Jharkhand by Election: विरासत की जंग में असली मुद्दे गायब, उपचुनाव में रोजाना बढ़ रही खटास

लुईस मरांडी और बसंत सोरेन की फाइल फोटो।

Jharkhand by Election बेरमो और दुमका में होने वाले उपचुनाव के लिए पक्ष-विपक्ष ने पूरी ताकत झोंक दी है। सार्थक मुद्दों पर बहस की बजाए एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा छोड़ी गई सीट से उनके छोटे भाई बसंत सोरेन किस्मत आजमा रहे हैं।

Publish Date:Fri, 23 Oct 2020 01:51 PM (IST) Author: Sujeet Kumar Suman

रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड में दुमका व बेरमो विधानसभा क्षेत्र के लिए हो रहे उप चुनाव अब पूरी तरह विरासत की जंग में तब्दील हो गए हैं। विरासत बचाने व छीनने की होड़ में जुबानी जंग भी तेज हो रही है। जुबान बेलगाम हो गई है और क्षेत्र के असली असली मुद्दे इस शोर में दबते दिखाई दे रहे हैं। चुनाव में ऐसे सियासी पैतरे हमेशा से ही जनता को उलझाए रखने के लिए आजमाए जाते हैं। संताल को झामुमो का अपेक्षाकृत मजबूत दुर्ग माना जाता रहा है और दुमका झामुमो की विरासत।

हालांकि, कई मौकों पर यहां झामुमो को झटका लगा है, लेकिन फिर भी विरासत का यह तमगा बरकरार है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा छोड़ी गई इस सीट से इस बार उनके छोटे भाई बसंत सोरेन किस्मत आजमा रहे हैं। यह चुनाव उनकी सक्रिय राजनीति में इंट्री के लिए काफी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री समेत पूरी झामुमो की प्रतिष्ठा इस सीट से जुड़ी हुई है। वहीं, हमेशा से उलटफेर का शिकार होती रही बेरमो सीट पर कांग्रेस ने अपनी पकड़ कभी पूरी तरह से खोई नहीं।

पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह कई बार चुनाव जीते। उनके असमय निधन के बाद उनके पुत्र कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह चुनाव में उतरे हैं। दोनों ही सीटों से भाजपा की प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है। दुमका से पूर्व मंत्री लुइस मरांडी इस चुनाव में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, तो बेरमो से पूर्व विधायक योगेश्वर महतो।

भाजपा ने उपचुनाव में विरासत को चुनौती देने का नारा बुलंद कर जनता का समर्थन जुटाने की मुहिम शुरू कर रखी है। एनडीए के तकरीबन हर मंच से इस विरासत को चुनौती दी जा रही है। जंग इसी शब्द के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है। दोनों विधानसभा क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दे चुनाव में नदारद दिख रहे हैं। एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ में जुबान बेलगाम हो गई है।

केंद्र व राज्य की बहस में उलझा चुनाव

आमतौर पर उपचुनावों में स्थानीय मुद्दे हावी होते हैं, चुनाव उन्हीं से जुड़े वादों के इर्द-गिर्द सिमटा रहता है। लेकिन यह शायद पहला चुनाव होगा जो केंद्र व राज्य की बहस में उलझा दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार डीवीसी के बकाया, जीएसटी की कटौती और अब मेडिकल कॉलेज की सीटों की संख्या में कटौती को लेकर भारत सरकार पर हमलावर है।

वहीं भाजपा केंद्र सरकार के पक्ष में तर्क दे, राज्य सरकार की खामियों को उजागर कर रही है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा समेत पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, बाबूलाल मरांडी लगातार राज्य सरकार पर हमलावर हैं। अपनी पार्टी के पक्ष में खड़ा होना स्वाभाविक है। ऐसे में राज्य हित के मसले पर सांसदों के रुख को ही आधार बनाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निशाना साधा है।

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