रांची में नहीं पकड़े जाते फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाने वाले फ्रॉड, केवल ID Deactivate कराती है साइबर सेल

रांची में नहीं पकड़े जाते फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाने वाले फ्रॉड। जागरण

साइबर अपराधियों के लगातार पांव पसारने का कारण पुलिस की सुस्ती और लापरवाही है। पुलिस अपनी ही कार्रवाई से अपराधियों को हर बार फायदा पहुंचाती है। दरअसल हर बार अलग-अलग लोगों के फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाए जा रहे और लोगों को झांसे में लेकर पैसे की मांग की जा रही।

Vikram GiriWed, 05 May 2021 12:01 PM (IST)

रांची, जासं । साइबर अपराधियों के लगातार पांव पसारने का कारण पुलिस की सुस्ती और लापरवाही है। पुलिस अपनी ही कार्रवाई से साइबर अपराधियों को हर बार फायदा पहुंचाती है। दरअसल, हर बार अलग-अलग लोगों के फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाए जा रहे और लोगों को झांसे में लेकर पैसे की मांग की जा रही। ऐसे फ्रॉड के मामले में साइबर सेल की पुलिस केवल संबंधित अकाउंट बंद करवा कर अपना काम पूरा समझ ले रही। इस बार भी ऐसा हुआ। रांची के डीसी छवि रंजन की फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर दर्जनों लोगों से पैसे की मांग की गई।

इस मामले में रांची के डीसी छवि रंजन ने एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई। जबकि कार्रवाई के नाम पर महज फर्जी फेसबुक अकाउंट को बंद करवाया गया है। अब तक यह पता नहीं लगाया जा सका है कि किस साइबर फ्रॉड या कहां के साइबर फ्रॉड ने यह हरकत की है। पिछले रिकॉर्ड पर गौर किया जाए तो हर बार यही हुआ है। अकाउंट बंद और साइबर सेल का काम भी बंद। अब देखना है कि डीसी की फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाने वाले साइबर अपराधी पकड़े जाते हैं या हर बार की तरह यह फाइल भी बंद हो जाएगी। यही हाल दूसरे जिलों की साइबर सेल का भी है। इक्के दुक्के मामलों को छोड़, साइबर फ्रॉड को पकड़ना पुलिस के लिए सबसे कठिन काम होता है।

रांची डीसी के फर्जी फेसबुक अकाउंट से मांगे गए पैसे

रांची के डीसी छवि रंजन के नाम पर एक फर्जी फेसबुक अकाउंट बना साइबर अपराधियों ने दर्जनों लोगों से पैसे की मांग की। डीसी की फर्जी अकाउंट से मैसेज भेजा गया कहा गया की जरूरी है, कुछ पैसे दो कल सुबह वापस कर दूंगा। सभी को फोन पे या गूगल पर पैसे भेजने के लिए कहा गया। फोन पे के लिए 9455154044 नम्बर भेजा गया। वैसे लोगों से ही पैसे मांगा गया है जो डीसी के परिचित हैं या उनकी फ्रेंड लिस्ट में शामिल हैं। इनमें कई आईएएस, पुलिस अधिकारी और राज्य सेवा के प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। अब पुलिस के पास संबंधित फ्रॉड का नंबर आईपी ऐड्रेस सहित अन्य सुराग रहते हुए भी 24 घंटे से ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी फ्रॉड का कुछ पता नहीं लगाया जा सका है।

साइबर अपराधी दे रहे खुली चुनौती, अफसरों-मंत्रियों के अकाउंट निशाने पर

पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों को नहीं पकड़ पाने का खामियाजा इस तरह मिल रहा है कि वह पुलिस को ही खुली चुनौती दे रहे हैं। अफसरों और मंत्रियों के फेसबुक अकाउंट निशाने पर है। आईएएस, आईपीएस, डीएसपी, मंत्रियों, विधायकों, अफसरों, व्यवसायियों व नामचीन हस्तियों के फेसबुक एकाउंट का क्लोन तैयार कर उनके मित्रों की सूची में शामिल लोगों को मैसेज भेजे जा रहे। तबीयत खराब होने, अस्पताल में भर्ती होने और अति आवश्यक स्थिति दिखा कर पैसे की मांग की जा रही है। ऐसे मामले सामने आने के बाद पुलिस की साइबर सेल केवल अकाउंट बंद कराने तक ही सीमित है। वैसे भी साइबर अपराधी खुद संबंधित अकाउंट को बंद कर देते हैं।

इन प्रमुख मामलों में नहीं पकड़े जा सके हैं साइबर फ्रॉड

केस 01 : डेली मार्केट इंस्पेक्टर राजेश कुमार कुछ महीनों पहले कोरोना संक्रमित थे उस समय उनका फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर लोगों से रुपये मांगा गया।

केस 02 : 24 अगस्त 2020 को रांची के सदर थाने में पोस्टेड एक एएसआइ स्तर के पुलिस अधिकारी कि फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर लोगों से पैसे मांगे गए।

केस 03 : सीआइडी के इंस्पेक्टर रविकांत प्रसाद के नाम पर साइबर अपराधियों ने फर्जी फेसबुक आइडी बना लिया था। इस मामले में भी साइबर अपराधी नहीं पकड़ा गया।

केस 04 : डीएसपी नेहालउद्दीन का फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर लोगों से पैसे मांगे गए। इस मामले में भी साइबर अपराधी नहीं पकड़े गए।

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