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झारखंड के सरकारी स्कूलों के शिक्षक नाराज, शिक्षा विभाग का यह आदेश बना वजह; जानें

Jharkhand News, Hindi Samachar संघों ने निदेशक से इस पर पुनर्विचार की मांग की है।

Jharkhand News Hindi Samachar झारखंड में गर्मी की छुट्टी में भी सरकारी स्कूलों के बच्चों की ऑनलाइन क्लास करने का आदेश दिया गया है। छुटी हुई पढ़ाई की भरपाई के लिए सभी जिलों को आदेश जारी किया गया है। संघों ने निदेशक से इस पर पुनर्विचार की मांग की है।

Sujeet Kumar SumanMon, 17 May 2021 07:29 PM (IST)

रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को गर्मी की छुट्टी नहीं मिलेगी। शिक्षक भी इसका उपयोग नहीं कर पाएंगे। ग्रीष्मावकाश में भी उनकी ऑनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी। कोरोना के कारण लंबे समय से स्कूलों के बंद रहने के कारण बच्चों की छुटी हुए पढ़ाई तथा उनमें हुए लर्निंग लॉस की क्षतिपूर्ति के लिए यह निर्णय लिया गया है। झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों तथा जिला शिक्षा अधीक्षकों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

जेसीईआरटी के निदेशक शैलेश कुमार चौरसिया ने जिला पदाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा है कि ग्रीष्मावकाश में भी डिजी साथ द्वारा उपलब्ध कराई जा रही शैक्षणिक सामग्री एवं साप्ताहिक पाठ्य योजना के अनुसार ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया जाए। उन्होंने इसकी नियमित मॉनीटरिंग करने के भी निर्देश दिए हैं। उनके अनुसार, पिछले शैक्षणिक सत्र में स्कूलों के बंद रहने तथा शिक्षकों एवं बच्चों के बीच दूरी के कारण उनकी शिक्षा का नुकसान हुआ है।

इधर, सरकारी स्कूलों में सोमवार से ही गर्मी की छुट्टी होनेवाली थी। शिक्षक यह मानकर चल रहे थे कि इस अवधि में उन्हें बच्चों की ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन एवं अन्य कार्य नहीं करना होगा। अब इस आदेश से उनमें असंतोष है। शिक्षक संघों ने इसका विरोध करते हुए निदेशक से पुनर्विचार की मांग की है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव राममूर्ति ठाकुर व प्रवक्ता नसीम अहमद का कहना है कि आकस्मिक अवकाश की संख्या काटकर शिक्षकों को ग्रीष्मावकाश के उपयोग की अनुमति दी जाती है।

इस अवधि में शिक्षक अपने गृह जिला में जाते हैं तथा अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं। वहीं, झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ के अध्यक्ष आनंद साहू व महासचिव बलजीत सिंह ने भी ग्रीष्मावकाश में ऑनलाइन क्लास एवं अन्य गतिविधियां स्थगित रखने की मांग की है। इनका कहना है कि ग्रीष्मावकाश का उपयोग शिक्षकों का अधिकार है।

बच्चों के वाट्सएप से भेजी जा रही पाठ्य योजना के अनुसार डिजिटल सामग्री

स्कूलों के बंद रहने के कारण वर्तमान शैक्षणिक सत्र में तीन मई से डिजिटल सामग्री वाट्सएप के माध्यम से बच्चों को भेजी जा रही है। अभी तक कोरोना जागरुकता, स्वच्छता, बच्चों के मानसिक विकास से संबंधित सामग्री भेजी जा रही थी। सोमवार से पाठ्य पुस्तकों के आधार पर तैयार डिजिटल कंटेंट भेजे जाने लगे हैं। सप्ताह में चार दिन प्रखंड स्तर से जूम एप के माध्यम से भी ऑनलाइन कक्षा के संचालन के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि सरकारी स्कूलों में नामांकित लगभग 38 लाख बच्चों में 12-13 लाख के पास ही स्मार्ट फोन की सुविधा होने से डिजिटल सामग्री पहुंच पा रही है।

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