CM हेमंत सोरेन की पहल पर उत्तर प्रदेश से मुक्त हुए 33 आदिवासी श्रमिक व 9 बच्‍चे

Jharkhand News CM Hemant Soren श्रमिकों का बकाया साढ़े पांच लाख रुपये का भी भुगतान हुआ। उन्‍हें बंधक बनाकर रखे जाने की भी शिकायत थी। सभी नारकीय जीवन जीने को विवश थे। खराब हालत में रहने के कारण श्रमिकों के बच्चे बीमार रहने लगे थे।

Sujeet Kumar SumanWed, 23 Jun 2021 07:35 PM (IST)
देवरिया स्थित ईंट भट्ठे से मुक्त कराए गए रांची के 33 आदिवासी श्रमिक और उनके नौ बच्चे। सौ. पीआरडी।

रांची/देवरिया, जागरण टीम। उत्तर प्रदेश के देवरिया में एक ईंट भट्ठे पर काम करने वाले झारखंड के 33 आदिवासी श्रमिकों और नौ बच्चों को बुधवार को ट्रेन से रांची रवाना किया गया। इन श्रमिकों ने शिकायत की थी कि उनके श्रम का भुगतान नहीं किया गया है और उनसे अमानवीय ढंग से काम लिया जा रहा है। उन्होंने ईंट भट्ठा मालिक पर बंधक बनाए जाने की भी शिकायत की थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक जब यह शिकायत पहुंची तो उन्होंने अफसरों को इस दिशा में कार्रवाई करने का आदेश दिया।

राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष और फिया फाउंडेशन ने देवरिया के जिलाधिकारी से संपर्क किया। जिलाधिकारी की पहल पर ईंट भट्ठे पर टीम पहुंची और न सिर्फ मजदूरों का भुगतान कराया बल्कि उनका घर वापस लौटना भी सुनिश्चित कराया। सभी मजदूर रांची के चान्हो प्रखंड के टांगर गांव के निवासी हैं। जानकारी के अनुसार श्रमिक जनवरी माह में अपने परिवार के साथ उत्तर प्रदेश काम की तलाश में गए थे। देवरिया जिले के रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के मुंडेरा गांव स्थित रजत ईंट भट्ठे में एक ठेकेदार ने इन्हें काम पर लगा दिया।

श्रमिकों का कहना था कि छह माह से काम करने के बावजूद उनका बकाया करीब सात लाख रुपया नहीं दिया जा रहा था। साथ ही उन्हें रहने के लिए जो जगह दी गई थी, उसकी हालत काफी खराब थी। वहां साफ-सफाई का अभाव था। खराब हालत में रहने के कारण श्रमिकों के बच्चे बीमार रहने लगे थे। भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों में से किसी ने दो दिन पहले झारखंड की स्वयंसेवी संस्था के पदाधिकारी को सूचना दी कि उन्हें देवरिया में बंधक बनाया गया है। सीएम हेमंत सोरेन तक भी बात पहुंची।

इसके बाद झारखंड से जिलाधिकारी देवरिया आशुतोष निरंजन को मामले की जानकारी दी गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन कुंवर पंकज के नेतृत्व में श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशि सिंह, थानाध्यक्ष मनोज कुमार की टीम ने भा मालिक रजत कुमार से संपर्क किया तो पता चला कि मजदूरों को मजदूरी नहीं मिली है। वे गांव जाना चाहते हैं और तत्काल भुगतान चाहते हैं। अधिकारियों की मौजूदगी में मजदूरों को साढ़े पांच लाख रुपया भुगतान किया गया।

बताया गया कि बाकी पैसे का भुगतान पूर्व में मजदूरों को कर दिया गया है। इसके बाद सबको मौर्य एक्सप्रेस से रांची के लिए रवाना कर दिया गया। रांची लौटने वालों में मेठ सुमन देवी के अलावा श्रमिक प्रदीप, सुषमा, महादेव, सविता, सोमनाथ, विजय, आशीष, पंकज, दतिया, पंचू, रेखा, शिवा, रजनी, सुनील, अनूप, राजू, ममता, लकी, बुधराम आदि शामिल हैं।

'मजदूरों को बंधक नहीं बनाया गया था। मजदूरी बकाए का मामला था। भुगतान करा दिया गया और सभी को रांची भेज दिया गया है।' -आशुतोष निरंजन, जिलाधिकारी, देवरिया।

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