दौड़ने के पहले ही हांफ रही मुख्यमंत्री स्मार्ट ग्राम योजना, तीन साल में सिर्फ कागजों पर ही विकास

रांची, विनोद श्रीवास्तव। ऐसा गाव जहा हर घर में बिजली हो, पाइपलाइन के जरिए घर-घर तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो, जहा का पंचायत भवन मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटी से लैस हो, गाव से प्रखंड और प्रखंड से जिला मुख्यालय तक पहुंचने वाली सड़क पर गाड़ियां सरपट दौड़ सके, वहा डाकघर हो, बैंक की शाखाएं हो, उन्नत कृषि और समृद्ध बाजार हो।

कुछ ऐसी ही स्मार्ट सोच के साथ सरकार ने मुख्यमंत्री स्मार्ट ग्राम योजना के अधीन पायलट प्राजेक्ट के तहत पाच गावों को स्मार्ट बनाने की दिशा में 2015 में कदम बढ़ाया था। इसके तहत जून 2016 तक गावों के चयन का लक्ष्य रखा गया था, परंतु यह प्रक्रिया पूरी होने में 2017 पहुंच गया।

देर से ही सही, सरकार की इस स्मार्ट सोच को बोकारो के बुंडू, पूर्वी सिंहभूम के कातासोल, गुमला के शिवराजपुर, हजारीबाग के चेनारो तथा राची के गिंजोठाकुर गाव में उतारने का मसौदा तय हुआ, परंतु सरकार के कदम यहा भी सुस्त पड़ गए। योजना की मौजूदा स्थिति की बात करें तो चयनित पाच गावों में से अबतक सिर्फ कातासोल के समेकित विकास का करार हो सका है।

ग्रामीण विकास विभाग, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, पूर्वी सिंहभूम और गैर सरकारी संस्था कला मंदिर के साथ हुए त्रिपक्षीय समझौते के बाद कला मंदिर को गाव के समेकित विकास के लिए 87 लाख रुपये दिए गए। संबंधित गाव के समेकित विकास के लिए तैयार डीपीआर बहरहाल स्वीकृति की प्रक्त्रिया में है।

राजधानी राची से सटे गिंजोठाकुर गाव को विलेज डेवलपमेंट प्लान का इंतजार : कातासोल को छोड़ अन्य गावों की बात करें तो यहा विकास कयोजनाएं अभी कागजों पर ही दौड़ रही है। राजधानी राची से सटे गिंजोठाकुर गाव का अबतक जहा (वीडीपी) ही तैयार नहीं हुआ है, वहीं बुंडू का वीडीपी का सरकार मूल्याकन कर रही है। शिवराजपुर के लिए तैयार वीडीपी में कुछ त्रुटिया रह गई हैं, जिसे दूर करने की फाइल बढ़ाई गई है। चेनारो का वीडीपी ग्रामीण विकास विभाग को मिल चुका है। वीडीपी के मुताबिक एमओयू का मसौदा तय करने का निर्देश हजारीबाग जिला प्रशासन को भेजा गया है।

ग्रामीणों की 600 प्रविष्टियों में से चुने गए थे पाच पंचायत : प्राथमिकता आधारित विकास को केंद्र में रखकर ग्रामीण विकास विभाग ने ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, गैर सरकारी संगठनों आदि से प्रविष्टिया आमंत्रित की थी। स्मार्ट गावों के चयन के लिए लगभग 600 प्रविष्टिया ग्रामीण विकास विभाग तक पहुंची थी।

स्मार्ट गावों के चयन के लिए पाच सवाल पूछे गए थे, जिसके लिए 100 अंक निर्धारित थे। 20 अफसरों, ग्रामीण विकास के जानकार, सामाजिक कार्यकर्ताओं आदि की टीम ने प्रथम चरण के लिए इन पाच गावों का चयन किया था।

प्रथम चरण के लिए जारी हुए 4.20 करोड़ : चयनित गावों को स्मार्ट बनाने की कड़ी में ग्रामीण विकास विभाग ने 4.20 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है। संबंधित राशि अक्षय ऊर्जा, सूचना तकनीक, उन्नत कृषि, बाजार की उपलब्धता, प्रज्ञा केंद्रों को पेपरलेस बनाने आदि पर खर्च की जानी है। विकास की शेष योजनाएं विभागीय कंवर्जन पर ली जाएंगी।

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