Jharkhand crime: डेढ़ करोड़ की नकली दवाएं जांच से पहले ही हो गईं चाेरी, हार्ड डिस्क भी गायब

Jharkhand crime ड्रग एंड फूड कंट्रोल के कार्यालय में रखी दवा और खाद्य सामग्री के हजारों सैंपल को चोर उड़ा ले गए। साथ ही कंप्यूटर में रखे गए सैंपलों के ब्यौरा से भी छेड़छाड़ की गई और कंप्यूटर के कई हार्ड डिस्क गायब कर दिए गए हैं।

Kanchan SinghSun, 28 Nov 2021 09:36 AM (IST)
ड्रग एंड फूड कंट्रोल के कार्यालय में रखी दवा और खाद्य सामग्री के हजारों सैंपल को चोर उड़ा ले गए।

रांची {अनुज तिवारी} । जिन नकली दवाओं से लोगों की बचाने की तैयारी चल रही थी उसे ही सदर अस्पताल परिसर में स्थित ड्रग एंड फूड कंट्रोल के कार्यालय में रखी दवा और खाद्य सामग्री के हजारों सैंपल को चोर उड़ा ले गए। साथ ही कंप्यूटर में रखे गए सैंपलों के ब्यौरा से भी छेड़छाड़ की गई और कंप्यूटर के कई हार्ड डिस्क गायब कर दिए गए हैं। यहां पर कोरोना के दौरान व उसके बाद बिक रही नकली दवाओं की सूचना मिलने के बाद जिले के आठ दवा गाेदामों को सील किया गया था, जिसमें करीब 1.5 करोड़ की दवा बंद है।

इन्हीं दवाओं के सैंपल जांच के लिए रखे गए थे, जिसे लेकर लीगल कार्रवाई की जा रही थी और इसे जांच के लिए बाहर भेजा जाना था। इसके अलावा अगल-अलग दवा दुकानों से भी दवाओं के सैंपल जमा किए गए थे। जिसे जांच के लिए देश के कसौली, गोवाहाटी, कोलकाता, चेन्नई, गाजीयाबाद, इज्जतनगर व दिल्ली भेजा जाना था। चोरी की जो घटना घटी है उसमें सबसे अधिक नुकसान दवाओं के सैंपल के साथ हुई है। जबकि इस कार्यालय में दो कमरे फूड कंट्रोल के अधीन है, जहां दरवाजा तोड़ा गया लेकिन सैंपल से अधिक छेड़छाड़ नहीं की गई है।

इस पूरे मामले पर राज्य ड्रग कंट्रोल के उप-निदेशक सुमंत कुमार तिवारी बताते हैं कि यह सोची समझी साजिश के तहत किया गया है। अभी लगातार नकली दवाओं की कालाबाजारी पर अंकुश लगाया गया है। रांची में ही आठ ऐसे गोदामों को सील किया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि जिस तरह से नकली दवाएं पकड़ी जा रही हैं उसके बाद ही किसी ऐसे ही व्यवसायी ने इस तरह का काम करवाया है। जिसे जल्द ही प्रशासन की मदद से पकड़ लिया जाएगा। फिलहाल इस चोरी की घटना को लेकर लोअर थाना में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है।

 इसकी छानबीन चल रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी रूप में जांच कार्य बाधित नहीं होगा और अपराधियों को छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने एसएसपी से भी सुरक्षा की गुहार लगायी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से अपराधी का मनोबल बढ़ता जा रहा है उससे जानलेवा हमला भी हो सकता है। लगातार नकली दवाओं की कालाबाजारी को बढ़ने नहीं दिया जाएगा।

कार्यालय की छत थी खुली, अंदर सभी कमरे में नहीं लगाए गए थे ताले :

इस पूरी घटना को अपराधियों ने देर रात अंजाम दिया। इसमें देखा गया कि कार्यालय में बाहर मुख्य द्वार पर ताला जरूर लगाया गया था। लेकिन छत का दरवाजा खुला था जिससे चोर अंदर प्रवेश किए। इतना ही नहीं यहां पर सात कमरे हैं जिसमें से सिर्फ फूड कंट्रोल यूनिट के दो रूम में ताला लगा था। बाकि किसी भी कमरे में ताला लगाया ही नहीं गया था। डाटा कलेक्शन सेंटर में भी कोई ताला नहीं लगाया था। जहां पर अधिकतर दवाओं के सैंपल रखे हुए थे। साथ ही हार्ड डिस्क से लेकर कंप्यूटर यहीं पर रखा गया है। जिसे चोरों ने नुकसान पहुंचाया।

इस कार्यालय में एक भी सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं :

इस कार्यालय में एक भी सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं हैं। यहां किसी भी सुरक्षाकर्मी को रखा ही नहीं गया है। यहां पर आठ ड्रग इंस्पेक्टर मौजदू हैें। इन्हीं के जिम्मे पूरा कार्यालय का काम निर्भर है। दूसरी ओर सिविल सर्जन डा विनोद कुमार बताते हैं कि यह कार्यालय उनसे संबद्धता नहीं नहीं रखता और इसकी जिम्मेवारी ड्रग कंट्रोल विभाग की है। उन्होंने कहा कि जगह मांगने पर यह कार्यालय उपलब्ध कराया गया है, जिसमें वे गार्ड मुहैया नहीं करा सकतें, सुरक्षा का इंतजाम उन्हें खुद ही करना होगा।

सुबह कार्यालय खुलते ही उड़ गए होश :

ड्रग इंस्पेक्टर प्रणव बताते हैं कि जब उन्होंने सुबह कार्यालय खोला तो अंदर का दृष्य देखकर वे दंग रह गए। अंदर सारा सैंपल बिखरा पड़ा था। अलमीरा से फाइल निकाल फेंका हुआ था। देखने से लग रहा था कि काेई कुछ ढूंढ़ रहा था। लेकिन सभी चीजें इस तरह से फेंकी गई है कि कई सैंपल खराब भी हो गए होंगे ।

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