Coronavirus in Jharkhand: बेकाबू कोरोना से सरकार की उड़ी नींद... रामभरोसे झारखंड

Coronavirus in Jharkhand: झारखंड में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण ने पुलिस-प्रशासन और सरकार की नींद उड़ा दी है।

Coronavirus in Jharkhand झारखंड में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण ने पुलिस-प्रशासन से लेकर सरकार तक की नींद उड़ा दी है। न कांटेक्ट ट्रेसिंग हो रही है और न हीं कंटेंनमेंट जोन में सख्ती बरती जा रही है। कोरोना संक्रमित लगातार एक-दूसरे से संपर्क में हैं और मिल-जुल रहे हैं।

Alok ShahiMon, 19 Apr 2021 07:09 PM (IST)

रांची, राज्य ब्यूरो। Coronavirus in Jharkhand झारखंड में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण ने पुलिस-प्रशासन से लेकर सरकार तक की नींद उड़ा दी है। इस वायरस की चेन को तोड़ने के लिए जिन ठोस कदमों की जरूरत थी, उसपर पहल की आवश्यकता है। न कांटेक्ट ट्रेसिंग हो रही है और न हीं कंटेंनमेंट जोन में सख्ती बरती जा रही है। जो इस वायरस से संक्रमित हैं, वे लगातार एक-दूसरे से संपर्क में हैं और मिल-जुल रहे हैं। फिर ऐसी स्थिति में संक्रमण रुके तो कैसे। गत वर्ष बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए सरकार व प्रशासन के स्तर पर मुस्तैदी बरती गई थी, जिसका नतीजा यह हुआ कि दूसरे राज्यों से बेहतर व्यवस्था झारखंड की रही थी।

गत वर्ष के कुछ अभ्यास, जिसपर सरकार व प्रशासन को विचार करने की जरूरत

कंटेनमेंट जोन में सख्ती, संक्रमितों पर नजर : जिस इलाके, जिस घर में संक्रमित मिले, वहां प्रशासन सख्ती बरते। संक्रमित घर से बाहर निकले, कंटेंमेंट जोन से बाहर निकले तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करे, ऐसी स्थिति में इस वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं पहुंचेगा और इस वायरस के फैलाव को रोका जा सकेगा। कांटेक्ट ट्रेसिंग : अगर कोई संक्रमित मिले तो उससे मिलने वाले लोगों पर भी प्रशासन की नजर हो। संक्रमित से मिलने वालों से भी होम आइसोलेशन में रहने का दबाव बनाया जाय। संक्रमण क्षेत्र में व्यापक जांच अभियान : संक्रमण क्षेत्र में व्यापक जांच अभियान चलाया जाय, ताकि पता चल सके कि किस इलाके में संक्रमण अधिक है। ऐसे संक्रमितों के लिए कोविड गाइडलाइंस के पालन के साथ-साथ इलाज की व्यवस्था हो। 

सात जिलों में स्थापित होगी कोरोना जांच लैब, रिम्स में बढ़ेंगे 110 आइसीयू सहित 550 बेड

राज्य के सात जिलों रांची, जमशेदपुर, बोकारो, चाईबासा, गुमला, देवघर व गोड्डा में कोरोना की आरटी-पीसीआर जांच के लिए एक-एक लैब की स्थापना होगाी। ये लैब बीएसएल दो तथा तीन स्तर की होंगी। वहीं, रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में 110 आइसीयू सहित 500 बेड उत्क्रमित जाएंगे जिनमें सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। राज्य सरकार ने इन कार्यों की जिम्मेदारी मनोनयन के आधार पर प्रेज्ञा फाउंडेशन (पैन आइआइटी एल्युमिनी रिसर्च फॉर झारखंड फाउंडेशन) को दी है।  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसपर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। इसपर कैबिनेट की स्वीकृति बाद में ली जाएगी। फाउंडेशन लैब की स्थापना के अलावा मानव संसाधन उपलब्ध कराएगा तथा उनका प्रशिक्षण भी देगा।

रांची, जमशेदपुर, बोकारो, चाईबासा, गुमला, देवघर व गोड्डा में स्थापित होगी लैब

इधर राज्य सरकार ने रिम्स में आवश्यक चिकित्सीय उपकरण, विशेष आईसीयू बेड, ऑक्सीजन आदि आधुनिक सुविधाओं सहित 500 सुसज्जित बेड बढ़ाने की भी मंजूरी दे दी है। रिम्स के मेडिकल वार्ड डी-1, डी-2, सर्जिकल वार्ड डी-1, डी-2 में 216 बेड तथा तथा सामान्य वार्ड सहित अन्य वार्डों में 174 बेड अर्थात कुल 390 बेड ऑक्सीजन सुविधा सहित बढ़ाए जाएंगे। इसके साथ-साथ मेडिकल आइसीयू में 40 बेड तथा आंकोलॉजी वार्ड में 68 बेड, कुल 110 आइसीयू बेड की स्थापना होगी।

इस तरह, रिम्स रांची में 110 आइसीयू बेड सहित कुल 500 ऑक्सीजन सुसज्जित बेड उत्क्रमित हो जाएंगे। इसमें 14 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। पूरी प्रक्रिया में 29 करोड़ रुपये खर्च होंगे जिसका वहन आपदा प्रबंधन विभाग से मिली राशि से किया जाएगा। इसकी भी जिम्मेदारी प्रज्ञा फाउंडेशन को दी गई है। शीघ्र ही इसके लिए फाउंडेशन तथा झारखंड स्टेट मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के साथ एमओयू किया जाएगा। बता दें कि इस फाउंडेशन को पूर्व में हजारीबाग, पलामू तथा दुमका मेडिकल कॉलेजों में आटी-पीसीआर जांच लैब स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अनुभव के आधार पर यह जिम्मेदारी दी गई है।

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