सरकारी खर्च पर इंग्लैंड व आयरलैंड में पढ़ेंगे झारखंड के आदिवासी युवा, सीएम हेमंत सोरेन ने शुरू की योजना

Jharkhand News Overseas Scholarship Scheme इस योजना के तहत छह छात्रों का विदेश के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के लिए चयन किया गया है। इन्हें इंग्लैंड और स्काटलैंड भेजा जाएगा। मुख्‍यमंत्री ने आज इन छात्रों को सम्‍मानित किया।

Sujeet Kumar SumanThu, 23 Sep 2021 07:08 PM (IST)
Jharkhand News इस योजना के तहत छह छात्रों का विदेश के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा हेतु चयन किया गया है।

रांची, राज्‍य ब्यूरो। पहली बार सरकारी खर्च पर राज्य के आदिवासी छात्र इंग्लैंड, आयरलैंड और अन्य देशों में उच्च शिक्षा ग्रहण करेंगे। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के कारण यह संभव हो सका है। योजना के पहले चरण में अनुसूचित जनजाति के छह छात्रों का चयन इस छात्रवृत्ति के लिए किया गया है। गुरुवार को इन सभी छात्रों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समारोहपूर्वक सम्मानित किया और बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य के गरीब-आदिवासी युवाओं के सपनों को पंख लगाना चाहती है। विदेश में पढ़ने के इच्छुक छात्र वहां पढ़ाई पूरी करने के बाद नई दृष्टि और जानकारी लेकर लौटेंगे, जिसका उपयोग राज्य के विकास में हो सकता है। इस योजना के तहत प्रति वर्ष झारखंड के 10 अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों का चयन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में राज्य के अन्य वर्ग के छात्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।

राज्य सरकार इस छात्रवृत्ति योजना के तहत इंग्लैंड और आयरलैंड की यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा के लिए जा रहे इन छात्रों की ट्यूशन फीस सहित रहने-खाने व अन्य जरूरतों का खर्च भी वहन करेगी। मौके पर उपस्थित मंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि यह राज्य के लिए ऐतिहासिक दिन है। सरकार गरीब-गुरबों की चिंता कर रही है। हम सब ने जमीन और बोरा पर बैठकर पढ़ाई की है। अब छात्र विदेश पढ़ने जा रहे हैं। अच्छी सोच से यह संभव हो सका है।

चयनित छात्रों ने कहा, पूरे हुए हमारे सपने

गुरुवार को झारखंड मंत्रालय में इन छात्रों और उनके माता-पिता के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में चयनित छात्रों का उत्साह देखने लायक था। सरकार द्वारा विदेश में पढ़ाई का मौका दिए जाने से वह बहुत खुश नजर आए। स्कॉलरशिप के लिए चयनित छात्रों में हरक्यूलिस सिंह मुंडा, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज में एमए की पढ़ाई करेंगे। अजितेश मुर्मू यूनिवर्सिटी कालेज आफ लंदन में आर्किटेक्चर में एमए की पढ़ाई करेंगे। आकांक्षा मेरी का चयन ला बार्ग यूनिवर्सिटी में क्लाइमेट चेंज साइंस एंड मैनेजमेंट में एमएससी के लिए हुआ है।

दिनेश भगत यूनिवर्सिटी आफ सस्सेक्स में क्लाइमेट चेंज, डेवलपमेंट एंड पॉलिसी में एमएससी की पढ़ाई करेंगे। अंजना प्रतिमा डुंगडुंग यूनिवर्सिटी ऑफ वार्विक में एमएससी तथा प्रिया मुर्मू ला बार्ग यूनिवर्सिटी में क्रिएटिव राइटिंग एंड द राइटिंग इंडस्ट्रीज में एमए की पढ़ाई के लिए चयनित हुई हैं। हरक्यूलिस सिंह मुंडा की इच्छा है कि वे अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद झारखंडी भाषाओं को समृद्ध करने की दिशा में काम करेंगे। आकांक्षा मेरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अहम विषय है। वह अपनी प्रतिभा का उपयोग झारखंड के लिए करेंगी। सरकार ने उन्हें इसका बेहतर मौका दिया है।

