Jharkhand Religious: 20 से पवित्र कार्तिक मास की होगी शुरुआत, 14 नवंबर को देवोत्थान एकादशी

Jharkhand Religious कार्तिक के महीने को साल का सबसे पवित्र महीना कहा जाता है। हिंदू पंचाग का आठवां महीना कार्तिक का होता है। कार्तिक मास के बीच करवा चौथ गौवत्स द्वादशी धनतेरस दीपावली गोवर्धन पूजा भैया दूज व अन्य त्योहार सहित कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाती है।

Kanchan SinghMon, 18 Oct 2021 01:03 PM (IST)
20 अक्टूबर से पवित्र कार्तिक मास की शुरुआत होगी, इसी माह में छठ महापर्व होता है।

रांची,जासं। कार्तिक के महीने को साल का सबसे पवित्र महीना कहा जाता है। हिंदू पंचांग का आठवां महीना कार्तिक का होता है। कार्तिक मास के बीच करवा चौथ, गौवत्स द्वादशी, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज व अन्य त्योहार सहित कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाती है। 20 अक्टूबर संध्या 7 बजकर 37 मिनट पर शरद पूर्णिमा समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही कार्तिक माह की शुरुआत हो जाएगी और यह 19 नवंबर तक रहेगा।

पंडित बिपिन पांडेय बताते हैं कि कार्तिक मास मोक्ष पाने का सबसे उत्तम समय होता है। चातुर्मास में भगवान सोए रहते हैं और कार्तिक मास में वे जागृत होते हैं।

कार्तिक मास में पड़ेंगे ये पर्व

19 को कोजागरा पूजा

पूजा का शुभ मुहूर्त : मंगलवार संध्या 6:19 बजे

इसमें मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। कोजागरा पर्व को रात्री व्यापिनी पर्व भी कहा जाता है। इसमें चंद्रमा की भी पूजा की जाती है। इस पर्व में रात भर घर में घी के दीपक जलाकर मां लक्ष्मी के पूजा स्थान एवं भंडार कोण में रखने से धन, ऐश्वर्य एवं सुख-शांति की प्राप्ति होती है। इस पर्व को बंगाली समुदाय व मिथिला समाज में धूम धाम से मनाया जाता है।

24 अक्टूबर को करवा चौथ

पूजा का शुभ मुहूर्त संध्या 7:52 बजे

करवा चौथ का व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र व उनके अ'छे स्वास्थ्य के लिए करती हैं। करवा चौथ अखंड सौभाग्य का व्रत है। इस दिन महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत रखती हैं। रात को चलनी से पहले चांद उसके बाद पति का दीदार कर व्रत खोलती हैं।

2 नवंबर को धनतेरस

धनतेरस का मुहूर्त स्थिर लग्न में सुबह 9:56 के बाद से आरंभ हो रहा है। जो अगले दिन सुबह 9:14 मिनट तक रहेगा।

चार नवंबर को शुभ दीपावली

पूजन मुहूर्त : कुंभ लग्न दोपहर 1:14 से 2:46 तक, वृष लग्न रात्रि 5:52 से 7:49 तक

सिंह लग्न रात्रि 12:20 से 2:46 तक।

सिंह लग्न में मां काली की भी पूजा की जाती है। इन लग्नों में वृष लग्न को सबसे उत्तम लग्न माना जाता है।

इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में धन-धान्य व सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

5 नवंबर को गोवर्धन पूजा

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इस पूजा में गायों की पूजा का विशेष महत्व है। ये पूजा अनुराधा नक्षत्र पर पड़ रहा है। शुभ मुहूर्त सूर्योदय के साथ शुरू होगा जो रात 3:44 बजे तक रहेगा। इसी प्रकार 6 नवंबर को भैया दूज का मुहूर्त भी अनुराधा नक्षत्र में सूर्योदय के साथ शुरू होगा जो रात 3:44 बजे तक रहेगा।

छठ महापर्व

दीपावली के 6 दिन बाद छठ महापर्व मनाया जाता है। ये व्रत नहाय-खाय के साथ शुरू होता है। जिसमें व्रतधारी 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं। इस पर्व में सूर्य देव व छठी मैया की उपासना की जाती है। इस व्रत को काफी कठिन माना जाता है। स'चे मन से इस व्रत को करने से हर मनोकामना पूरी होती है।

8 नवंबर को नहाय-खाय

9 नवंबर को खरना

10 नवंबर को पहला अर्घ शाम 5:27 बजे

11 नवंबर को दूसरा अर्घ सुबह 6:34 बजे

देवत्थान एकादशी

14 नवंबर सुबह 9:10 मिनट में एकादशी शुरू होगी। जिसके कारण अगले सुबह यानी कि 15 नवंबर को सूर्योदय के साथ देवत्थान एकादशी मनाया जाएगा।

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