जनाधार को और सशक्त बनाने की तैयारी में झामुमो, झारखंड से बाहर भी ध्यान

झारखंड मुक्ति मोर्चा का 12वां महाधिवेशन 18 दिसंबर को झारखंड की राजधानी रांची में प्रस्‍ताव‍ित है। झारखंड मुक्ति मोर्चा इकाइयों के पुनर्गठन की कवायद में भी जुटा है। महाधिवेशन में पार्टी की केंद्रीय समिति का फिर से गठन होगा। वैचार‍िक आधार पर भी बड़ी लकीर खींचने की तैयारी।

M EkhlaqueThu, 09 Dec 2021 06:00 AM (IST)
झारखंड मुक्ति मोर्चा का सम्‍मेलन 18 द‍िसंबर को रांची में। जागरण

रांची, राज्य ब्यूरो । राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा अब अपने जनाधार को और मजबूत करने की कवायद में जुटा है। मोर्चा का 12वां केंद्रीय महाधिवेशन 18 दिसंबर को प्रस्तावित है और इसके पूर्व तमाम इकाइयों का पुनर्गठन करने की कवायद की जा रही है। इस कड़ी में जहां केंद्रीय समिति का फिर से गठन होगा, वहीं जिला कमेटियों का भी नए सिरे से विस्तार किया जाएगा। इसके तहत कमेटियों को भंग कर तदर्थ तौर पर संयोजक मंडली का गठन किया गया है। केंद्रीय समिति के गठन की घोषणा महाधिवेशन में की जाएगी। इसके लिए कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को अधिकृत किया गया है।

हर मोर्चे पर सफलता दिलाने में कामयाबी पाई

हेमंत सोरेन ने रणनीतिक तौर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा को हर मोर्चे पर सफलता दिलाने में कामयाबी पाई है। मोर्चा का अबतक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव मेंं कर दिखाया। इससे पूर्व भी परंपरा और तकनीक का तालमेल कर उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा को संघर्ष के लिए तैयार किया। मिस्ड काल के जरिए मोर्चा की सदस्यता की जहां उन्होंने शुरूआत की, वहीं इंटरनेट मीडिया पर भी नए प्रयोग किए। इसका बेहतर परिणाम दिखा। महाधिवेशन के पूर्व अन्य राज्यों की कमेटियों के गठन की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है। ओडि़शा, बंगाल, बिहार समेत अन्य राज्यों में झामुमो की सांगठनिक इकाइयां कार्यरत है। इसके माध्यम से सांगठनिक विस्तार की कोशिश चल रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा इन राज्यों में होने वाले चुनाव में प्रत्याशी भी उतारता है।

वैचारिक आधार पर भी बड़ी लकीर खींचने की तैयारी

झारखंड मुक्ति मोर्चा राज्य सरकार के कामकाज के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ वैचारिक आधार पर भी बड़ी लकीर खींचने की तैयारी में है। झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में मोर्चा की भूमिका अहम थी। आंदोलनकारियों से लेकर उनके परिजनों को सम्मान, पेंशन समेत नौकरी देने की तैयारी इसकी एक कड़ी है। झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन की चमत्कारिक छवि संगठन की धरोहर है। अलग झारखंड राज्य के निर्माण में उनकी भूमिका को उभार कर झामुमो प्रतिद्वंद्वियों को उसी के स्टाइल में जवाब देने की तैयारी में है।

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