जयपाल सिंह मुंडा जैसे बनें झारखंड के युवा, राज्य को बढ़ाएं आगे

मरांग गोमके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री चंपाई सोरेन ने इस पल को ऐतिहासिक करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा हम सभी के प्रेरणास्रोत हैं। उन्हीं के नाम पर यह योजना शुरू की गई है। उन्होंने आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा ग्रहण की और अपने देश के संविधान निर्माण में भी भूमिका निभाई। राज्य के मेधावी छात्र उन्हीं की तरह देश-दुनिया में झारखंड का नाम रोशन करें। सरकार की कोशिश है कि आगे बढ़ने का मौका सभी को मिले।

मैं बोरा पर बैठकर पढ़ा, आज बच्चे विदेश जा रहे : चंपाई

मंत्री चंपाई सोरेन ने इस मौके पर अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि मैंने बांग्ला मीडियम में पढ़ाई की। जमीन पर बैठकर पढ़ाई होती थी। बैठने के लिए घर से बोरा लेकर स्कूल जाता था। आज गौरवान्वित हूं कि मेरे साइन (हस्ताक्षर) से बच्चे प्लेन में चढ़कर विदेश पढ़ने जाएंगे। आज का पल ऐतिहासिक है। उन्होंने इस योजना के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दूरदर्शिता की सराहना की। कहा, यह दिन इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा। जयपाल सिंह मुंडा ने झारखंड को अलग पहचान दी है। झारखंड उनके दिल में बसता था। शिक्षा बहुत जरूरी है। बिना शिक्षा के हम विकास नहीं कर सकते। शिक्षा के माध्यम से ही हम सही दिशा में जा सकेंगे। राज्य के युवा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड को संवारेंगे।

मेधावियों को आगे बढ़ाएगी सरकार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में अव्वल आने वाले विद्यार्थियों को भी सरकार आर्थिक सहायता दे रही है, ताकि उनके आगे की पढ़ाई में किसी तरह की बाधा ना आए। आज छह आदिवासी बच्चे उच्च शिक्षा के लिए विदेश जा रहे हैं। यह पूरे राज्य के लिए खास खुशी का मौका है। आनेवाले दिनों में 10 से अधिक बच्चों का चयन कर उन्हें विदेश में उच्च शिक्षा का अवसर दिया जाएगा। विदेश में उच्च शिक्षा के लिए 10 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बजट में बचने वाली राशि का समायोजन अगले वित्तीय वर्ष में विभाग करे, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर विदेश में मिल सके।

विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध

सीएम ने कहा कि सरकार अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति के उद्यमियों को उद्योग स्थापना में भी सहयोग दे रही है। औद्योगिक और निवेश प्रोत्साहन नीति 2021 में इन वर्गों के लिए विशेष प्रविधान किया गया है। आदिवासी शैक्षिक रूप से पीछे रहे हैं। राज्य सरकार इसपर लगातार मंथन कर रही है कि कैसे वंचित, कमजोर, दलित, पिछड़ा वर्ग की बेहतरी के लिए कार्य किया जाए। सरकार इन वर्गों के लिए सदैव खड़ी है।

अपने पैरों पर खड़ा होगा झारखंड

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंतरिक संसाधनों का उपयोग कर आगे बढ़ेगा। उन्होंने योजना को लागू करने में आई दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें काफी तकनीकी पेंच था। केंद्र सरकार की स्कीम में बड़े अधिकारियों के बच्चों को मौका मिलता है। पहले कहा गया कि आप ये प्रोग्राम नहीं चला सकते। मुख्यमंत्री बोले-  झारखंड को अपने पैरों पर खड़ा होना आवश्यक है, ताकि नई पीढ़ी नई नजर से झारखंड को देख सके। राज्यवासी और उनकी भावनाओं के साथ झारखंड आगे बढ़ेगा। इस अवसर पर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, सचिव केके सोन, आदिवासी कल्याण आयुक्त नमन प्रियेश लकड़ा, अपर सचिव कल्याण विभाग अजयनाथ झा एवं अन्य उपस्थित थे।

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