Jharkhand Politics: राज्य की गठबंधन सरकार को गिराने की साजिश का सच सामने आने का इंतजार

झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के मुताबिक भाजपा हेमंत सरकार को पहले दिन से ही गिराने की साजिश रच रही है। पहले महाराष्ट्र से और अब गुजरात से साजिश रची गई। उनका कहना है कि इसके बाद दिल्ली और फिर दक्षिण भारत से दांव लगाया जाएगा।

Sanjay PokhriyalFri, 22 Oct 2021 10:30 AM (IST)
अपने ही विधायकों की नाराजगी झेल रही सरकार उन पर नियंत्रण के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है।

रांची, प्रदीप शुक्ला। राज्य की गठबंधन सरकार को गिराने की एक और साजिश का पर्दाफाश होने के बाद अब यह चर्चा भी छिड़ गई है कि आखिर इस षडयंत्र में शामिल लोगों के खिलाफ क्या कोई कार्रवाई भी होगी? पिछले एक साल में हेमंत सरकार को अस्थिर करने की साजिश रचने को लेकर यह तीसरी प्राथमिकी है। इस बार सत्ताधारी दल झामुमो के एक विधायक रामदास सोरेन ने पार्टी से निष्कासित पूर्व कोषाध्यक्ष रवि केजरीवाल और उनके एक व्यवसायी मित्र अशोक अग्रवाल पर प्रलोभन देने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया है।

विधायक का दावा है कि केजरीवाल ने उन्हें बड़ी रकम का प्रलोभन देने के साथ नई सरकार बनने की स्थिति में मंत्री पद का भी लालच दिया था। वह अपने दावे के पक्ष में बेशक अभी कोई पुख्ता सुबूत नहीं दे सके हैं, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्षी भाजपा में इसको लेकर वाकयुद्ध तेज हो गया है। झामुमो और उसकी प्रमुख सहयोगी कांग्रेस कह रही है कि भाजपा का कोई भी कुत्सित दांव कामयाब नहीं होने वाला है। यह सरकार बहुत मजबूत है, वहीं भाजपा सरकार गिराने के आरोपों को हास्यास्पद करार दे रही है। उसका कहना है कि सत्ताधारी गठबंधन के दलों में अंदरखाने चल रही अंतर्कलह में यह सरकार खुद-ब-खुद गिर जाएगी।

झामुमो विधायक रामदास सोरेन। जागरण आर्काइव

ऐसा भी नहीं है कि झामुमो, कांग्रेस और राजद का गठबंधन चुनाव बाद बना हो। तीनों दल एकसाथ मिलकर चुनाव लड़े थे और जनता ने उन्हें पूर्ण बहुमत दिया। बाद में झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के भाजपा में विलय के बाद दो विधायकों सहित कुछ निर्दलीय विधायकों का भी इस सरकार को समर्थन हासिल हो गया। बावजूद इसके शायद ही कभी ऐसा लगा हो कि अंदरखाने सब ठीक चल रहा हो। पहले कांग्रेस विधायकों की अति महत्वाकांक्षा के चलते सरकार परेशानियों में घिरती रही। यहां तक कि पार्टी के कई बड़े नेता सार्वजनिक रूप से यह कहने में भी गुरेज नहीं कर रहे थे कि अगर पार्टी विधायकों की बातों को अनसुना किया गया तो गठबंधन सरकार अस्थिर हो सकती है और इसकी जिम्मेदारी झामुमो की ही होगी।

इस साजिश में महाराष्ट्र के जिन भाजपा नेताओं का नाम आया था उनसे भी पूछताछ नहीं की गई। अब नया मामला सामने आने के बाद ऐसी संभावना जताई जा रही है कि पुलिस अगले एक-दो दिनों में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर देगी। घाटशिला से झामुमो के वरिष्ठ विधायक रामदास सोरेन के नए आरोपों से एक बार फिर झारखंड में राजनीति गर्म है। बकौल विधायक, रवि केजरीवाल और उसके मित्र अशोक अग्रवाल ने उनसे विधानसभा परिसर में मुलाकात की थी। यह करीब एक महीने पहले की बात है। उसके बाद आवास पर भी मिलने आए। रामदास सोरेन के मताबिक, केजरीवाल ने कहा कि वे झामुमो छोड़ दें। उसकी पार्टी के कई अन्य विधायकों से भी बातचीत हो चुकी है। हेमंत सोरेन की सरकार गिरने के बाद झामुमो के विधायक नई पार्टी बनाकर भाजपा को समर्थन दे देंगे।

नई सरकार में उन्हें मंत्री का पद दिया जाएगा और साथ में मनचाही रकम भी मिलेगी। विधायक के अनुसार रवि केजरीवाल की पेशकश के बाबत उसी वक्त उन्होंने मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अवगत करा दिया था। आपस में विचार-विमर्श करने के बाद ही उन्होंने 12 अक्टूबर को प्रलोभन देकर जनप्रतिनिधि को दायित्वों के खिलाफ आचरण करने के लिए प्रेरित करने और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को गिराने का षड्यंत्र रचने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया। सवाल उठता है कि मुकदमा दर्ज करवाने में उन्होंने इतना समय क्यों लगाया? मुकदमा दर्ज करवाया तो पुलिस ने इसे आठ दिनों तक छुपाए क्यों रखा? पुलिस फौरन हरकत में क्यों नहीं आई? इन सब सवालों पर हर कोई चुप्पी साध ले रहा है। हां, इतना जरूर हुआ है कि झामुमो, कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर फिर से हमलावर हो गए हैं।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर भी भाजपा पर तंज कस रहे हैं। उनका कहना है कि हेमंत सरकार की लोकप्रियता को देखकर भाजपा बौखलाई हुई है। गठबंधन दलों के सारे विधायक एकजुट हैं। वहीं भाजपा इसे झामुमो का अंदरूनी मामला बता रही है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश का दावा है कि गठबंधन में अंदरखाने सबकुछ ठीक नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार अपने खिलाफ ही साजिश का पर्दाफाश करने में नाकाम साबित हो रही है। उसे पूरे मामले की जांच सीबीआइ को सौंप देनी चाहिए, ताकि पर्दे के पीछे छिपे असली गुनहगार सामने आ सकें। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अपने ही विधायकों की नाराजगी झेल रही सरकार उन पर नियंत्रण के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है।

[स्थानीय संपादक, झारखंड]

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