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Jharkhand: 15 अगस्‍त को सीएम लांच करेंगे ऋण माफी योजना, लगभग 7 लाख किसान होंगे लाभान्वित

Jharkhand: 15 अगस्‍त को सीएम लांच करेंगे ऋण माफी योजना, लगभग 7 लाख किसान होंगे लाभान्वित
Publish Date:Fri, 14 Aug 2020 05:05 PM (IST) Author: Sujeet Kumar Suman

रांची, राज्य ब्यूरो। 15 अगस्‍त को झारखंड में किसानों के लिए ऋण माफी योजना लांच की जाएगी। बताया जा रहा है कि इस योजना से छोटे और सीमांत किसान लाभान्वित होंगे। झारखंड में साढ़े सात लाख किसान कर्ज में डूबे हैं। इन किसानों पर करीब सात से आठ हजार रुपये का कर्ज है। जाहिर है बजट में ऋण माफी के लिए किए गए दो हजार करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किसानों की ऋण माफी के लिए काफी न होगा। इसीलिए ऋण माफी का विषय उससे कहीं अधिक पेचीदा हो गया है, जितना से समझा गया था। यही वजह है कि इस पूरे विषय को उच्चस्तरीय समिति के हवाले कर दिया गया है।

2014 से 2020 तक की ऋण माफी पर होगा जोर

किसानों की ऋण माफी के लिए समयावधि मोटे तौर तय कर ली गई है। पूर्व की बैठकों में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि एक अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2020 के बीच ऋण के चंगुल में फंसे किसानों की कर्ज माफी पर फोकस किया जाएगा। यदि राशि शेष रहती है तो अन्य किसानों पर भी विचार किया जाएगा। छोटे व सीमांत किसानों की कर्जमाफी पर ही जोर होगा। जाहिर है यह सीमा 50 हजार रुपये तक ही हो सकती है।

तय करेगी उच्चस्तरीय समिति

झारखंड में किसानों की ऋण माफी का विषय उससे कहीं अधिक पेचीदा साबित हो रहा है, जितना इसे समझा जा रहा था। यही वजह रही कि किसानों की ऋण माफी को लेकर गुरुवार को कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख की अध्यक्षता में नेपाल हाउस सचिवालय में बुलाई गई बैठक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। तय किया गया कि ऋण माफी से जुड़े तमाम व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन करने और इसे अमली जामा पहनाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।

मुख्य सचिव या विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित होने वाली समिति ही यह तय करेगी कि इसे कैसे लागू किया जाए। हालांकि बैठक में कृषि मंत्री ने किसानों की ऋण माफी को संजीदगी से लागू करने की बात कही। उनका विशेष जोर छोटे व सीमांत किसानों की ऋण माफी पर रहा, लेकिन कौन-कौन से किसान ऋण माफी के दायरे में आएंगे और उनका कितना कर्ज माफ किया जाएगा। कर्ज माफी की सीमा 50 हजार ही होगी या अधिक। इसे लागू करने में बैंकों की क्या भूमिका होगी, इन तमाम विषयों को उच्चस्तरीय समिति के सुपुर्द ही करने का निर्णय लिया गया।

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