Jharkhand Politics: आदिवासियों पर सियासत गर्म... BJP बोली, हेमंत सोरेन सनातनी; झामुमो ने कहा- भाजपा के सारे नेता ढोंगी

Jharkhand Politics आदिवासियों को लेकर सियासत गर्म हो गई है। भाजपा और झामुमो ने आदिवासी हित के मसले पर एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधा। झामुमो ने जहां भाजपा के सारे नेताओं को ढोंगी बताया वहीं भाजपा ने हेमंत सोरेन के सनातनी कहकर अपनी भड़ास निकाली।

Alok ShahiMon, 25 Oct 2021 12:58 AM (IST)
Jharkhand Politics: आदिवासियों पर सियासत गर्म है। भाजपा ने हेमंत सोरेन को सनातनी बताया है।

रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Politics भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के अंतिम दिन रविवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा ने निशाना साधा। महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने सिर्फ आदिवासी के नाम पर भ्रम फैलाने का काम किया। जनगणना से सरना धर्म कोड को भाजपा के नेता भूल गए। भाजपा ने पेसा कानून का जिक्र नहीं किया। भाजपा ने पूजा पद्धति को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की। ऐसा कहने वाले भाजपा के नेता ढोंगी हैं।

उन्होंने जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा को चुनौती दी कि वे यह साबित करें कि राज्य सरकार एकलव्य विद्यालयों की स्थापना में कैसे बाधा खड़ी कर रही है। भाजपा के नेताओं ने अपनी बैठकों में पेसा कानून का जिक्र तक नहीं किया, जबकि यह आदिवासियों का रक्षा कवच है। जनजातीय समुदाय की बात भाजपा करती है, लेकिन असम में उनकी सरकार है। वहां झारखंड से जाकर बसे आदिवासी समुदाय के लोगों को अभी तक अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिला।

आखिर भाजपा नेताओं की माथापच्ची का लाभ क्या है। इन्हें झूठ बोलना बंद करना चाहिए। ये आदिवासियों के सवाल पर कोई बात नहीं करते। यूपीएससी में 65 एसटी आरक्षित सीटों में 60 प्रतिशत सीटों पर राजस्थान के एक ट्राइब का कब्जा है। इन्हें सोचना चाहिए कि बाकी राज्यों के आदिवासियों की स्थिति क्या है। अर्जुन मुंडा आदिवासियों की बेहतरी के लिए प्रधानमंत्री को श्रेय दे रहे हैं। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा से राजनीति शुरू की, लेकिन संस्कार भूल गए। आज प्रधानमंत्री को भगवान बिरसा मुंडा याद आ रहे हैं।

धरती आबा ने जल, जंगल, जमीन की लड़ाई लड़ी और आज कारपोरेट घरानों के पास जमीन गिरवी रखी जा रही है। यूपी के सोनभद्र में आदिवासियों पर सामंती ताकतों ने अत्याचार किया। इसपर भाजपा के नेताओं ने मुंह तक नहीं खोला। भाजपा की बातें समझ से परे है। ये खुद को सच्चा सनातनी कहते हैं लेकिन इसका सब कुछ ढोंग और दिखावा है। ये धर्म के नाम पर राजनीति करते हैं। सरना धर्म कोड भाजपा के घोषणा पत्र में शामिल था, लेकिन आज ये इसे भूल गए हैं।

योजनाओं में बाधक ब्यूरोक्रेसी

झामुमो महासचिव ने राज्य की अफसरशाही को निशाने पर लेते हुए कहा कि इन्हें जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। इनकी सोच बहुत घातक है। इसी वजह से सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में देर लगेगी।

हेमंत सोरेन हैं सनातनी, कांग्रेस के नेता न पढ़ाएं आस्था का पाठ : भाजपा

भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सनातनी बताते हुए कहा है कि सत्तारूढ़ दल को जनजातियों को भ्रमित करने से बचना चाहिए। रविवार को एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति के बाद मीडिया से बातचीत में समीर उरांव ने कहा कि सरना धर्म कोड की मांग संबंधी विषय बहुत ही जटिल है। जटिलता समाप्त होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि संविधान में अनुसूचित जनजाति की परिभाषा अभी भी बहुत स्पष्ट नहीं है। जबकि अनुसूचित जाति की स्पष्ट है। यह परिभाषा एक बार स्पष्ट हो जाए तो फिर हम आगे बढ़ेंगे। मैं किसी के बहकावे में आकर तुरंत कोई बयान नहीं देना चाहता हूं। सरना धर्म कोड पर मंत्री रामेश्वर उरांव के बयान पर उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास जरूरी है लेकिन किसी की आंख में पट्टी नहीं बंधी है। वे आस्था और विश्वास का पाठ हमें न पढ़ाएं। जनजातियों को भ्रमित न करें। यह भी कहा कि सरना धर्म कोड पर मुख्यमंत्री को पत्र किसने लिखा, पत्र लिखने वाले लोग कौन थे, यह विषय भी उठना चाहिए।

भाषण और राशन से नहीं होगा आदिवासियों का विकास

समीर उरांव ने एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में पिछले दो दिनों के सत्र में उठे विषयों को मीडिया से साझा किया। कहा, आदिवासियों को भाषण और राशन देने से उनका विकास नहीं होगा। जनजातीय समाज का स्तर उठाने के लिए उन्हें आत्मनिर्भर बनाना होगा। इसके लिए हम 40-50 गांवों को मिलाकर संकुल विकास परिषद का गठन देश भर में करेंगे ताकि जनजातीय समाज से जुड़े लोगों का पलायन रुके और उन्हें रोजगार मिले। वनोत्पाद, घरेलू उत्पाद के प्रसंस्करण और विपणन से उन्हें जोड़ा जाएगा। इस विषय पर कार्यसमिति में विस्तार से चर्चा हुई है।

उन्होंने कार्यसमिति में पेश राजनीतिक प्रस्ताव का भी जिक्र किया। कहा, पहले आदिवासी अपने अधिकारों से वंचित रहते थे, अब हम उन्हें विकास की मुख्य धारा से जोड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कार्यसमिति के खुले सत्र में जनजातीय समाज के हितों पर खुली चर्चा हुई। तमाम विषय सामने आएं हैं जिनका समाधान निकाला जाएगा। हम अपने महापुरुषों की जीवनी उनकी उपलब्धियों को भी समाज को बताने का काम करेंगे। मोर्चा के तमाम कार्यक्रमों को नीचे तक पहुंचाएंगे।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
You have used all of your free pageviews.
Please subscribe to access more content.
Dismiss
Please register to access this content.
To continue viewing the content you love, please sign in or create a new account
Dismiss
You must subscribe to access this content.
To continue viewing the content you love, please choose one of our subscriptions today.