लालू प्रसाद यादव के ब्लड प्रेशर और डायबिटीज में सुधार

जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) में इलाजरत बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के ब्लड प्रेशर और डायबिटीज में सुधार देखने को मिला है। बीते कुछ दिनों से डायबिटीज में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था। डॉक्टर और डाइटीशियन ने लालू को चावल और आलू कम खाने की सलाह दी। इसके बाद से डायबिटीज में सुधार हुआ है। वहीं, उन्हें डाइट चार्ट के अनुसार खाने की सलाह दी गई है। इसके लिए लालू को डाइट चार्ट उपलब्ध करा दिया गया है।

लालू को डॉक्टरों ने खानपान में परहेज की दी सलाह

रिम्स के डॉक्टरों ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद को ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए खानपान में सुधार करने की सलाह दी है। चावल और आलू थोड़ी मात्रा में खाने को कहा है। उन्हें डायट चार्ट के अनुसार ही भोजन करने को कहा गया है। रिम्स की डायटिशियन मीनाक्षी कुमारी ने सोमवार को उनके खाने-पीने की जांच की।

मंगलवार को लालू का ब्लड शुगर का लेवल कम होकर 131 पहुंच गया। लालू का इलाज कर रहे डॉ. उमेश प्रसाद ने भी उन्हें दिन में टहलने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि लालू किडनी के भी मरीज हैं। ऐसे में शुगर नियंत्रित नहीं किया गया तो परेशानी बढ़ सकती है।

बाहर का खाना खाने से बढ़ रहा लालू का शुगर

राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के डॉक्टर राजद प्रमुख लालू प्रसाद के हाई शुगर की बीमारी पर बमुश्किल आंशिक नियंत्रण कर पाए थे। दवा और इंसुलिन का डोज दिया जा रहा था। लेकिन, अब लालू का शुगर फिर से बढ़ गया है। रविवार को उनका शुगर लेवल 185 दर्ज किया गया। इसकी वजह है लालू को दिया जा रहा बाहर का खाना।

जब से लालू पेइंग वार्ड में गए हैं रिम्स से उन्हें मिलने वाला भोजन बंद कर दिया गया है। अब निजी व्यवस्था से लालू खाना खा रहे हैं। दो सेवादार भोजन बनाते हैं। बताया जा रहा है कि जब से रिम्स से खाना बंद हुआ है लालू चावल खाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। सेवादार उन्हें मनपसंद भोजन बनाकर दे रहे हैं। डायट चार्ट को फॉलो नहीं किया जा रहा है। रोटी की जगह चावल खाने से ही शुगर अनियंत्रित हो गया है। रिम्स के मेडिसीन विभाग के डॉ. उमेश प्रसाद ने बताया कि शुगर लेवल बढ़ने से उनकी समस्या बढ़ती जा रही है। उन्हें 11 तरह की बीमारी है।

'पेइंग वार्ड में मरीज को खाना खुद ही लाना पड़ता है, लेकिन चिकित्सक और डायटिशियन के मार्गदर्शन पर मरीज को खाना पड़ता है। यह देखना है कि डायट चार्ट को कितना फॉलो किया जा रहा है। डायटीशियन और चिकित्सक चेक करेंगे।'

- डॉ. विवेक कश्यप, अधीक्षक, रिम्स।

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