लापरवाही की हद: झारखंड की राजधानी में मुर्दे को भी ड्यूटी पर लगाया

लापरवाही की हद: झारखंड की राजधानी में मुर्दे को भी ड्यूटी पर लगाया। जागरण

कोरोना से जंग जीतने का मैनजमेंट कैसा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदर अस्पताल में व्यवस्था संभालने के लिए जो टीम बनाई गई है उसमें कोरोना संक्रमित से लेकर मृत व्यक्ति को भी रखा गया है।

Vikram GiriMon, 03 May 2021 09:33 AM (IST)

रांची [प्रणय कुमार सिंह] । कोरोना से जंग जीतने का मैनजमेंट कैसा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदर अस्पताल में व्यवस्था संभालने के लिए जो टीम बनाई गई है उसमें कोरोना संक्रमित से लेकर मृत व्यक्ति को भी रखा गया है। लापरवाही इस हद तक है कि मृत व्यक्ति जब जिंदा था। वह जिला प्रशासन की आफिस जाकर वहां अपना मेडिकल रिपोर्ट जमा कर टीम से नाम हटाने की गुहार लगाता है। वहां से उसे रिसिंविंग भी मिल जाती है। कुछ दिन बाद उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से टीम में संशोधन किया जाता है, लेकिन उस मृत व्यक्ति का नाम फिर से टीम में शामिल कर लिया जाता है।

शिक्षक अजय की हो चुकी है मृत्यु और आश्रित हैं पाजिटिव

सदर अस्पताल के नए भवन के अंतर्गत तीसरे, चौथे व पांचवें तल्ले को कोविड वार्ड बनाया गया है। प्रशासिनक नियंत्रण एवं विधि-व्यवस्था संभालने के लिए नौ अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। टीम में दंडाधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी के साथ उनके सहयोग के लिए शिक्षकों व अलग-अलग विभागों के कर्मियों को रखा गया है। नौ टीम में एक स्क्रीनिंग टीम है। इसमें सहयोगी कर्मी के तौर पर गौरीदत्त मंडेलिया स्कूल के शिक्षक अजय कुमार को रखा गया है जबकि उनकी मृत्यु हो चुकी है। इसी स्कूल के शिक्षक आश्रित शमेंद्र खाखा को भी टीम में रखा गया है। जबकि ये कोरोना संक्रमित हैं।

दो बार टीम में किया संशोधन, लेकिन हर बार नाम

जिला प्रशासन ने 18 अप्रैल को टीम गठित कर आदेश जारी कर दिया। एक टीम को दो ग्रुप क व ख में बांटा गया। ग्रुप क की ड्यूटी 23 अप्रैल तक और ग्रुप ख की ड्यूटी 24 से 30 अप्रैल को लगाई गई। इस आदेश में ग्रुप ख में शिक्षक अजय कुमार व आश्रित समेंद्र खाखा नाम था। अजय कुमार बीमार रहते थे। उनका इलाज वेल्लोर से चल रहा था। उसने 20 अप्रैल को जिला प्रशासन कार्यालय जाकर मेडिकल रिपोर्ट सौंपकर कोविड सेंटर में नहीं लगाने की गुहार लगाई। वहां से उन्हेांने रिसिविंग भी लाकर स्कूल के प्राचार्य को दे दिया। इसके बाद 23 अप्रैल को टीम संशोधित किया गया। लेकिन अजय कुमार का नाम नहीं हटाया गया। इधर, अजय कुमार 24 अप्रैल से कोविड ड्यूटी ज्वाइन नहीं किए। 26 अप्रैल को शिक्षक अजय कुमार की मृत्यु हो गई। इधर, 30 अप्रैल को टीम में संशोधन कर फिर से आदेश जारी किया गया और इसमें ग्रुप ख में फिर से मृतक शिक्षक अजय कुमार का नाम है। इसमें ग्रुप क की 1 से 7 मई तक और ग्रुप ख की ड्यूटी 8 से 14 मई तक लगाई गई है।

डीईओ की दी गई थी सूचना

गौरीदत्त मंडेलिया स्कूल प्रबंधन ने बताया कि शिक्षक अजय कुमार की मृत्यु 26 अप्रैल को रात में हो गई। इसके बाद प्राचार्य ने उसी दिन जिला शिक्षा पदाधिकारी व हेडमास्टर के वाट्सएप ग्रुप में शिक्षक की मृत्यु की सूचना दे दी। गौरतलब है कि जिला प्रशासन कार्यालय से शिक्षकों आदेश जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से दी जाती है। इधर, शिक्षक आश्रित समेंद्र भी पॉजिटिव होने की सूचना इसी वाट्सएप ग्रुप में दिया है। बावजूद, न तो उन्हें टीम से हटाया गया है और न ही उन्हें ज्वाइन करने कहा गया है।

24 से 30 अप्रैल तक मरीज की सहायता किसने की या भगवान भरोसे रहे

मृत शिक्षक अजय कुमार व पाजिटिव शिक्षक आश्रित समेंद्र दोनों ही ग्रुप ख में हैं। इनकी ड्यूटी रात्रि 11 से सुबह 7 बजे तक लगाई गई है। इस स्लॉट में सिर्फ यही दोनों सहयोगी के रूप में हैं। अब सवाल उठ रहा है कि इन दोनों की जगह 24 से 30 अप्रैल तक ड्यूटी कौन किया। किसने मरीज को सहयोग किया या भगवान भरोसे छोड़ दिया। इतना ही नहीं अब 8 से 14 मई तक कौन ड्यूटी करेगा।

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