Jharkhand: तितलियाें की बहुरंगी उड़ान देखनी हो तो जमशेदपुर के पृथ्वी उद्यान की करें सैर

घोड़ाबांधा स्थित थीम पार्क में भी तितलियों का अलग से पार्क बनाने की योजना है।
Publish Date:Wed, 28 Oct 2020 01:34 PM (IST) Author: Sujeet Kumar Suman

जमशेदपुर, जासं। रंग-बिरंगी तितलियों की अठखेलियां हर किसी के मन को आनंद से भर देती है। झारखंड के सारंडा के जंगल कभी सैंकड़ों तरह की तितलियों की बहुरंगी उड़ान के लिए भी जाने जाते थे। अभी भी वहां तितलियों की दर्जनों प्रजातियां मौजूद हैं। अभी एक महीने पहले ही सितंबर में बिग बटरफ्लाई मंथ का राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन हुआ था, जिसमें झारखंड की तितलियों ने भी टॉप-5 में जगह बनाई थी।

वहीं लौहनगरी जमशेदपुर भी प्यारी तितलियों की भरमार है। यहां लगातार तितलियों का कुनबा बढ़ रहा है। टाटा स्टील के जूलोजिकल पार्क में तो अलग से तितली घर ही है। मानगो का पृथ्वी उद्यान अब इन तितलियों की नई पनाहगार बना है। 20 एकड़ में फैले इस उद्यान में मंडराती लाल, नीली, पीली रंग-बिरंगी तितलियां आपको आकर्षित करती हैं।

इन्हें देखकर आपका मन या तो मीठी कल्पनाओं के सागर में गोते लगाने लगेगा या घंटों इनकी इधर से उधर फुदकन भरी इनकी उड़ान संग मचल उठेगा। आपका भी मन चाहेगा कि काश! हम भी इन्हीं की तरह पंख लगा के कहीं दूर उड़ जाते।

उद्यान में तितलियों की कई प्रजातियां

अगर आप भी रंग-बिरंगी तितलियों को देखने के शौकीन हैं तो मानगो स्थित पृथ्वी उद्यान की सैर करने जरूर आएं। मानगो के पृथ्वी उद्यान में कृष्णा पीकॉक, कॉमन जेजबेल, ऑरेंज ओकलीफ, फाइव बार स्वॉर्ड टेल,  कॉमन नवाब, यलो गोर्गन, नॉर्दन जंगल क्वीन आदि प्रजातियों की तितलियां लोगों का आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसके अलावा यहां प्लेन टाइगर, स्प्राइट टाइगर, कामन मोरमाॅल, शल्क पंखी, डिप्टेरा, पैटेंट लेडी, मोनार्च के अलावा निम्फालिडी प्रजाति की तितलियां भी पाई गयी हैं। तरह-तरह की तितलियों को देख इस उद्यान की तरफ अब वनस्पति विज्ञानियों औऱ शोधार्थियों का भी ध्यान गया है।

मानगो पृथ्वी उद्यान मे जल्द बनेगा स्टडी सेंटर

जमशेदपुर की डीएफओ ममता प्रियदर्शी की मानें तो मानगो स्थित पृथ्वी उद्यान में जल्द ही तितलियों का स्टडी सेंटर बनेगा। इसके अलावा जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित थीम पार्क में भी तितलियों का अलग से पार्क बनाने की योजना है। उन्होंने कहा कि मानगो में तितलियों की प्रजातियों को सहेजा जाएगा। पृथ्वी उद्यान में प्राकृतिक तौर पर दर्जनों प्रकार की तितलियां देखी जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि तितली पहले बागों में काफी संख्या में देखी जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह विलुप्त होती जा रही हैं। इस पार्क को बनाने का मुख्य लक्ष्य है, तितलियों का संरक्षण करना। उनपर रिसर्च करना और उनके प्रजनन का ख्याल रखना। यहां तितलियों के जीवन चक्र के बारे में जानकारी जुटाई जाती है। यहां 70 से अधिक तितलियों की प्रजाति को संरक्षित करने की योजना है।

फिलहाल यहां 33 प्रजातियों को संरक्षित किया गया है। इस पार्क की सबसे लाभदायक जानकारी ये है कि यहां की तितलियां कृत्रिम नस्ल की नहीं हैं, बल्कि प्राकृतिक हैं। रंग-बिरंगे फूलों और अलग-अलग प्रजाति के पेड़-पौधों से भरे इस उद्यान को बनाने के पीछे मकसद यह रहा है कि लोगों को जुबिली पार्क जैसा ही और कई मायने में उससे बेहतर पार्क लोगों को दिया जाय। अब यह जैव विविधता में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

तितलियों को है संरक्षण की जरूरत

हाल के दिनों में ग्लोबल वार्मिंग से लेकर रेडिएशन तक ने तितलियों की आबादी पर बुरा असर डाला है। ऐसे में उनके संरक्षण की जरूरत है। तितलियां जहां परागकणों को एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाकर उनकी निषेचन क्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, तितलियां खाद्य शृंखला की भी महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वनस्पतिरूपी भोजन पर आश्रित तितलियां दूसरे जीवों जैसे- मेढक, बर्र, और पक्षियों के लिए बेहद अहम प्रोटीन आहार होती हैं।

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