लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है। यही नहीं बैठकों में उपस्थित होकर ग्रामीण मुंडा विश्वनाथ कुम्हार, रमेश बेहरा व कुछ युवक महिलाओं को कोरोना से बचाव और टीकाकरण की जानकारी भी देते रहते हैं।

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