Mothers Day 2021: बच्ची घर पर रोती है... मां ड्यूटी पर होती है... आप भी पढ़ें ये भावुक कहानी...

Mother's Day 2021: मां की ममता का कोई सानी नहीं। यहां पढ़ें एक भावुक कहानी...।

Mothers Day 2021 राजधानी रांची में इन दिनों कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऐसे माहौल में कई ऐसी माताएं हैं जो अपने बच्चों को घर में छोड़ अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद हैं। उनकी बच्चियां घर पर रोती हैं लेकिन मां को ड्यूटी करना होता है।

Alok ShahiSun, 09 May 2021 06:08 AM (IST)

रांची, [मुजतबा हैदर रिजवी]। Mother's Day 2021 मेरी ख्‍वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं... मां से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊं...। मशहूर शायर मुनव्वर राना की ये पंक्तियां बता रही हैं कि मां और बच्चों के बीच का संबद्ध दुनिया का सबसे नेक रिश्ता है। मां शब्द अपने आप में एक पूरी कविता है। पूरी कहानी है। साहित्य में मां पर बहुत कुछ लिखा गया। फिर भी मां की ममता को अब तक कोई भी कवि, लेखक साहित्यकार कोई पूरी तरह कलमबद्ध नहीं कर सका। मां की ममता इतनी विराट है कि इसे शब्दों की सीमा में नहीं बांधा जा सकता। दुनिया में कोई ऐसा बेटा या बेटी नहीं। जो मां का कर्ज चुका सके।

जिस घर में मां हंसती है। वह दुनिया का सबसे बड़ा स्वर्ण हैं। जिस चौखट पर मां के आंसू गिर जाएं, वह जहन्नुम से बदतर है। कोरोना महामारी के दौर में जिस तरह से नारी शक्ति ने मां की ममता और समाज के प्रति अपने दायित्व को पूरा किया। उसके प्रति हम सब अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। चाहें चिकित्सक अथवा नर्स के रूप में सेवा देना हो या सफाई कर्मचारी, सुरक्षा बल में अपनी भूमिका का निर्वहन करना हो। ऐसी माताओं के प्रति यह देश, राज्य और समाज सदा आभारी रहेगा।

राजधानी रांची में इन दिनों कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऐसे माहौल में कई ऐसी माताएं हैं जो अपने बच्चों को घर में छोड़ अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद हैं। उनकी बच्चियां घर पर रोती हैं लेकिन मां को ड्यूटी करना होता है। कोरोना के इस काल में देश को ऐसी ही कर्मठ माताओं की जरूरत है। यह माताएं अपने बच्चों की भी परवाह नहीं करतीं और उन्हें घर के अन्य सदस्यों के हवाले कर जी जान लगाकर दिन रात काम कर रही हैं। ताकि रेल चलती रहे। रेलवे के मुसाफिरों को सुरक्षा मिले।

बेटे को घर पर छोड़ कर आती हैं रितु प्रभा

रितु प्रभात टोप्पो रांची रेल मंडल के परिचालन विभाग में काम करती हैं। परिचालन विभाग का मुख्य काम निगरानी का है। इसमें कोचिंग ऑपरेशन इनफॉरमेशन सिस्टम, फ्रेट ऑपरेशन इनफॉरमेशन सिस्टम, दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखना और दूसरे स्टेशन या विभाग को दिए गए आदेशों को देखना होता है। रितु प्रभा अपने बेटे अनंत कुमार को घर पर ही छोड़ कर ड्यूटी पर आती हैं। कोरोना काल में उनकी ड्यूटी बढ़ गई है और वो काफी मेहनत से जान जोखिम में डालकर काम कर रही हैं। उनका बेटा आनंद कुमार टोप्पो हाई स्कूल का छात्र है। रितु प्रभा के पति की पहले ही मौत हो चुकी है। कई लोगों ने उनसे कहा कि वह छुट्टी ले लें। मगर ऋतु प्रभा का कहना है कि डर के आगे जीत है। कोरोना से डर कर सभी घर बैठ गए तो देश कैसे चलेगा। अगर, सभी घर बैठ जाएंगे तो ट्रेन कैसे चलेगी।

बच्चे को मायके में रोज छोड़कर आफिस आती हैं रेलकर्मी सीमा कच्छप

सीमा कक्षप रांची रेल मंडल में परिचालन विभाग में आफिस सुपरिंटेंडेंट हैं। सीमा के पति बैंक कर्मी हैं। पति भी ड्यूटी पर चले जाते हैं। ऐसे में बेटे को संभालना बड़ा मुश्किल काम है। सीमा कच्छप रोज अपने बेटे को नहला धुला कर पहले ऑनलाइन क्लास करवाती हैं। इसके बाद खिला पिलाकर ऑफिस जाने से पहले बच्चे को मायके में छोड़ कर आती हैं। वह अपनी नानी के पास रहता है। तब सीमा ऑफिस पहुंचती हैं। ड्यूटी पूरी करने के बाद वह फिर अपने मायके जाती हैं और वहां से बेटे को लेकर तब घर पहुंचती हैं। सीमा बताती हैं कि जब वह ड्यूटी करके वापस बेटे के पास पहुंचती है तो वह फौरन गोद में आना चाहता है। लेकिन वह उसे समझाती हैं कि अभी कोरोना काल चल रहा है। इसलिए बहुत एहतियात बरतनी है। वह बताती हैं कि पहले वह नहा कर खुद को सैनिटाइज करती हैं। इसके बाद ही बच्चे को गोद लेती हैं। सीमा कहती हैं कि कोरोना काल में हर तरफ खतरा है। इसके बावजूद देश की सेवा तो करनी ही है। वह देश की खातिर जान जोखिम में डालकर नौकरी कर रही हैं।

