रांची सदर अस्‍पताल में लगा 70 लाख का ब्‍लड सेपरेटर मशीन, अब मिलेगी प्‍लाज्‍मा व ब्‍लड कंपोनेंट्स की सुविधा

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Ranchi Sadar Hospital Jharkhand News Hindi Samachar रांची सदर अस्पताल में अगले महीने से ये सारी सुविधाएं मिलने लगेगी। अभी ब्लड प्रॉसेसिंग के लिए सदर हॉस्पिटल से हर दिन ब्लड रिम्स भेजा जाता है। इसमें समय लग जाता है।

Sujeet Kumar SumanSat, 15 May 2021 03:42 PM (IST)

रांची, जासं। Ranchi Sadar Hospital, Jharkhand News, Hindi Samachar रांची सदर अस्पताल में ब्लड सेपरेटर मशीन पहुंच चुका है। जिले में रिस्म के बाद अब सदर अस्पताल में ब्लड प्रोसेसिंग के लिए ब्लड बैंक में सेपरेटर मशीन लगाने की तैयारी है। 70 लाख की ब्लड सेपरेटर मशीन पहुंचने के बाद ब्लड बैंक में सिविल वर्क का काम तेज कर दिया गया है। अगले महीने से यहां ब्लड प्रोसेसिंग की सुविधा मिलने लगेगी। इससे प्लाज्मा और ब्लड कंपोनेंट्स की समस्या दूर हो सकेगी। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. एस मंडल ने बताया कि मशीन आ चुकी है। ब्लड बैंक की डिजाइन में कुछ बदलाव किया गया था।

भवन निर्माण की ओर से सिविल वर्क शुरू हो चुका है। इसमें एक महीने का समय लगेगा। इसके बाद मरीजों को ब्लड बैंक की सारी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलने लगेंगी। अभी ब्लड प्रोसेसिंग के लिए सदर हॉस्पिटल से हर दिन ब्लड रिम्स भेजा जाता है। इसके लिए एक स्टाफ को ड्यूटी में लगाया जाता है। ग्रुप मैच कराने से लेकर कंपोनेंट के लिए भी ब्लड रिम्स भेजा जाता है। इस चक्कर में प्रोसेसिंग होने तक मरीजों के पास इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं होता। वहीं ब्लड आने के बाद मरीजों को ब्लड चढ़ाया जाता है। जबकि कई बार तो गर्भवती महिलाओं के लिए भी ब्लड प्रोसेसिंग कराने में देर हो जाती है।

स्टोरेज में ब्लड रहेगा उपलब्ध

अस्‍पताल बिल्डिंग में ही ब्लड स्टोरेज यूनिट बनाई गई है। यहां पर रिम्स से ब्लड प्रोसेसिंग कराने के बाद रखा जाता है। ऐसे में वहां पर गिनती की यूनिट ही उपलब्ध रहती है। नई मशीन आ जाने के बाद प्रोसेस्ड यूनिट भी रखी जाएगी, ताकि मरीजों को तत्काल ग्रुप मैच कराने के बाद ब्लड दिया जा सके। ऐसे में टाइम बचेगा और मरीज को समय से खून मिल जाएगा। फिलहाल ब्लड कंपोनेंट्स की सुविधा सदर के ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं है। इसके लिए रिम्स व प्राइवेट ब्लड बैंकों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। डिमांड अधिक होने के कारण रिम्स से भी लोगों को कंपोनेंट्स समय पर नहीं मिल पाता है। मशीन चालू हो जाने से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और पैक्ड सेल के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं होगी। मालूम हो कि एक यूनिट ब्लड से 3 लोगों की जान बचाई जा सकती है।

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