लेक्चरर नियुक्ति नियमावली मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने सात विश्वविद्यालयों से मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान कहा गया कि सरकार लेक्चरर नियुक्ति के लिए नियमावली नहीं बना सकती है।

Jharkhand High Court News Update सुनवाई के दौरान कहा गया कि सरकार लेक्चरर नियुक्ति के लिए नियमावली नहीं बना सकती है। यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। नियमावली बनाने का अधिकार विश्वविद्यालय के पास ही है।

Sujeet Kumar SumanMon, 22 Feb 2021 07:52 PM (IST)

रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डाॅ. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में लेक्चरर की नियुक्ति के लिए सरकार की ओर से बनाई गई नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने इस मामले में राज्य के सभी सात विश्वविद्यालयों से जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी। इस संबंध में डाॅ. तस्लीम आरिफ ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। सुनवाई के दौरान कहा गया कि सरकार लेक्चरर नियुक्ति के लिए नियमावली नहीं बना सकती है। यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

नियमावली बनाने का अधिकार विश्वविद्यालय के पास है। ऐसे में सरकार की नियुक्ति नियमावली को रद कर देना चाहिए। इस मामले में जेपीएससी के अधिवक्ता संजय पिपरवाल व प्रिंस कुमार सिंह ने अदालत को बताया कि सरकार की अधियाचना के आधार पर ही नियुक्ति प्रक्रिया की जा रही है। यह सरकार का मामला है। इस पर अदालत ने रांची विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, सिदो कान्हू विश्वविद्यालय, विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, नीलांबर-पितांबर विश्वविद्यालय और श्याम प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है।

सिविल जज नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डाॅ. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में सिविल जज (जूनियर डिविजन) की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने जेपीएससी के जवाब के बाद याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान जेपीएससी के अधिवक्ता संजय पिपरवाल व प्रिंस कुमार सिंह ने अदालत को बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया वर्ष 2010 में समाप्त हो गई है। इसके बाद आयोग की ओर से चार अन्य नियुक्ति भी पूरी कर ली गई है। ऐसे में अब इस मामले में सुनवाई करने का कोई औचित्य नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

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