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जमीन के नाम 25 करोड़ की ठगी मामले में दो सेवानिवृत्त डीएसपी सहित पांच पर एफआइआर

जागरण संवाददाता, रांची : अपराध अनुसंधान विभाग कर्मचारी गृह निर्माण स्वालंबी सहकारी समिति के सदस्यों को जमीन दिलाने के नाम पर 25 करोड़ रुपये की ठगी का मामला समाने आया है। ठगी का आरोप किसी और नहीं पर बल्कि निदेशक मंडल के पूर्व के अधिकारियों पर लगा है। इसको लेकर समिति के निदेशक मंडल के अध्यक्ष व पूर्व डीएसपी इंद्रमणि चौधरी ने डोरंडा थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है। प्राथमिकी में निदेशक मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष व सेवानिवृत्त डीएसपी महेश राम पासवान, सचिव बैजनाथ सिंह, वित्त निदेशक सह कोषाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार, निदेशक मंडल के सदस्य मांगता पूर्ति, जमीन दलाल अजय कुमार व अन्य को आरोपी बनाया गया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। क्या कहना है इंद्रमणि चौधरी का

दर्ज प्राथमिकी के अनुसार सहकारी समिति 21 जुलाई 2003 से चल रही है। सहकारी समिति के 411 सदस्य हैं। महेश राम पासवान सहित अन्य आरोपित 15 वर्षों तक समिति पर काबिज थे। पूर्व निदेशक मंडल द्वारा सदस्यों को जमीन उपलब्ध कराने सिमलिया और ओरमांझी में जमीन खरीदी गई। जमीन दलाल अजय कुमार की मिलिभगत से बाजार भाव से ज्यादा कीमत में जमीन खरीदे गए। इसके लिए सदस्यों से करीब 25 करोड़ रुपये लिए गए। इसमें ओरमांझी प्रोजेक्ट के लिए 12 करोड़ 62 लाख 5402 रुपये लिया गया। बाद में निर्माण कार्य सड़क, जमीन समतलीकरण के नाम पर करीब 13 करोड़ रुपये लिए गए। पूर्व निदेशक मंडल द्वारा इतना रकम लेने के बाद भी प्रोजेक्ट में सदस्यों को जमीन उपलब्ध नहीं कराया गया। यह प्रोजेक्ट 2008 में शुरू हुआ था। जमीन उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण सदस्यों ने 25 दिसंबर 2018 को नए निदेशक मंडल का गठन किया। नए निदेशक मंडल ने जब सदस्यों के लिए ओरमांझी प्रखंड के आनंदी मौजा में खरीदे गए 31 एकड़ 44 डिसमील की जांच की तो पता चला कि जमीन फर्जी है। खरीदे गए जमीन में से मात्र 08 एकड़ 74 डिसमील जमीन का मोटेशन हुआ है। यह भी आरोप लगाया गया है कि पुराने निदेशक मंडल ने अभी तक नये निदेशक मंडल को प्रभार नहीं सौंपा है। साथ ही, आज तक समिति का ऑडिट भी नहीं कराया गया।

जमीन खरीदने में सीएनटी एक्ट का नहीं हुआ अनुपालन

आरोप है कि पूर्व के निदेशक मंडल ने सदस्यों के लिए जमीन खरीद में सीएनटी एक्ट का भी अनुपालन नहीं किया। मांगता पूर्ति के नाम पर सिमलिया तथा ओरमांझी प्रोजेक्ट में अलग जाति और निवास स्थान बताकर जमीन खरीदा गया।

जमीन समतलीकरण के लिए लिए 13 करोड़....

पूर्व निदेशक मंडल ने ओरमांझी प्रोजेक्ट के लिए सदस्यों से 13 करोड़ रुपया जमीन समतलीकरण, रास्ता, ड्रेनेज और बिजली का पोल गाड़ने के लिए लिया गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। 2010 में प्रति 10 डिसमील के लिए तीन लाख 80 हजार रुपया बोला गया था बाद में 2015 में सदस्यों से उसी जमीन के 4 लाख 80 हजार रुपया देने पड़े। जो जमीन खरीदे गए उसमें आठ एकड़ जमीन ही कब्जे में लिया जा सका बाकी जमीन का म्यूटेशन सीएनटी और भूईहरी जमीन होने के कारण नहीं हो सका।

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