Jharkhand Teachers: झारखंड में गुरुजी की लगने वाली है लॉटरी, जानें कैसे

रक्षाबंधन से पूर्व झारखंड सरकार ने शिक्षकों को बड़ी खुशखबरी दी है। सरकार के स्‍कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अंतर्गत संचालित होने वाले माध्‍यमिक शिक्षा निदेशालय की तरफ से शिक्षकों की प्रोन्‍नत‍ि की दिशा में कदम उठाया गया है।

Brajesh MishraSun, 01 Aug 2021 01:22 PM (IST)
झारखंड में शिक्षकों को प्रोन्‍नति मिलने वाली है। फाइल फोटो

रांची, राज्‍य ब्‍यूरो। रक्षाबंधन से पूर्व झारखंड सरकार ने शिक्षकों को बड़ी खुशखबरी दी है। सरकार के स्‍कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अंतर्गत संचालित होने वाले माध्‍यमिक शिक्षा निदेशालय की तरफ से शिक्षकों की प्रोन्‍नत‍ि की दिशा में कदम उठाया गया है। वर्षो से प्रोन्नति के इंतजार में बैठे माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों को शीघ्र प्रोन्नति का रास्‍ता खुल गया है। प्रोन्नति के अलावा शिक्षकों की सेवा संपुष्टि, वेतन निर्धारण, सेवा निरंतरता आदि की समस्याएं भी शीघ्र सुलझेंगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक हर्ष मंगला ने इन सभी विषयों को लेकर सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों से 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है।

उन्होंने शिक्षकों की प्रोन्नति को लेकर वरीय वेतनमान तथा प्रवर वेतनमान संबंधी जानकारी भी मांगी है। शिक्षकों को नियुक्ति के 12 वर्षों बाद मिलनेवाले वरीय वेतनमान को लेकर उनकी नियुक्ति का वर्ष तथा स्रोत, शिक्षकों की कुल संख्या, वरीय वेतनमान प्राप्त करनेवाले शिक्षकों की संख्या के अलावा इससे संबंधित लंबित मामलों की संख्या कारण सहित बताने को कहा है।इसी तरह, 24 वर्षों की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों को प्रवर वेतनमान देने संबंधित जानकारी भी मांगी गई है।

अभी तक कितने शिक्षकों की सेवा संपुष्टि हुई तथा कितने मामले लंबित हैं, इसकी जानकारी भी जिला शिक्षा पदाधिकारियों से मांगी गई है। इसी तरह सेवा निरंतरता संबंधी मामले तथा वेतन संरक्षण संबंधी मामले को लेकर भी जानकारी देने को कहा गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने दिसंबर 2020 तक सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों को मिलनेवाले लाभ से संबंधित लंबित मामलों की भी जानकारी मांगी है। इसी तरह जनवरी 2021 से जून 2021 तक सेवानिवृत्त शिक्षकों की भी जानकारी मांगी है ताकि उन्हें सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ दिया जा सके।

लंबे समय से शिक्षक संघ कर रहे मांग

शिक्षक संगठनों की ओर से लंबे समय से शिक्षकों की प्रोन्‍नत‍ि का मसला उठाया जाता रहा है। इसके बावजूद शिक्षकों की परेशानियों पर ध्‍यान नहीं दिया गया। कई शिक्षकों को लंबी सेवा के बावजूद वेतन निर्धारण नहीं होने से आर्थिक लाभ नहीं मिल सका। शिक्षक अपनी छोटी छोटी समस्‍याओं के लिए कार्यालयों का चक्‍कर लगाने को मजबूर रहे हैं।

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