देश सेवा से कम नहीं नीलम आइंद का जज्बा

रांची रेल मंडल के परिचालन विभाग में तैनात नीलम आइंद यहां के कंट्रोल रूम में कार्यरत हैं। नीलम आइंद के पति नहीं हैं। उनके लिए भी बच्चे को संभालना और नौकरी करना काफी मुश्किल काम है। लेकिन फिर भी वह बड़ी बहादुरी से दोनों काम करती हैं। कोरोना कॉल में जब ज्यादातर लोग घर में ही रहना पसंद करते हैं। नीलम कंट्रोल रूम में अपना काम बखूबी निभाती हैं। इस दौरान बच्चे की याद आती है तो उससे मोबाइल पर वीडियो कॉल कर बात कर लेती हैं। नीलम के पड़ोसियों ने उनसे कहा कि कुछ दिनों के लिए छुट्टी ले लें। जब कोरोना खत्म हो जाएगा तो फिर ड्यूटी ज्वाइन कर लीजिएगा। अभी ड्यूटी में काफी खतरा है। लेकिन नीलम ने मना कर दिया और कहा कि कर्मचारियों के चलते ही रेल चल रही है। कोरोना के इस दौर में भी ट्रेन का काफी काम है। दूर-दूर से लोग अपने घर पहुंच रहे हैं।

मां होकर नौकरी करना काफी दिलेरी का काम

रांची रेल मंडल में संगीता सिंह वरिष्ठ क्लर्क हैं। इनके भी एक बेटा और एक बेटी है। पति नहीं हैं। इसलिए दोनों बच्चों की देखभाल भी इन्हीं को करनी होती है। ऐसे में यह घर में बच्चों को अकेला छोड़कर ड्यूटी पर होती हैं। संगीता सिंह कहती हैं कि यह भी बड़ा दिलेरी का काम है। दिल बच्चों में लगा रहता है। फिर भी उनके मन में देश सेवा का जज्बा है। सभी रेलकर्मी काम करते हैं तभी ट्रेन चलती है और कोरोना काल में ट्रेन को चलाए रखना देश की बहुत बड़ी सेवा है। उनका कहना है कि मां के साथ रेलकर्मी होना है। एक बड़ा काम है। क्योंकि उन्हें दो मोर्चों पर काम करना होता है। पति होता है तो एक सहारा मिल जाता है। लेकिन संगीता के लिए ऐसा नहीं है। अकेले होते हुए भी वह अपने दोनों मोर्चों पर डटी हैं।

14 महीने की बच्ची को घर में छोड़कर ड्यूटी पर आती है आरपीएफ कांस्टेबल प्रीति

रांची पोस्ट पर तैनात आरपीएफ की कांस्टेबल प्रीति उरांव अपनी मासूम बेटी को घर पर छोड़ कर ड्यूटी पर आती हैं। उनकी 14 महीने की बेटी पलक कच्छप है। उनके पति पंकज कच्छप सैनिक हैं और इन दिनों भटिंडा में तैनात हैं। प्रीति को मासूम बच्ची को घर में छोड़कर ही ड्यूटी पर आना होता है। प्रीति कहती हैं की कोरोना काल में ड्यूटी करना भी एक देश सेवा है और वह यह देश सेवा पूरी तन्मयता के साथ कर रही हैं। प्रीति बताती हैं कि बच्ची उन्हें नहीं पाकर रोती है। घर में उनकी सासू मां बच्ची की देखभाल करती हैं। सुबह जब वह ड्यूटी पर आ रही होती हैं तो उससे पहले ही बच्ची को थपका कर सुला दिया जाता है। लेकिन जैसे ही वह बाहर निकलती हैं बेटी को जैसे एहसास हो जाता है कि वह जा रही हैं। वह उठ जाती है और रोने लगती है। किसी तरह उसको प्यार कर दिल मजबूत कर ड्यूटी पर निकलती हैं।

घर पर बेटी को छोड़कर ड्यूटी निभाती हैं आरपीएफ की इंस्पेक्टर सुनीता

आरपीएफ की रांची पोस्ट पर तैनात इंस्पेक्टर सुनीता अपनी तीन साल की बेटी को घर पर छोड़ कर ड्यूटी कर रही हैं। इन दिनों उनकी ड्यूटी हटिया से ओरगा रेलवे स्टेशन के बीच पड़ने वाले स्टेशनों पर जागरूकता अभियान चलाने की है। आरपीएफ इन दिनों कैंपेन फोर रिवर्स चला रहा है। इसके तहत सुनीता को सुबह से लेकर शाम तक काम करना होता है। इस दौरान उनकी तीन साल की बेटी घर पर नानी के साथ होती है। सुनीता जब काम पर होती हैं तभी बीच-बीच में बेटी का फोन भी आता है। वह फोन से बात कर बेटी को दिलासा देती हैं। बेटी अक्सर रोती है और मां को घर आने की जिद करती है। तो सुनीता उसे समझाती हैं कि अभी देश में कोरोना है। सबको संभल कर रहना है। इसीलिए वह सब को जागरूक कर रही हैं और यह एक बड़ा काम है। 

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