Lockdown Guidelines: यहां लॉकडाउन का बुरा हाल, कोई रोक-टोक नहीं, गाइडलाइन हवा-हवाई

Jharkhand Lockdown: झारखंड में लॉकडाउन गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं।

Jharkhand Lockdown झारखंड में 13 मई तक लॉकडाउन लागू किया गया है। लेकिन यहां सरकार के गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। शुक्रवार को सूरत से आई स्‍पेशल ट्रेन से यहां 1700 प्रवासी उतरे लेकिन उनमें से किसी की कोरोना जांच नहीं हुई। स्‍टेशन पर अफरातफरी मची रही।

Alok ShahiFri, 07 May 2021 06:55 PM (IST)

रांची, जेएनएन। Jharkhand Lockdown झारखंड में 13 मई तक लॉकडाउन लागू किया गया है। लेकिन, यहां सरकार के गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। शुक्रवार को सूरत से आई स्‍पेशल ट्रेन से यहां हजाराें प्रवासी उतरे, लेकिन उनमें से किसी की कोई जांच नहीं हुई। स्‍टेशन पर अफरातफरी मची रही। हटिया स्टेशन पर सूरत से पहुची स्पेशल ट्रेन में किसी यात्री की जांच नही की गई। सभी यात्रियों को उनके घर भेजने के लिए जिलों के लिए आरक्षित बसों से रवाना कर दिया गया। रांची जिला प्रशासन ने दूसरे राज्‍यों से आने वाले प्रवासियों के लिए बसों की व्यवस्था की है। हालांकि यात्री परेशान दिख रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की संबंधित जिले में कोरोना जांच की जाएगी।

सूरत से 1700 मुसाफिरों को लेकर हटिया पहुंची स्पेशल ट्रेन, नहीं हुई कोरोना जांच

सूरत से 1791 श्रमिकों को लेकर स्पेशल ट्रेन शुक्रवार की शाम 5:30 बजे हटिया रेलवे स्टेशन पहुंची। हटिया रेलवे स्टेशन पर प्रशासनिक अधिकारी पहले से चाक-चौबंद थे। यहां किसी भी यात्री की जांच नहीं की गई। सबको एक-एक कर रेलवे स्टेशन से बाहर लाया गया और वहां लगी बसों के जरिए उन्हें उनके जिलों में भेज दिया गया। कुछ यात्री आटो से रवाना हो गए। बाहर कोई देखने वाला नहीं था कि यात्री बस से जा रहे हैं या ऑटो से। लोगों का कहना है कि यह लापरवाही है। जिला प्रशासन को हटिया में ही सभी श्रमिकों और यात्रियों की कोरोना जांच करानी चाहिए थी। अब जिलों में कोरोना जांच होगी या नहीं यह भगवान भरोसे है।

बस से जिलों में भेजे गए मुसाफिर, कई ऑटो से गए

यही नहीं यशवंतपुर हटिया स्पेशल ट्रेन से भी इतने ही यात्री उतरे और वह भी बिना जांच कराए रांची निकल गए। इनमें से जो यात्री पॉजिटिव होंगे वह राजधानी के लिए खतरा बनेंगे। अधिकारियों का कहना है कि उनके जिले में इन यात्रियों की कोरोना जांच की जाएगी और सभी यात्रियों को 7 दिनों के लिए क्वारंटाइन भी किया जाएगा। सूरत से आई ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर रोकी गई। स्टेशन पर प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा आरपीएफ और रेलवे के अधिकारी भी मुस्तैद थे। ट्रेनों में सवार 1791 श्रमिकों और अन्य यात्रियों को एक एक बोगी करके प्लेटफार्म पर उतारा गया। पहले एक बोगी के श्रमिकों को उतारा गया। जब इस बोगी के श्रमिक स्टेशन से बाहर चले गए। तब दूसरी बोगी के श्रमिकों को उतारा गया। इस तरह एक-एक कर बोगी खाली कराई गई।

श्रमिकों के बाहर निकालने के लिए बनाए गए थे दो गेट

एक बोगी के श्रमिक जब बाहर निकलते थे। तो उन्हें उनके इंतजाम के अनुसार बस में बैठा दिया जाता था। जो बसें भर जाती थीं। उनको लेकर उनके ड्राइवर उनकी मंजिल को रवाना हो जाते थे। रेलवे स्टेशन के बाहर पिछले अनुभव को देखते हुए मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी गौरतलब है कि पिछली बार जब सूरत से ट्रेन आई थी तो श्रमिक अधिक संख्या में होने की वजह से बैरिकेडिंग तोड़कर बाहर निकल गए थे। इसलिए इस बार आरपीएफ मुस्तैद थी और बैरिकेडिंग भी मजबूत की गई थी और श्रमिकों को एक एक बोगी करके ही उतारा गया। शाम 6:20 बजे इस ट्रेन के सारे श्रमिक और यात्री प्लेटफार्म से बाहर निकल गए थे। श्रमिकों की अधिक संख्या को देखते हुए प्लेटफार्म से बाहर निकलने के दो गेट बनाए गए थे। इन दो गेटों से श्रमिकों को निकाला गया। दोनों गेट पर बैरिकेडिंग भी की गई थी

सबसे ज्यादा गिरिडीह के थे श्रमिक

ट्रेन से आने वाले श्रमिकों में सबसे अधिक संख्या गिरिडीह के लोगों की थी। इसके अलावा साहबगंज, गुमला, लातेहार, हजारीबाग, रामगढ़, खूंटी, लोहरदगा, चतरा और गढ़वा के थे।

हटिया यशवंतपुर ट्रेन के यात्रियों को दूसरे रास्ते से हुआ निकालने का इंतजाम

सूरत से आई ट्रेन से श्रमिकों और मुसाफिरों को जब एक-एक कर उतारा जा रहा था। तभी शाम 5:50 बजे यशवंतपुर हटिया स्पेशल ट्रेन पहुंच गई। रेलवे के अधिकारियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए इस ट्रेन के यात्रियों को स्टेशन के दूसरे गेट से निकालने का प्रबंध किया। इस तरह, यह यात्री आसानी से रेलवे स्टेशन से बाहर निकले। वरना जिस तरह स्टेशन पर श्रमिकों की भीड़ थी। इन यात्रियों के बाहर निकलने में दिक्कत होती है।

श्रमिकों को ब्रेड और बच्चों के लिए बिस्कुट की थी व्यवस्था

जिला प्रशासन ने सूरत से आए श्रमिकों और उनके बच्चों के लिए नाश्ते का भी प्रबंध किया था। श्रमिकों को 1-1 ब्रेड का पैकेट दिया गया। जबकि बच्चों को बिस्किट के पैकेट दिए गए। यात्रियों का कहना था कि प्रशासन को पानी का भी इंतजाम करना चाहिए था। कई यात्री इस बात से नाराज थे कि उन्हें सिर्फ सूखे ब्रेड दिए गए। इससे वह कैसे नाश्ता करेंगे।

बहरहाल, सूरत-हटिया स्‍पेशल ट्रेन से हजारों प्रवासी शुक्रवार को झारखंड पहुंचे। यहां स्‍टेशन पर कोरोना संक्रमण जांच की कोई व्‍यवस्‍था नहीं की गई थी। हटिया रेलवे स्‍टेशन पर शुक्रवार को यशवंतपुर स्‍पेशल ट्रेन से भी हजारों यात्री उतरे, लेकिन उनमें से किसी की कोरोना जांच नहीं की गई। यात्रियों में अपने घर, गंतव्‍य तक जाने के लिए अफरातफरी की स्थिति देखी गई।

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