Separate Religion code: जनगणना में आदिवासी समाज के लिए अलग धर्म कोड की मांग, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा

जनगणना प्रपत्र में आदिवासी धर्म कोड / कालम की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम मांग पत्र सौंपा गया।

Separate Religion code वर्ष 2021 के जनगणना प्रपत्र में आदिवासी धर्म कोड / कालम की मांग को लेकर देव कुमार धान के नेतृत्व में प्रधानमंत्री गृह मंत्री एवं भारत के जनगणना महारजिस्ट्रार को मांग पत्र सौंपा गया। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली पहुंचकर संबंधित मांग पत्र समर्पित किया।

Kanchan SinghFri, 26 Feb 2021 05:30 PM (IST)

रांची,जासं। वर्ष 2021 के जनगणना प्रपत्र में आदिवासी धर्म कोड / कालम की मांग को लेकर  राष्ट्रीय आदिवासी इंडिजिनियस धर्म समन्वय समिति, भारत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव कुमार धान के नेतृत्व में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं भारत के जनगणना महारजिस्ट्रार को मांग पत्र सौंपा गया। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली पहुंचकर संबंधित मांग पत्र अलग-अलग कार्यालयों में समर्पित किया।

इस मांग पत्र में कहा गया है कि भारत के प्रथम जनगणना 1871 से लेकर 1951 तक हम आदिवासियों के लिए जनगणना प्रपत्र में अलग धर्म कालम की व्यवस्था थी जिसे वर्ष 1961 के जनगणना प्रपत्र से एक साजिश के तहत हटा दिया गया था। आदिवासियों के धर्म को अन्य धर्म के कलाम में डाल दिया गया था। उस हटाए गए आदिवासी धर्म कोड /कालम  को जनगणना  प्रपत्र में पुनः स्थापित किया जाए ताकि पूरे देश के 15 करोड़ आदिवासियों को उनकी धार्मिक पहचान मिल सके तथा  आदिवासियों की गणना  ठीक ढंग से हो। 

आदिवासियों की सही ढंग से गणना नहीं होने के कारण उनका सही आंकड़ा देश के सामने नहीं आ पाता है।  इसके फलस्वरूप आदिवासियों को उनका वाजिब हक नहीं मिल पाता। मांग पत्र सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से पूर्व मंत्री देव कुमार धान के अलावा पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, प्रेम शाही मुंडा, संतोष नेताम, डाक्टर हीरा मीना, डाक्टर बिरसा उरांव, अभय भुटकुवार, काली चरण बिरुवा,  काशीनाथ शाह, गुलजार सिंह मरकाम, बादल किस्कु, जयपाल सिंह सरदार, रामनाथ पहाड़िया, विश्वनाथ सिंह खेरवार, दशरथ हंसदा, लोकनाथ सिंह चेरो लूकस कोरबा समेत अन्य थे |

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