Sarna Dharam Code: वेटिकन सिटी से नहीं, पाहन-पुजार से चलेगा आदिवासी समाज, ईसाई मिशनरी की मांग है सरना धर्म कोड

Sarna Dharam Code: कार्यक्रम में बोलते जनजाति सुरक्षा मंच के संयोजक।

Sarna Dharam Code जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश संयोजक संदीप उरांव ने कहा कि वेटिकन सिटी से नहीं पाहन-पुजारा से हमारा समाज चलेगा। केंद्रीय युवा सरना (चाला) विकास समिति के नेतृत्व में आदिवासी संगठनों ने सरना धर्म कोड के संबंध में धरना दिया।

Publish Date:Sat, 16 Jan 2021 04:38 PM (IST) Author: Sujeet Kumar Suman

रांची, [संजय कुमार]। Sarna Dharam Code झारखंड में सरना धर्म कोड आदिवासियों की मांग पर नहीं, ईसाई मिशनरियों की मांग पर विधानसभा से पारित कराया गया। पिछले वर्ष 19 सितंबर को अंडमान निकोबार, नगालैंड व मध्यप्रदेश के मंडला जिले से ईसाई मिशनरियों के फादर झारखंड के आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो के नेतृत्व में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जाकर मिलते हैं और चुनाव में किए गए वादों को याद कराते हैं। उनसे सरना धर्म कोड विधानसभा से पारित कराने की मांग करते हैं। उसके बाद 11 नवंबर को आधे घंटे में विधानसभा से इसे पारित कर दिया गया। यह सब अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत भारत को टुकड़े करने की चाल है। इसके लिए झारखंड की धरती पर षड्यंत्र रची जा रही है, परंतु ईसाई मिशनरियां कान खोल कर सुन ले कि हमारा समाज पाहन- पुजार से ही चलेगा, वेटिकन सिटी से नहीं।

उक्त बातें जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश संयोजक संदीप उरांव ने कही। वे केंद्रीय युवा सरना(चाला) विकास समिति के नेतृत्व में सरना धर्म कोड के खिलाफ रांची के कांके प्रखंड में आयोजित एक दिवसीय धरना को संबोधित कर रहे थे। वहीं समिति के अध्यक्ष सोमा उरांव ने कहा कि सरना धर्म कोड हमें स्वीकार नहीं है। हम हिंदू हैं और हिंदू ही रहेंगे। हिंदू धर्म के तहत ही हमलोगों को भारतीय संविधान से आरक्षण प्राप्त है। बाद में कांके के बीडीओ के माध्यम से राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें उनसे सात सूत्री मांगों पर विचार करने का आग्रह किया गया।

सरना धर्म कोड की मांग के लिए सीएम से कोई आदिवासियों का प्रतिनिधि नहीं मिलने गया था

संदीप उरांव ने कहा कि सरना धर्म कोड की मांग के लिए आदिवासियों का कोई प्रतिनिधि, कोई आदिवासी सांसद व विधायक नहीं मिलने गया था। विधायकों ने भी आदिवासियों को ऐसा समझ लिया कि जो उनके भविष्य व अस्मिता से जुड़ा मामला है उस विषय पर मात्र आधे घंटे ही देना जरूरी समझा। उन्होंने कहा कि अलग कोड को लेकर विधानसभा से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि आदिवासियों की गिनती नहीं होती है, उनकी भाषा का संरक्षण व संवर्धन नहीं हो रहा है। उन सभी विधायकों से पूछना चाहता हूं कि जब गिनती नहीं होती है तब आदिवासियों को आरक्षण कैसे मिल रहा है, उन्हेंं सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे मिल रहा है। जहां तक भाषा की बात है तो सभी आदिवासी समाज की अपनी- अपनी भाषा है, सभी का अपना पर्व त्योहार है। ईसाई मिशनरियां एक साजिश के तहत आदिवासियों को अल्पसंख्यक बनाने में लगी है ताकि मिलने वाली सभी सुविधाएं बंद हो जाए और मतांतरण को बढावा दे सके।

जबर्दस्ती सरना धर्म कोड थोपा गया तो सुप्रीम कोर्ट जाने को बाध्य होंगे

सोमा उरांव ने कहा कि हिंदू धर्म के अंतर्गत ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत आदिवासियों को सभी तरह के आरक्षण प्राप्त हैं। सरना धर्म कोड आते ही आरक्षण समाप्त हो जाएगा और अनुच्छेद 29 के तहत अल्पसंख्यक हो जाएंगे। इससे सभी सुविधाएं समाप्त हो जाएंगी। यदि जबर्दस्ती सरना धर्म कोड थोपा गया तो सुप्रीम कोर्ट में जाने के लिए बाध्य होंगे।

जाति प्रमाणपत्र में पिता के साथ-साथ पति का नाम भी दर्ज कराया जाए

सोमा उरांव ने कहा कि दूसरे समुदाय में शादी करके भी आदिवासी महिलाएं आरक्षण का लाभ ले रही हैं। ऐसे लोग आदिवासियों का हक मारने का काम कर रहे हैं। इसलिए जाति प्रमाणपत्र पर पिता के साथ-साथ पति का नाम भी दर्ज करने का आदेश सरकार जारी करे। कहा, महाराजा मदरा मुंडा के नाम से झारखंड में विश्व जनजाति विवि, अस्पताल एवं स्कूल खोले जाएं। जनजातियों की सामाजिक व्यवस्थाओं की जमीन, सरना(चाला), मसना, हडग़ड़ी, अखरा, जतरा पूजा स्थल, पहनई आदि जमीन की रक्षा करने के लिए कड़े कानून बनाए जाएं।

दूसरे धर्म में जाने वालों को आरक्षण के लाभ से वंचित किया जाए

सोमा ने कहा कि जो आदिवासी अपना धर्म, रीति-रिवाज आदि को छोड़कर दूसरे धर्म में चले गए हैं वैसे लोगों को आरक्षण के लाभ से वंचित किया जाए। उन्होंने आम आदिवासियों से भी कहा कि ईसाई मिशनरियां समाज में फूट डालने में लगी है। इससे बचने की जरूरत है।

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